29 जून 2026
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साइबर ठगी: असम के तीन आरोपी गिरफ्तार, सेवानिवृत्त कर्मचारी से ₹8.50 लाख की धोखाधड़ी

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साइबर ठगी: असम के तीन आरोपी गिरफ्तार, सेवानिवृत्त कर्मचारी से ₹8.50 लाख की धोखाधड़ी

सारांश

भुवनेश्वर के एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को यूको बैंक की फर्जी लिंक से ₹8.50 लाख का चूना लगाने वाले असम के तीन साइबर ठग पकड़े गए। जांच में जामताड़ा से संचालित अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा, मुख्य सरगना कलीम अंसारी अभी भी फरार।

मुख्य बातें

ओडिशा कमिश्नरेट पुलिस ने 28 जून 2026 को असम के तीन साइबर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पीड़ित बुलू दास ( 64 वर्ष ), सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी, के खाते से 3 नवंबर 2025 को ₹8.50 लाख की अवैध निकासी हुई।
आरोपियों ने यूको बैंक के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट का झांसा दिया।
तीनों आरोपी झारखंड के जामताड़ा से संचालित गिरोह के सरगना कलीम अंसारी से जुड़े पाए गए।
गिरोह म्यूल बैंक खातों और फर्जी सिम कार्ड के जरिए ठगी की रकम ट्रांसफर करता था।
मुख्य सरगना समेत शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

ओडिशा की कमिश्नरेट पुलिस ने 28 जून 2026 को असम के तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया, जिन पर भुवनेश्वर के त्रिनाथ बाजार निवासी 64 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी बुलू दास से ₹8.50 लाख की साइबर ठगी का आरोप है। आरोपियों ने यूको बैंक के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर पीड़ित के बैंक खाते से यह रकम अवैध रूप से निकाली।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार तीनों आरोपी असम के हैं। हारुन रशीद (29 वर्ष), जो पेशे से फार्मासिस्ट है, नगांव जिले के रूपाहीहाट का निवासी है। जुनैदुर इस्लाम (22 वर्ष) और एजाजुल हक (23 वर्ष) दोनों मोरीगांव जिले के लहरीघाट के निवासी हैं। यह कार्रवाई भुवनेश्वर के साइबर क्राइम एंड इकोनॉमिक ऑफेंस (CC&EO) थाने में दर्ज मामला संख्या 206/25 की जांच के दौरान की गई।

ठगी का तरीका

नवंबर 2025 में अज्ञात व्यक्तियों ने बुलू दास को फोन कर पेंशन के लिए लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराने में सहायता का झांसा दिया। इसके बाद 3 नवंबर 2025 को उनके मोबाइल पर यूको बैंक के नाम से एक फर्जी लिंक भेजा गया, जिसमें लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का दावा किया गया था। पुलिस के अनुसार, दास ने लिंक खोलकर मांगी गई जानकारी भर दी, जिसके बाद उनके मोबाइल पर कई ओटीपी आए और कुछ ही देर में उनके खाते से ₹8.50 लाख की अवैध निकासी कर ली गई।

अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा

जांच में पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक रिकॉर्ड और केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया। यह गिरोह फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) और सिम कार्ड उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करता था। पुलिस जांच के अनुसार, तीनों आरोपी झारखंड के जामताड़ा से संचालित गिरोह के मुख्य सरगना कलीम अंसारी से जुड़े हैं, जो पहले से ही CC&EO थाने में दर्ज एक अन्य मामले में वांछित है।

आरोपियों की भूमिका

पुलिस के अनुसार, हारुन रशीद ने अपने सहयोगी परवेज आलम चौधरी के साथ मिलकर अलग-अलग नामों से बैंक खाते खुलवाए और सिम कार्ड हासिल कर उन्हें जामताड़ा स्थित सरगना कलीम अंसारी को सौंपा। वहीं एजाजुल हक मोरीगांव जिले में म्यूल बैंक खाताधारकों की भर्ती करता था और अशरफुल नामक व्यक्ति के साथ मिलकर असम में फर्जी बैंक खातों का नेटवर्क संचालित करता था।

आगे की कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि मामले में शामिल शेष आरोपियों, जिनमें मुख्य सरगना कलीम अंसारी भी शामिल है, की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। यह मामला देश में बढ़ते फिशिंग-आधारित साइबर अपराधों की गंभीर प्रवृत्ति को उजागर करता है, जिसमें वरिष्ठ नागरिक और सेवानिवृत्त लोग विशेष रूप से निशाने पर हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि पेंशन और लाइफ सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाएं अभी भी डिजिटल साक्षरता की कमी के बीच संचालित होती हैं। मुख्य सरगना कलीम अंसारी का पहले से वांछित होने के बावजूद फरार रहना यह सवाल उठाता है कि अंतरराज्यीय समन्वय कितना प्रभावी है। जब तक म्यूल खाता नेटवर्क की जड़ों पर प्रहार नहीं होता, गिरफ्तारियां महज लक्षण-उपचार बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुवनेश्वर साइबर ठगी मामले में क्या हुआ?
भुवनेश्वर के त्रिनाथ बाजार निवासी सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी बुलू दास को नवंबर 2025 में यूको बैंक की फर्जी लिंक भेजकर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट का झांसा दिया गया और उनके खाते से ₹8.50 लाख की अवैध निकासी की गई। ओडिशा कमिश्नरेट पुलिस ने इस मामले में असम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार तीनों आरोपी कौन हैं?
तीनों आरोपी असम के हैं — नगांव जिले के रूपाहीहाट निवासी 29 वर्षीय हारुन रशीद (पेशे से फार्मासिस्ट), और मोरीगांव जिले के लहरीघाट निवासी 22 वर्षीय जुनैदुर इस्लाम तथा 23 वर्षीय एजाजुल हक। इन सभी पर म्यूल बैंक खाते और फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने का आरोप है।
जामताड़ा गिरोह से इन आरोपियों का क्या संबंध है?
पुलिस जांच के अनुसार, तीनों आरोपी झारखंड के जामताड़ा से संचालित साइबर ठगी गिरोह के मुख्य सरगना कलीम अंसारी से जुड़े हैं। हारुन रशीद ने फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड कलीम अंसारी को सौंपे, जो पहले से CC&EO थाने में दर्ज एक अन्य मामले में वांछित है।
साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट क्या होता है?
म्यूल अकाउंट वे फर्जी या दूसरों के नाम पर खुले बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर उसे छुपाने के लिए किया जाता है। इस मामले में एजाजुल हक मोरीगांव में ऐसे खाताधारकों की भर्ती करता था।
इस तरह की साइबर ठगी से कैसे बचें?
बैंक कभी भी लिंक भेजकर ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगते। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और लाइफ सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाएं केवल बैंक शाखा या आधिकारिक सरकारी पोर्टल पर ही पूरी करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचित करें।
राष्ट्र प्रेस
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