गुवाहाटी में 3डी प्रिंटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन, असम के एमएसएमई को मिलेगी अत्याधुनिक तकनीक
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 22 जुलाई 2025 को गुवाहाटी में डिजिटल डिजाइन एवं 3डी प्रिंटिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का औपचारिक उद्घाटन किया। यह केंद्र असम के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को रैपिड प्रोटोटाइपिंग, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और स्वदेशी उत्पाद विकास की सुविधाएँ उपलब्ध कराएगा — जिसका उद्देश्य राज्य को पूर्वोत्तर भारत के विनिर्माण एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
केंद्र में क्या सुविधाएँ उपलब्ध होंगी
इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से शोधकर्ताओं, छात्रों, स्टार्टअप और उद्योगों को अत्याधुनिक डिजाइन सॉफ्टवेयर, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीक और रैपिड प्रोटोटाइपिंग उपकरण उपलब्ध होंगे। इससे नए विचारों को कम समय में व्यावसायिक उत्पादों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज़ और किफ़ायती होगी।
केंद्र को विशेष रूप से स्वास्थ्य, एयरोस्पेस, ऊर्जा, कृषि और अन्य उभरते क्षेत्रों में नवाचार को गति देने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। मुख्यमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'यह केंद्र नए उत्पादों के विकास को गति देगा और हमारे एमएसएमई को असम में ही समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यह आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित होगा।'
एमएसएमई और स्टार्टअप पर असर
राज्य सरकार के अनुसार, स्थानीय उद्यमी और स्टार्टअप अब राज्य के भीतर ही नए और अभिनव उत्पाद विकसित कर सकेंगे, जिससे आयातित तकनीकों और पुर्जों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह पहल एमएसएमई क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सीधे मज़बूत करती है, क्योंकि प्रोटोटाइप निर्माण और उत्पाद परीक्षण अब बाहरी केंद्रों पर निर्भर नहीं रहेगा।
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत में अब तक उन्नत विनिर्माण अवसंरचना की भारी कमी रही है, जिसके कारण इस क्षेत्र के उद्यमियों को बेंगलुरु, पुणे या दिल्ली जैसे औद्योगिक केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। यह केंद्र उस अंतराल को पाटने का प्रयास है।
औद्योगिक विविधीकरण की दिशा में कदम
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह केंद्र अनुसंधान और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे असम के औद्योगिक विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और देश की आत्मनिर्भर विनिर्माण की दिशा में हो रहे प्रयासों को भी मज़बूती मिलेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी उत्तर-पूर्व के औद्योगिक विकास के लिए विशेष पैकेज और नीतिगत प्रोत्साहन दे रही है। असम सरकार की यह पहल उस व्यापक रणनीति के अनुरूप है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार तकनीक आधारित औद्योगिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इस केंद्र के सफल संचालन के बाद राज्य के अन्य ज़िलों में भी इस तरह की सुविधाओं के विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और उच्च मूल्य वाले विनिर्माण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में यह केंद्र एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।