असम बना भारत का पहला 'माचा चाय' उत्पादक राज्य, तिनसुकिया में शुरू हुआ व्यावसायिक उत्पादन
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 3 जुलाई 2026 को घोषणा की कि असम भारत में व्यावसायिक स्तर पर माचा चाय का उत्पादन करने वाला पहला राज्य बन गया है। तिनसुकिया जिले के छोटा टिंगराई चाय बागान में इस ऐतिहासिक उत्पादन की शुरुआत हुई, जिसे देश के चाय उद्योग में विविधीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया जा रहा है।
माचा उत्पादन की शुरुआत और पहली नीलामी
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, असम में उत्पादित माचा चाय की पहली खेप गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र में ₹3,000 प्रति किलोग्राम की दर से बिकी। यह मूल्य इस प्रीमियम उत्पाद के प्रति बाज़ार की उत्साहजनक स्वीकृति को दर्शाता है। सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'आपकी पसंदीदा माचा चाय अब असम में बनेगी।'
भारत-जापान सहयोग का परिणाम
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह उपलब्धि भारत और जापान के एक दशक लंबे सहयोग का नतीजा है। इस साझेदारी के तहत तकनीकी विशेषज्ञता, विशेष मशीनरी और ज्ञान-साझाकरण के ज़रिए असम के चाय क्षेत्र में नवाचार लाने का प्रयास किया गया। माचा मूलतः जापान की पारंपरिक हरी चाय है, जो विशेष रूप से उगाई गई पत्तियों को बारीक पीसकर बनाई जाती है।
वैश्विक बाज़ार में माचा की बढ़ती माँग
हाल के वर्षों में माचा की वैश्विक लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी है — पेय पदार्थों, मिठाइयों और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादों में इसके व्यापक उपयोग के कारण। गौरतलब है कि असम पारंपरिक रूप से काली चाय के उत्पादन के लिए विश्व-प्रसिद्ध है और देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। माचा उत्पादन से राज्य प्रीमियम हरी चाय की बढ़ती वैश्विक माँग में भी हिस्सेदारी कर सकेगा।
असम के चाय उद्योग पर असर
व्यावसायिक माचा उत्पादन से असम के चाय उत्पादकों और प्रसंस्करणकर्ताओं के लिए प्रीमियम घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में नए अवसर खुलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि इससे मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और चाय निर्यात की आय में वृद्धि होगी। यह कदम राज्य की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों को अपनाकर उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार किया जा रहा है।
आगे की राह
इस सफलता के बाद असम के अन्य चाय बागानों में भी माचा उत्पादन विस्तार की संभावना बताई जा रही है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की चाय विरासत को संरक्षित करते हुए उद्योग को आधुनिक बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता मानक बनाए रखे गए, तो असम का माचा वैश्विक बाज़ार में जापानी माचा के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है।