असम स्कूल यूनिफॉर्म विवाद: शिक्षा मंत्री रानोज पेगू बोले — 100% पॉलिएस्टर पर रोक, 30% कॉटन अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
असम के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने शनिवार, 27 जून को शिवसागर में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों को आपूर्ति की जाने वाली यूनिफॉर्म में 100 प्रतिशत पॉलिएस्टर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा चुकी है और कपड़े में कम से कम 30 प्रतिशत कॉटन होना अनिवार्य है। यह बयान उन आरोपों के जवाब में आया है जिनमें सरकारी यूनिफॉर्म में अत्यधिक पॉलिएस्टर के इस्तेमाल की बात कही गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
पेगू ने बताया कि यूनिफॉर्म की खरीद सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार होती है और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों से रैंडम सैंपल लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाता है। उन्होंने कहा, "स्पेसिफिकेशन में साफ तौर पर बताया गया है कि कितना पॉलिएस्टर और कॉटन होना चाहिए। हम स्कूलों से रैंडम तरीके से सैंपल लेकर लैब में टेस्ट करते हैं ताकि यह पता चल सके कि कपड़ा तय मानकों के मुताबिक है या नहीं।"
मंत्री ने यह भी जोड़ा कि यह व्यवस्था नई नहीं है — पहले से ही कॉटन की मात्रा लगभग 30 प्रतिशत तय थी और ब्लेंडेड कपड़े के लिए स्वीकृत मानकों का पालन अनिवार्य रहा है।
आपूर्तिकर्ताओं पर कार्रवाई का प्रावधान
पेगू ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले सप्लायरों को नोटिस जारी किया जाता है और उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्कूल में तय सीमा से अधिक पॉलिएस्टर वाली यूनिफॉर्म पहुँचती है, तो सरकार तत्काल जाँच करने के लिए तैयार है।
मंत्री ने कहा, "अगर कोई किसी ऐसे स्कूल के बारे में बताता है जहाँ पॉलिएस्टर की मात्रा तय सीमा से ज़्यादा है, तो हम तुरंत जाँच करेंगे। हम पहले से ही शिक्षण संस्थानों को सप्लाई की जाने वाली यूनिफॉर्म की रैंडम टेस्टिंग कर रहे हैं।"
पॉलिएस्टर और स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों की चिंता
कुछ विशेषज्ञों ने पॉलिएस्टर के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता जताई है, विशेष रूप से बच्चों की संवेदनशील त्वचा के संदर्भ में। पेगू ने इस पर कहा कि इस मुद्दे को सही नज़रिए से देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, "आज बाज़ार में मिलने वाले कई कपड़ों में पॉलिएस्टर का मिश्रण होता है। यह कहना सही नहीं है कि हर पॉलिएस्टर वाला कपड़ा नुकसानदायक होता है। अहम बात यह है कि कॉटन और पॉलिएस्टर का तय मिश्रण बनाए रखा गया है या नहीं।"
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में सरकारी कल्याण योजनाओं के तहत वितरित सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सरकार की प्रतिबद्धता
मंत्री ने अंत में दोहराया कि असम सरकार अपने कल्याणकारी कार्यक्रमों के तहत आपूर्ति की जाने वाली स्कूल यूनिफॉर्म में गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रैंडम लैब टेस्टिंग की यह प्रक्रिया जारी रहेगी और किसी भी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।