आजम खान के जौहर ट्रस्ट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, रामपुर-दिल्ली-सहारनपुर में 10 ठिकानों पर छापे
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19 अगस्त 2026 को समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ कथित धनशोधन मामले में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत रामपुर, सहारनपुर और नई दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली।
कार्रवाई का केंद्र बिंदु
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले की जड़ सरकारी ठेकों से जुड़े धन के कथित डायवर्जन में है। ईडी को संदेह है कि सरकारी परियोजनाओं में काम करने वाले कुछ निजी ठेकेदारों ने कथित तौर पर सरकारी भुगतान का एक हिस्सा जौहर ट्रस्ट को दान के रूप में दिया और विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण कार्यों में लगाया। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं जो ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच धन के प्रवाह को दर्शाते हैं।
तलाशी का मुख्य उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित धन का पता लगाना और उससे जुड़े वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन के रिकॉर्ड तथा डिजिटल साक्ष्य जुटाना बताया गया है। ईडी की टीमें बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी गहन जांच कर रही थीं।
जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय की पृष्ठभूमि
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना आजम खान से जुड़ी रही है और यही ट्रस्ट रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन करता है। आजम खान इस विश्वविद्यालय के संस्थापक और कुलाधिपति रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय के लिए जमीन के कथित अधिग्रहण और अवैध कब्जे को लेकर आजम खान के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए थे। प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर भी विश्वविद्यालय की भूमि से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं। मौजूदा जांच हालांकि इन भूमि विवादों से आगे बढ़कर सरकारी ठेकों से धन के कथित डायवर्जन पर केंद्रित है।
ईडी की जांच का दायरा
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी परियोजनाओं के ठेकेदारों को भुगतान के बाद धन का प्रवाह किस तरह हुआ और क्या उसका कोई हिस्सा जौहर ट्रस्ट या विश्वविद्यालय की गतिविधियों में लगाया गया। जांच के दायरे में यह भी है कि कुछ ठेकेदारों द्वारा ट्रस्ट को कथित तौर पर पर्याप्त राशि दान के रूप में दी गई और विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य कराए गए। ईडी इन लेनदेन की प्रकृति, स्रोत और लाभार्थियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब आजम खान और उनसे जुड़े संस्थानों के खिलाफ विभिन्न मामलों में कानूनी कार्रवाई पहले भी होती रही है। जांच अभी जारी है और तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेजों तथा डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले में धनशोधन की कड़ी स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।