19 अगस्त 2026
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आजम खान के जौहर ट्रस्ट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, रामपुर-दिल्ली-सहारनपुर में 10 ठिकानों पर छापे

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आजम खान के जौहर ट्रस्ट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, रामपुर-दिल्ली-सहारनपुर में 10 ठिकानों पर छापे

सारांश

ईडी ने आजम खान के जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित धनशोधन की जांच में रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में एक साथ 10 ठिकानों पर छापे मारे। सरकारी ठेकों से धन के कथित डायवर्जन और ट्रस्ट को दान की कड़ी स्थापित करना एजेंसी का मुख्य लक्ष्य है।

मुख्य बातें

ईडी ने 19 अगस्त 2026 को रामपुर , सहारनपुर और नई दिल्ली में 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
कार्रवाई पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय द्वारा की गई।
जांच का केंद्र सरकारी ठेकों से धन के कथित डायवर्जन और उसे मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट व जौहर विश्वविद्यालय में लगाने का आरोप है।
आजम खान विश्वविद्यालय के संस्थापक और कुलाधिपति रहे हैं; ट्रस्ट की स्थापना भी उनसे जुड़ी है।
वर्ष 2019 में भी विश्वविद्यालय की जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण को लेकर आजम खान के खिलाफ मामले दर्ज हो चुके हैं।
बरामद वित्तीय दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे की कार्रवाई संभव।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 19 अगस्त 2026 को समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ कथित धनशोधन मामले में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत रामपुर, सहारनपुर और नई दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली।

कार्रवाई का केंद्र बिंदु

जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले की जड़ सरकारी ठेकों से जुड़े धन के कथित डायवर्जन में है। ईडी को संदेह है कि सरकारी परियोजनाओं में काम करने वाले कुछ निजी ठेकेदारों ने कथित तौर पर सरकारी भुगतान का एक हिस्सा जौहर ट्रस्ट को दान के रूप में दिया और विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण कार्यों में लगाया। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं जो ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच धन के प्रवाह को दर्शाते हैं।

तलाशी का मुख्य उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित धन का पता लगाना और उससे जुड़े वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन के रिकॉर्ड तथा डिजिटल साक्ष्य जुटाना बताया गया है। ईडी की टीमें बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी गहन जांच कर रही थीं।

जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय की पृष्ठभूमि

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना आजम खान से जुड़ी रही है और यही ट्रस्ट रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन करता है। आजम खान इस विश्वविद्यालय के संस्थापक और कुलाधिपति रहे हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय के लिए जमीन के कथित अधिग्रहण और अवैध कब्जे को लेकर आजम खान के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए थे। प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर भी विश्वविद्यालय की भूमि से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं। मौजूदा जांच हालांकि इन भूमि विवादों से आगे बढ़कर सरकारी ठेकों से धन के कथित डायवर्जन पर केंद्रित है।

ईडी की जांच का दायरा

एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी परियोजनाओं के ठेकेदारों को भुगतान के बाद धन का प्रवाह किस तरह हुआ और क्या उसका कोई हिस्सा जौहर ट्रस्ट या विश्वविद्यालय की गतिविधियों में लगाया गया। जांच के दायरे में यह भी है कि कुछ ठेकेदारों द्वारा ट्रस्ट को कथित तौर पर पर्याप्त राशि दान के रूप में दी गई और विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य कराए गए। ईडी इन लेनदेन की प्रकृति, स्रोत और लाभार्थियों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब आजम खान और उनसे जुड़े संस्थानों के खिलाफ विभिन्न मामलों में कानूनी कार्रवाई पहले भी होती रही है। जांच अभी जारी है और तलाशी के दौरान बरामद दस्तावेजों तथा डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले में धनशोधन की कड़ी स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो किसी भी राजनेता के लिए कहीं अधिक खतरनाक जमीन है। सरकारी ठेकेदारों और एक शैक्षणिक ट्रस्ट के बीच धन के प्रवाह की जांच, यदि साबित हो, तो यह महज व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के संस्थागत दुरुपयोग का मामला बनता है। उल्लेखनीय यह भी है कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ ईडी की कार्रवाइयों पर 'राजनीतिक प्रतिशोध' के आरोप लगते रहे हैं — इस मामले में भी समाजवादी पार्टी इसी तर्क को आगे कर सकती है। असली कसौटी यह होगी कि जांच एजेंसी डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर कितना ठोस मामला अदालत में पेश कर पाती है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने जौहर ट्रस्ट पर छापे क्यों मारे?
ईडी को कथित तौर पर सरकारी ठेकों से जुड़े धन के डायवर्जन और उसे मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट तथा जौहर विश्वविद्यालय में लगाने के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी पीएमएलए, 2002 के तहत इस कथित धनशोधन की कड़ी स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट क्या है?
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़ी है और यह ट्रस्ट रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन करता है। आजम खान इस विश्वविद्यालय के संस्थापक और कुलाधिपति रहे हैं।
ईडी की छापेमारी किन-किन जगहों पर हुई?
ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 19 अगस्त 2026 को रामपुर, सहारनपुर और नई दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत की गई।
आजम खान के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हुए हैं?
हां, वर्ष 2019 में जौहर विश्वविद्यालय के लिए जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और कब्जे को लेकर आजम खान के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए थे। प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर भी विश्वविद्यालय की भूमि से जुड़े कई विवाद सामने आ चुके हैं।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
जांच अभी जारी है और तलाशी के दौरान बरामद वित्तीय दस्तावेजों तथा डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ईडी आगे की कार्रवाई कर सकती है। साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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