ईडी छापेमारी के बाद BJP का हमला: सपा राज में आजम समेत सभी नेता भ्रष्टाचार में लिप्त थे — सुशील शाक्य
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सपा सरकार के कार्यकाल पर तीखा प्रहार किया है। फर्रुखाबाद से BJP विधायक सुशील शाक्य ने बुधवार, 19 अगस्त को कहा कि सपा शासन में न केवल आजम खान, बल्कि पार्टी के सभी नेता भ्रष्टाचार में डूबे हुए थे। उन्होंने जौहर विश्वविद्यालय में लगाई गई करोड़ों की राशि के स्रोत पर सीधे सवाल उठाए।
मुख्य आरोप: जौहर विश्वविद्यालय और भ्रष्टाचार का पैसा
विधायक सुशील शाक्य ने कहा, 'आजम खान ने नगर विकास मंत्री रहते हुए बड़ी मात्रा में अधिकारियों से पैसा विश्वविद्यालय में लगवाया। वह भ्रष्टाचार का ही पैसा था। अब आज वह हिसाब दें कि पैसा वह कहाँ से लाए, किसके द्वारा लाए? वह पूरी सूची दें और बताएँ कि यह जो करोड़ों रुपये जौहर विश्वविद्यालय में लगा है, यह लाए कहाँ से?' उनका यह बयान ईडी की कार्रवाई को सीधे भ्रष्टाचार-जाँच की कड़ी बताता है।
शिवपाल सिंह पर भी निशाना: ₹500 करोड़ का आरोप
शाक्य ने सपा के एक और नेता शिवपाल सिंह पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया, 'शिवपाल सिंह ने ₹500 करोड़ एक साथ अपने विद्यालय के लिए लिया था। उस समय मुख्यमंत्री ने उनके डिग्री कॉलेज के लिए ₹500 करोड़ एक बार में स्वीकृत किए थे।' यह आरोप सपा सरकार के कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक तस्वीर पेश करने की कोशिश है।
ईडी की छापेमारी: रामपुर से दिल्ली तक 10 ठिकाने
ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने बुधवार को आजम खान के रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली सहित कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में बताई जा रही है, हालाँकि ईडी ने आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
सपा के भविष्य पर तंज और BJP का दावा
विधायक शाक्य ने सपा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'सपा की प्रदेश में सरकार अगले 20 वर्षों में बनने वाली नहीं है। जनता ने BJP को दो बार पूर्ण बहुमत दिया है और तीसरी बार भी BJP की सरकार बनेगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि कानून अपना काम करेगा और सपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई 'आज नहीं तो कल' तय है।
आगे क्या
ईडी की यह कार्रवाई आजम खान से जुड़े मामलों की जाँच की एक नई कड़ी मानी जा रही है। राजनीतिक हलकों में इसे उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। सपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।