राजौरी के बाल जारलान गांव में एनआरएलएम की बीसी यूनिट से बैंकिंग क्रांति, ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले का दूरदराज़ गांव बाल जारलान वर्षों तक बुनियादी बैंकिंग सेवाओं से वंचित रहा, लेकिन केंद्र सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) योजना के तहत स्थापित बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) यूनिट ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। जम्मू-कश्मीर बैंक के सहयोग से संचालित यह यूनिट अब ग्रामीणों को उनके दरवाज़े पर ही वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
एनआरएलएम के तहत बाल जारलान में स्थापित बीसी यूनिट खाता खोलने, नकद जमा और निकासी, सामाजिक सुरक्षा लाभ, सरकारी योजनाओं से जुड़े लेन-देन और अन्य डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सीधे घर-घर पहुंचाती है। इस पहल से बुज़ुर्गों, गरीब परिवारों, छात्रों और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों को सबसे अधिक लाभ मिल रहा है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी और दूरदराज़ इलाकों में बैंकिंग पहुंच एक बड़ी चुनौती रही है। बाल जारलान जैसे गांवों के निवासियों को पहले मामूली बैंकिंग कार्यों के लिए भी शहरी केंद्रों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।
स्थानीय लोगों की आवाज़
स्थानीय निवासी मोहम्मद नियाज़ ने बताया, 'पहले यहां बैंकिंग सुविधा उपलब्ध नहीं थी। हमें लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन इस सेंटर ने हमें बहुत बड़ी राहत दी है। हमें वीकेंड पर भी मदद मिल जाती है।'
महिला लाभार्थी नाजिम अख्तर ने कहा, 'पहले एफडी के लिए भी हमें शहरी इलाकों में जाना पड़ता था। लेकिन आज बैंक अकाउंट, एफडी, पेंशन और इंश्योरेंस सर्विस — हर सुविधा यहीं उपलब्ध है।' उनके अनुभव इस बात की गवाही देते हैं कि वित्तीय समावेशन केवल नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर असर दिखा रहा है।
रोज़गार और आर्थिक सशक्तिकरण
वित्तीय समावेशन के साथ-साथ इस यूनिट ने स्थानीय स्तर पर टिकाऊ रोज़गार के अवसर भी पैदा किए हैं। यूनिट को संचालित करने वाले एसएचजी सदस्यों को नियमित आय का ज़रिया मिला है, जो एनआरएलएम के मूल उद्देश्य — ग्रामीण गरीब परिवारों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना — के अनुरूप है।
प्रोग्राम मैनेजर कामरान हनी ने बताया, 'एनआरएलएम के तहत शुरू की गई बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट यूनिट उन स्थानीय लोगों की ज़रूरतों को पूरा करती है, जो बैंकिंग सेवाओं से वंचित रह गए थे। हम लोगों को उनके घर पर ही सरकारी कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा सेवाओं का लाभ उठाने में भी मदद करते हैं।'
डिजिटल इंडिया का ज़मीनी उदाहरण
गौरतलब है कि एनआरएलएम केंद्र सरकार का प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ना है। बाल जारलान की बीसी यूनिट इस कार्यक्रम की सफलता का एक ठोस उदाहरण बनकर उभरी है, जहां डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन की परिकल्पना व्यावहारिक रूप ले रही है।
आगे की राह
बाल जारलान की यह पहल राजौरी जिले के अन्य दूरदराज़ गांवों के लिए एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है। यदि इस तरह की बीसी यूनिटों का विस्तार जम्मू-कश्मीर के और पहाड़ी क्षेत्रों में हुआ, तो वित्तीय समावेशन की दिशा में यह एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।