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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी राजनीतिक हिंसा जारी, BNP गुटों में 94 मौतें: रिपोर्ट

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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी राजनीतिक हिंसा जारी, BNP गुटों में 94 मौतें: रिपोर्ट

सारांश

सत्ता बदली, लेकिन बांग्लादेश की ज़मीनी राजनीति नहीं बदली। BNP के सत्ता में लौटने के बाद भी 2026 में 94 मौतें और 3,587 घायल — ये आँकड़े बताते हैं कि स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई किसी एक दल या दौर की समस्या नहीं, बल्कि एक गहरी संरचनागत बीमारी है।

मुख्य बातें

जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की 467 घटनाएँ , 94 मौतें और 3,587 घायल दर्ज।
BNP के अंदरूनी गुटीय संघर्षों में 112 घटनाएँ , 18 मौतें और 1,215 घायल — यह सरकार में रहते हुए की स्थिति है।
18 अक्टूबर को नारायणगंज में BNP युवा नेता रिपन मियां की धारदार हथियारों से हत्या, धार्मिक कार्यक्रम की मेहमान सूची विवाद से जुड़ी।
28 फरवरी को चुआडांगा में BNP-JI झड़प में दो सगे भाइयों की जान गई; पुलिस ने तीन को गिरफ़्तार किया।
'ऐन ओ सालिश केंद्र' (ASK) के रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि हर सत्तारूढ़ दल में सत्तासीन होने पर अंदरूनी हिंसा बढ़ती है।
यूनियन परिषद चुनावों में 2016 में 147 और 2021 में 113 लोगों की चुनावी हिंसा में मौत।

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद भी राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। 'द डिप्लोमैट' में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की 467 घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई और 3,587 लोग घायल हुए। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के समर्थकों की हत्याओं ने साफ कर दिया है कि स्थानीय प्रभुत्व, राजनीतिक पदों और आर्थिक संसाधनों पर पकड़ को लेकर पुरानी प्रतिद्वंद्विता अब भी बरकरार है।

ताज़ा घटनाक्रम

18 अक्टूबर को नारायणगंज जिले के पैस्का इलाके में BNP की युवा शाखा 'जुबो दल' के स्थानीय नेता रिपन मियां पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। परिवार के सदस्य उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रिपन की बेटी शीला ने स्थानीय मीडिया को बताया कि कई लोगों ने उनके पिता का पीछा कर हमला किया।

स्थानीय BNP कार्यकर्ताओं के अनुसार, एक धार्मिक कार्यक्रम की मेहमान सूची में किसका नाम शामिल हो, इसी विवाद ने दो गुटों के बीच तनाव को हत्या तक पहुँचा दिया। स्थानीय BNP अध्यक्ष ने इस हत्या को राजनीतिक दबदबे की लड़ाई से जुड़ा बताया।

इससे पहले 28 फरवरी को चुआडांगा जिले में BNP और जमात-ए-इस्लामी (JI) समर्थकों के बीच हुई झड़प में दो सगे भाइयों की जान चली गई। पुलिस के अनुसार, रमज़ान के दौरान इफ्तार के बाद शुरू हुई बहस ने हिंसक संघर्ष का रूप ले लिया। हाफ़िज़ुर रहमान की उसी रात मौत हो गई, जबकि उनके भाई और स्थानीय JI नेता मोफ़िज़ुर रहमान ने 10 मार्च को ढाका के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने परिवार की ओर से दर्ज हत्या के मामले के बाद तीन लोगों को गिरफ़्तार किया, जिनमें एक स्थानीय BNP नेता और उसकी स्वयंसेवी शाखा का एक पूर्व पदाधिकारी शामिल था।

आँकड़ों की गंभीर तस्वीर

रिपोर्ट में बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठन 'ऐन ओ सालिश केंद्र' (ASK) के रिकॉर्ड, अकादमिक शोध और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर पिछले दो दशकों से अधिक के राजनीतिक हिंसा के पैटर्न का विश्लेषण किया गया है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच दर्ज 467 घटनाओं में से 112 घटनाएँ BNP के अंदरूनी गुटों के बीच टकराव की थीं, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 1,215 लोग घायल हुए।

ये आँकड़े BNP प्रमुख तारिक रहमान की निर्वाचित सरकार और उससे पहले के अंतरिम प्रशासन — दोनों कार्यकालों को कवर करते हैं। तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद संभाला था।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

गौरतलब है कि यह हिंसा का चक्र कोई नई परिघटना नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2002 से 2006 के बीच BNP के पहले कार्यकाल में ASK ने पार्टी के भीतर 284 अंदरूनी झड़पें दर्ज की थीं, जिनमें 55 लोगों की मौत हुई। उसी दौरान अवामी लीग (AL) के भीतर संघर्षों में 37 लोग मारे गए थे।

जब 2009 में अवामी लीग सत्ता में लौटी, तो 2009 से 2012 के बीच ASK ने उस पार्टी के भीतर 799 अंदरूनी संघर्ष दर्ज किए, जिनमें 97 लोगों की मौत हुई। उसी अवधि में BNP में 229 झड़पें हुईं और 21 लोग मारे गए। यह ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन के अंत के बाद नई राजनीतिक संस्कृति की उम्मीद जताई जा रही थी।

स्थानीय चुनावों के दौरान हिंसा का स्तर और भी भयावह रहा है। ASK के अनुसार, 2016 के यूनियन परिषद चुनावों में 147 लोगों और 2021 के चुनावों में 113 लोगों की मौत चुनावी हिंसा में हुई।

हिंसा के मूल कारण

रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक संगठनों के भीतर वर्चस्व की लड़ाई के साथ-साथ ठेकों, ज़मीन, संपत्ति और रोज़गार से जुड़े विवाद हिंसा के प्रमुख कारण हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक नेटवर्क और राजनीतिक पहुँच पर नियंत्रण की होड़ ने हिंसा को एक संरचनागत समस्या बना दिया है।

आगे क्या

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन तो होते रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ख़त्म नहीं हुई। जब तक स्थानीय स्तर पर संसाधनों के वितरण और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को संस्थागत ढाँचे में नहीं बाँधा जाता, तब तक हिंसा का यह दुष्चक्र बांग्लादेश के सामने एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सत्ता संरचना की स्थायी खामी है। BNP जब विपक्ष में थी तब उसने अवामी लीग की हिंसा को मुद्दा बनाया, और अब सत्ता में आने के दो सप्ताह के भीतर उसके अपने गुट आपस में भिड़ गए। ASK के दो दशकों के आँकड़े बताते हैं कि यह चक्र दल-निरपेक्ष है — जो भी सत्ता में आता है, उसके भीतर स्थानीय ठेकों, ज़मीन और नेटवर्क की होड़ हिंसा को जन्म देती है। असली सवाल यह है कि क्या तारिक रहमान सरकार में स्थानीय संरचनाओं को जवाबदेह बनाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति है — या यह भी पिछले दलों की राह पर चलेगी।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में 2026 में राजनीतिक हिंसा के क्या आँकड़े हैं?
'ऐन ओ सालिश केंद्र' (ASK) के अनुसार जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की 467 घटनाएँ दर्ज हुईं, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई और 3,587 लोग घायल हुए। इनमें से 112 घटनाएँ BNP के अंदरूनी गुटीय संघर्षों की थीं।
BNP के सत्ता में आने के बाद भी हिंसा क्यों जारी है?
रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय ठेकों, ज़मीन, संपत्ति और रोज़गार पर नियंत्रण की लड़ाई राजनीतिक हिंसा का मूल कारण है, जो सत्ता परिवर्तन के बाद भी नहीं बदलती। BNP प्रमुख तारिक रहमान के 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद संभालने के दो सप्ताह के भीतर ही गुटीय हिंसा की घटनाएँ सामने आ गईं।
नारायणगंज और चुआडांगा में क्या हुआ था?
18 अक्टूबर को नारायणगंज के पैस्का इलाके में BNP युवा शाखा के नेता रिपन मियां पर धारदार हथियारों से हमला कर हत्या की गई — यह विवाद एक धार्मिक कार्यक्रम की मेहमान सूची से उपजा था। 28 फरवरी को चुआडांगा में BNP और जमात-ए-इस्लामी समर्थकों के बीच झड़प में दो भाइयों — हाफिज़ुर रहमान और मोफिज़ुर रहमान — की जान गई।
क्या बांग्लादेश में पहले भी ऐसी राजनीतिक हिंसा होती रही है?
हाँ, ASK के ऐतिहासिक आँकड़े दर्शाते हैं कि यह दीर्घकालिक समस्या है। 2002-2006 में BNP शासन के दौरान पार्टी के भीतर 284 झड़पों में 55 मौतें हुईं; 2009-2012 में अवामी लीग के कार्यकाल में पार्टी के अंदर 799 संघर्षों में 97 मौतें दर्ज की गईं।
स्थानीय चुनावों में बांग्लादेश में कितनी हिंसा होती है?
ASK के अनुसार यूनियन परिषद चुनावों के दौरान 2016 में 147 और 2021 में 113 लोगों की मौत चुनावी हिंसा में हुई। यह दर्शाता है कि स्थानीय राजनीतिक पदों के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा अक्सर जानलेवा रूप ले लेती है।
राष्ट्र प्रेस
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