बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी राजनीतिक हिंसा जारी, BNP गुटों में 94 मौतें: रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद भी राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। 'द डिप्लोमैट' में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की 467 घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें 94 लोगों की मौत हुई और 3,587 लोग घायल हुए। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के समर्थकों की हत्याओं ने साफ कर दिया है कि स्थानीय प्रभुत्व, राजनीतिक पदों और आर्थिक संसाधनों पर पकड़ को लेकर पुरानी प्रतिद्वंद्विता अब भी बरकरार है।
ताज़ा घटनाक्रम
18 अक्टूबर को नारायणगंज जिले के पैस्का इलाके में BNP की युवा शाखा 'जुबो दल' के स्थानीय नेता रिपन मियां पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। परिवार के सदस्य उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रिपन की बेटी शीला ने स्थानीय मीडिया को बताया कि कई लोगों ने उनके पिता का पीछा कर हमला किया।
स्थानीय BNP कार्यकर्ताओं के अनुसार, एक धार्मिक कार्यक्रम की मेहमान सूची में किसका नाम शामिल हो, इसी विवाद ने दो गुटों के बीच तनाव को हत्या तक पहुँचा दिया। स्थानीय BNP अध्यक्ष ने इस हत्या को राजनीतिक दबदबे की लड़ाई से जुड़ा बताया।
इससे पहले 28 फरवरी को चुआडांगा जिले में BNP और जमात-ए-इस्लामी (JI) समर्थकों के बीच हुई झड़प में दो सगे भाइयों की जान चली गई। पुलिस के अनुसार, रमज़ान के दौरान इफ्तार के बाद शुरू हुई बहस ने हिंसक संघर्ष का रूप ले लिया। हाफ़िज़ुर रहमान की उसी रात मौत हो गई, जबकि उनके भाई और स्थानीय JI नेता मोफ़िज़ुर रहमान ने 10 मार्च को ढाका के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने परिवार की ओर से दर्ज हत्या के मामले के बाद तीन लोगों को गिरफ़्तार किया, जिनमें एक स्थानीय BNP नेता और उसकी स्वयंसेवी शाखा का एक पूर्व पदाधिकारी शामिल था।
आँकड़ों की गंभीर तस्वीर
रिपोर्ट में बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठन 'ऐन ओ सालिश केंद्र' (ASK) के रिकॉर्ड, अकादमिक शोध और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर पिछले दो दशकों से अधिक के राजनीतिक हिंसा के पैटर्न का विश्लेषण किया गया है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच दर्ज 467 घटनाओं में से 112 घटनाएँ BNP के अंदरूनी गुटों के बीच टकराव की थीं, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और 1,215 लोग घायल हुए।
ये आँकड़े BNP प्रमुख तारिक रहमान की निर्वाचित सरकार और उससे पहले के अंतरिम प्रशासन — दोनों कार्यकालों को कवर करते हैं। तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद संभाला था।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि यह हिंसा का चक्र कोई नई परिघटना नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2002 से 2006 के बीच BNP के पहले कार्यकाल में ASK ने पार्टी के भीतर 284 अंदरूनी झड़पें दर्ज की थीं, जिनमें 55 लोगों की मौत हुई। उसी दौरान अवामी लीग (AL) के भीतर संघर्षों में 37 लोग मारे गए थे।
जब 2009 में अवामी लीग सत्ता में लौटी, तो 2009 से 2012 के बीच ASK ने उस पार्टी के भीतर 799 अंदरूनी संघर्ष दर्ज किए, जिनमें 97 लोगों की मौत हुई। उसी अवधि में BNP में 229 झड़पें हुईं और 21 लोग मारे गए। यह ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन के अंत के बाद नई राजनीतिक संस्कृति की उम्मीद जताई जा रही थी।
स्थानीय चुनावों के दौरान हिंसा का स्तर और भी भयावह रहा है। ASK के अनुसार, 2016 के यूनियन परिषद चुनावों में 147 लोगों और 2021 के चुनावों में 113 लोगों की मौत चुनावी हिंसा में हुई।
हिंसा के मूल कारण
रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक संगठनों के भीतर वर्चस्व की लड़ाई के साथ-साथ ठेकों, ज़मीन, संपत्ति और रोज़गार से जुड़े विवाद हिंसा के प्रमुख कारण हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक नेटवर्क और राजनीतिक पहुँच पर नियंत्रण की होड़ ने हिंसा को एक संरचनागत समस्या बना दिया है।
आगे क्या
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन तो होते रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ख़त्म नहीं हुई। जब तक स्थानीय स्तर पर संसाधनों के वितरण और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को संस्थागत ढाँचे में नहीं बाँधा जाता, तब तक हिंसा का यह दुष्चक्र बांग्लादेश के सामने एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।