बांके बिहारी मंदिर भीड़ प्रबंधन: सुप्रीम कोर्ट ने UP सरकार को व्यापक विकास योजना बनाने के दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने वृंदावन स्थित ठाकुर श्री बांके बिहारी महाराज मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों पर गंभीर चिंता जताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर प्रबंधन समिति को एक व्यापक विकास रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। मंगलवार, 26 मई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ने के बजाय अब नए सिरे से सोचने की आवश्यकता है।
मुख्य घटनाक्रम
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मंदिर परिसर एवं उसके आसपास के क्षेत्र के लिए एक ठोस और समग्र विकास योजना तैयार करने पर जोर दिया। पीठ ने कहा कि मंदिर तक पहुँचने वाली संकरी गलियाँ और सीमित स्थान भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भगदड़ की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रबंधन समिति को संयुक्त रूप से निम्नलिखित उपाय सुनिश्चित करने को कहा:
मंदिर के आसपास की सड़कों को चौड़ा किया जाए और सार्वजनिक परिवहन की बेहतर व्यवस्था की जाए। श्रद्धालुओं के लिए आश्रय स्थल, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। इसके अलावा आपातकालीन निकास मार्ग तैयार किए जाएँ और वरिष्ठ नागरिकों तथा महिलाओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाएँ। मंदिर तक जाने वाले मार्गों पर अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों पर भी लगाम लगाने के निर्देश दिए गए।
मंदिर प्रबंधन समिति का गठन
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कोर्ट को बताया कि मंदिर प्रबंधन समिति में चार गोस्वामियों की नियुक्ति एक निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत की गई है। इसके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए और दोनों प्रमुख समूहों — शयन भोग और राज भोग — का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु साक्षात्कार आयोजित हुए।
कोर्ट ने समिति में शयन भोग समूह से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी तथा राज भोग समूह से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी की नियुक्ति को अभिलेख में दर्ज किया। ये सदस्य मंदिर की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं, पूजा-पद्धति और दैनिक संचालन को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देंगे।
धार्मिक परंपरा और आधुनिक प्रबंधन का संतुलन
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन के ज़रिये श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि समिति मंदिर के खुलने और बंद होने के समय को लेकर भी उचित सुझाव दे सकती है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह मामला वृंदावन जैसे धार्मिक पर्यटन स्थलों पर बढ़ते दबाव की व्यापक समस्या को रेखांकित करता है, जहाँ बुनियादी ढाँचा तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के अनुरूप नहीं बढ़ पाया है। अब उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर प्रबंधन समिति को मिलकर विस्तृत विकास रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।