13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बांके बिहारी मंदिर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने 21 घंटे दर्शन व्यवस्था पर विचार का निर्देश दिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बांके बिहारी मंदिर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने 21 घंटे दर्शन व्यवस्था पर विचार का निर्देश दिया

सारांश

मथुरा के बांके बिहारी मंदिर का विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है। 21 घंटे दर्शन की माँग, गोस्वामियों के प्रतिनिधित्व का सवाल और प्रबंधन कमेटी पर धार्मिक हस्तक्षेप के आरोप — यह मामला मंदिर प्रशासन और आस्था के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा बन गया है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई 2026 को बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन विवाद पर सुनवाई की।
न्यायालय ने प्रबंधन कमेटी को 21 घंटे दर्शन व्यवस्था पर विचार करने का निर्देश दिया।
वकील अश्विनी उपाध्याय ने तिरुपति बालाजी और वैष्णो देवी मॉडल अपनाने का सुझाव दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार को मंदिर क्षेत्र के लिए व्यापक अवसंरचना योजना तैयार करने का निर्देश।
अधिवक्ता तन्वी उपाध्याय ने शयन भोग और राजभोग गोस्वामी समूहों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को कमेटी में शामिल करने की माँग रखी।
यह मामला पिछले वर्ष अगस्त में मंदिर प्रबंधन अध्यादेश को चुनौती देने के साथ शुरू हुआ था।

मथुरा स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और धार्मिक व्यवस्थाओं को लेकर दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई 2026 को अहम सुनवाई की। न्यायालय ने मंदिर प्रबंधन कमेटी को निर्देश दिया कि पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं की बहाली, भीड़ प्रबंधन में सुधार और रोज़मर्रा की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए गोस्वामियों के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए।

मुख्य घटनाक्रम

वकील अश्विनी उपाध्याय ने न्यायालय को बताया कि मंदिर के सेवायतों, सेवादारों और गोस्वामियों का आरोप है कि प्रबंधन कमेटी धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप कर रही है। दूसरी ओर, कमेटी की ओर से न्यायालय में स्पष्ट किया गया कि वह किसी भी धार्मिक परंपरा में दखल नहीं दे रही और सभी गतिविधियाँ पूर्ववत चल रही हैं। कमेटी ने यह भी कहा कि दर्शन का समय पहले से बढ़ाया जा चुका है।

21 घंटे दर्शन की माँग

अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी कि जब बांके बिहारी मंदिर का निर्माण हुआ था, तब भारत की जनसंख्या लगभग 18 करोड़ थी — जिसमें वर्तमान पाकिस्तान और बांग्लादेश का क्षेत्र भी सम्मिलित था। आज देश की आबादी 145 करोड़ से अधिक है और करोड़ों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में मज़दूरों, किसानों और आर्थिक रूप से कमज़ोर श्रद्धालुओं को पर्याप्त दर्शन समय नहीं मिल पाता।

उन्होंने तिरुपति बालाजी मंदिर और वैष्णो देवी मंदिर का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि जहाँ प्रतिदिन लगभग 21 घंटे दर्शन की व्यवस्था रहती है, उसी मॉडल को बांके बिहारी मंदिर में भी लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मंदिर को 'उत्तर भारत का तिरुपति' बताया और कहा कि वर्तमान में भक्तों को दर्शन के लिए मात्र कुछ सेकंड ही मिल पाते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश

न्यायालय ने 21 घंटे दर्शन के सुझाव पर कहा कि प्रबंधन कमेटी इस पर विचार करे। साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया गया कि मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के लिए एक व्यापक योजना तैयार की जाए, जिसमें अस्पताल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा, सड़कों का चौड़ीकरण और बुज़ुर्गों के आवागमन की बेहतर व्यवस्था जैसे पहलू शामिल हों।

गोस्वामियों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा

अधिवक्ता तन्वी उपाध्याय ने बताया कि यह मामला पिछले वर्ष अगस्त में दायर किया गया था, जब मंदिर प्रबंधन से जुड़े अध्यादेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। उस समय न्यायालय ने अध्यादेश के साथ-साथ एक कमेटी के गठन का आदेश भी दिया था।

तन्वी उपाध्याय ने माँग रखी कि मंदिर के आंतरिक धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न हो। उन्होंने यह भी उठाया कि कमेटी के सदस्यों का चयन केवल कुछ आवेदनों के आधार पर किया गया, जबकि गोस्वामियों के दोनों प्रमुख समूहों — शयन भोग और राजभोग — के बीच विस्तृत चुनाव प्रक्रिया पहले ही संपन्न हो चुकी थी। उन्होंने आग्रह किया कि गोस्वामियों द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों को कमेटी में उचित स्थान दिया जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई के बाद कहा कि गोस्वामियों के प्रतिनिधियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए और मंदिर की आंतरिक धार्मिक परंपराओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अगली सुनवाई में सरकार और कमेटी दोनों से जवाब अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि धार्मिक स्वायत्तता बनाम राज्य-नियंत्रित प्रबंधन की उस बड़ी बहस का हिस्सा है जो देश के कई प्रमुख मंदिरों में उभर रही है। 21 घंटे दर्शन का प्रस्ताव आकर्षक है, लेकिन बिना पर्याप्त अवसंरचना — पार्किंग, चिकित्सा सुविधा, आवास — के इसे लागू करना भीड़ की समस्या को और गहरा कर सकता है। गोस्वामियों के निर्वाचित प्रतिनिधित्व की माँग न्यायसंगत है, किंतु यह भी देखना होगा कि नई कमेटी की संरचना पारदर्शी और जवाबदेह हो — अन्यथा प्रबंधन का विवाद अदालती दरवाज़े पर ही घूमता रहेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन विवाद क्या है?
मथुरा के बांके बिहारी मंदिर के सेवायतों और गोस्वामियों ने आरोप लगाया है कि प्रबंधन कमेटी धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप कर रही है। यह विवाद पिछले वर्ष अगस्त में मंदिर प्रबंधन से जुड़े अध्यादेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने के साथ सामने आया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 21 घंटे दर्शन व्यवस्था पर क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रबंधन कमेटी को निर्देश दिया कि वह 21 घंटे दर्शन के सुझाव पर गंभीरता से विचार करे। यह सुझाव तिरुपति बालाजी और वैष्णो देवी मंदिर के मॉडल पर आधारित है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 21 घंटे दर्शन की सुविधा उपलब्ध है।
गोस्वामियों की मुख्य माँगें क्या हैं?
गोस्वामियों की माँग है कि मंदिर की आंतरिक धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप न हो और शयन भोग व राजभोग गोस्वामी समूहों द्वारा चुनाव के माध्यम से चुने गए प्रतिनिधियों को प्रबंधन कमेटी में उचित स्थान दिया जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार को क्या निर्देश दिए गए?
सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि मंदिर और आसपास के क्षेत्र के लिए एक व्यापक योजना तैयार की जाए। इस योजना में अस्पताल, श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा, सड़कों का चौड़ीकरण और बुज़ुर्गों के आवागमन की बेहतर व्यवस्था शामिल होनी चाहिए।
यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में कब और कैसे पहुँचा?
यह मामला पिछले वर्ष अगस्त में दायर किया गया था, जब मंदिर प्रबंधन से संबंधित अध्यादेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। उस समय न्यायालय ने अध्यादेश के साथ एक प्रबंधन कमेटी के गठन का भी आदेश दिया था, जो अब खुद विवाद के केंद्र में है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले