बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन समिति के फैसलों को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय मंगलवार, 17 जून 2025 को मथुरा स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में मंदिर के कामकाज की देखरेख के लिए कोर्ट द्वारा गठित उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति के कुछ निर्णयों को चुनौती दी गई है, जिनके बारे में याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के विपरीत हैं।
किस पीठ के सामने होगी सुनवाई
सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कॉज़ लिस्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। यह मामला मंदिर प्रशासन और पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं के बीच संतुलन से जुड़े व्यापक विवाद का हिस्सा है।
याचिकाकर्ताओं की आपत्तियाँ
सेवकों की ओर से दायर याचिका में दो प्रमुख मुद्दे उठाए गए हैं — पहला, दर्शन के समय में किया गया बदलाव, और दूसरा, पारंपरिक 'देहरी पूजा' की प्रथा को बंद करना। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रबंधन समिति के ये निर्णय मंदिर की उन धार्मिक परंपराओं को कमज़ोर करते हैं, जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं।
26 मई की सुनवाई में क्या हुआ था
26 मई को हुई पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति का दायरा बढ़ाते हुए उसमें 'राज भोग' और 'शयन भोग' गोस्वामी समूहों से चार चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल किया था। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि मंदिर प्रशासन में पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं का उचित प्रतिनिधित्व हो। नए सदस्यों को निर्देश दिया गया था कि वे परंपराओं को बनाए रखने और रोज़मर्रा के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए मिलकर उपाय सुझाएँ, जिसमें मौसम के अनुसार मंदिर के समय संबंधी सुझाव भी शामिल हों।
वृंदावन क्षेत्र के विकास पर भी होगा विचार
आज की सुनवाई में मथुरा-वृंदावन क्षेत्र के व्यापक विकास से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। 26 मई के आदेश में कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रबंधन समिति को एक विस्तृत विकास योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। इस योजना में सड़कों को चौड़ा करना, व्यावसायिक गतिविधियों का नियमन, तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएँ, पेयजल, अस्पताल, विश्राम स्थल, परिवहन सेवाएँ तथा महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग भक्तों के लिए विशेष प्रबंध शामिल हैं।
समिति गठन की पृष्ठभूमि
अगस्त 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय प्रबंधन समिति का गठन किया था। समिति को भीड़ प्रबंधन, तीर्थयात्री सुविधाओं, सुरक्षा उपायों और मंदिर परिसर के समग्र विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसी आदेश में कोर्ट ने 'श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025' के उन प्रावधानों पर भी अंतरिम रोक लगा दी थी, जिनके तहत राज्य सरकार को मंदिर प्रबंधन के लिए अलग ट्रस्ट बनाने का अधिकार दिया गया था। यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय इसकी संवैधानिक वैधता पर निर्णय नहीं सुना देता। आज की सुनवाई यह तय करेगी कि परंपरा और प्रशासनिक आधुनिकीकरण के बीच इस संघर्ष में न्यायालय किस दिशा में आगे बढ़ता है।