25 अगस्त 2026
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बांके बिहारी मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट का आदेश — हर पाई सीधे मंदिर कोष में जाए

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बांके बिहारी मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट का आदेश — हर पाई सीधे मंदिर कोष में जाए

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के दान-प्रबंधन में सख्ती बरती — हर पाई सीधे कोष में, संपत्ति खरीद पर अदालत की पूर्व मंजूरी अनिवार्य। यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकार के 2025 अध्यादेश और न्यायिक निगरानी समिति के बाद मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता की दिशा में अगला बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2025 को आदेश दिया कि बांके बिहारी मंदिर का संपूर्ण दान केवल अधिकृत दानपात्रों या ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर कोष में जमा हो।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत , न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी.
मोहन की पीठ ने सेवायतों या किसी भी मध्यस्थ की भूमिका पर रोक लगाई।
मंदिर के धन से किसी भी संपत्ति खरीद के प्रस्ताव को लेन-देन से पहले अदालत की मंजूरी अनिवार्य।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के ज़रिए मंदिर प्रबंधन को वैधानिक ढाँचे में लाया था; इससे पहले 1939 की योजना लागू थी।
पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति पहले से श्रद्धालु-सुविधाओं और परिसर विकास की निगरानी कर रही है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2025 को वृंदावन के ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर में दान-संग्रह की व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश जारी किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर को प्राप्त होने वाली प्रत्येक राशि केवल अधिकृत दानपात्रों या ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर के कोष में जमा होनी चाहिए — किसी मध्यस्थ की भूमिका स्वीकार्य नहीं होगी। यह आदेश मंदिर के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े व्यापक विवाद की सुनवाई के दौरान दिया गया।

पीठ की संरचना और मुख्य निर्देश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे, ने कहा कि दान-प्रक्रिया में सेवायतों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रकार की बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा। अदालत ने मंदिर प्रबंधन समिति को पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और अनियमितताओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।

संपत्ति खरीद पर न्यायालय की निगरानी

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि मंदिर के धन से किसी भी संपत्ति की खरीद का प्रस्ताव लेन-देन पूरा होने से पहले अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। यह निर्देश मंदिर की वित्तीय संपदा के संभावित दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के ज़रिए मंदिर के प्रबंधन को वैधानिक ढाँचे में लाने का निर्णय किया था। इससे पहले मंदिर का संचालन 1939 की प्रबंधन योजना के तहत होता था, जिसमें दर्शन व्यवस्था, धार्मिक परंपराएँ और वित्तीय प्रबंधन शामिल थे। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई प्रमुख मंदिरों में प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप बढ़ा है।

उच्चस्तरीय समिति का गठन

अगस्त 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति को श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शौचालय, आश्रय, भीड़ प्रबंधन और मंदिर परिसर के विकास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ताज़ा आदेश उसी निगरानी-ढाँचे को वित्तीय अनुशासन की दिशा में और सुदृढ़ करता है।

आगे की राह

मामले की अगली सुनवाई में अदालत प्रबंधन समिति द्वारा लागू की गई पारदर्शिता व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश देश के अन्य बड़े धार्मिक स्थलों के वित्तीय प्रशासन के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है — क्योंकि सेवायत परंपराओं और वैधानिक नियंत्रण के बीच टकराव ऐतिहासिक रूप से लंबा खिंचता रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि देश के कई बड़े मंदिरों में ऑडिट और पारदर्शिता के मानक अभी भी असमान हैं। बिना मज़बूत डिजिटल ट्रेल और स्वतंत्र ऑडिट के, न्यायालय के आदेश कागज़ पर ही रह जाने का जोखिम है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर के दान को लेकर क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2025 को आदेश दिया कि मंदिर को प्राप्त होने वाली प्रत्येक राशि केवल अधिकृत दानपात्रों या ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर के कोष में जमा होनी चाहिए। किसी सेवायत या मध्यस्थ द्वारा दान-प्रक्रिया में बाधा डालने पर गंभीर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
बांके बिहारी मंदिर विवाद की जड़ क्या है?
यह विवाद मंदिर के धन के प्रबंधन और प्रशासनिक निगरानी से जुड़ा है। मंदिर पहले 1939 की प्रबंधन योजना के तहत संचालित होता था; उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में अध्यादेश लाकर इसे वैधानिक ढाँचे में लाने का प्रयास किया, जिसके बाद न्यायालय में चुनौती दी गई।
मंदिर की निगरानी के लिए कौन-सी समिति बनाई गई है?
अगस्त 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की। यह समिति पेयजल, शौचालय, भीड़ प्रबंधन और मंदिर परिसर के विकास कार्यों की निगरानी करती है।
क्या मंदिर की संपत्ति खरीद पर कोई प्रतिबंध लगाया गया है?
हाँ, सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि मंदिर के धन से किसी भी संपत्ति की खरीद का प्रस्ताव लेन-देन पूरा होने से पहले अदालत के सामने रखा जाए। यह कदम मंदिर की वित्तीय संपदा के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।
उत्तर प्रदेश बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश 2025 क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाया गया अध्यादेश है, जिसका उद्देश्य बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को एक वैधानिक ट्रस्ट के अंतर्गत लाना है। इससे पहले मंदिर का संचालन 1939 की प्रबंधन योजना के तहत होता था, जिसमें दर्शन, धार्मिक परंपराएँ और वित्तीय व्यवस्था शामिल थीं।
राष्ट्र प्रेस
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