3 अगस्त 2026
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लोकसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस और ISI बिल 2026 पेश, 125 साल पुराने कानून की जगह लेंगे नए प्रावधान

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लोकसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस और ISI बिल 2026 पेश, 125 साल पुराने कानून की जगह लेंगे नए प्रावधान

सारांश

केंद्र सरकार ने एक ही दिन में दो औपनिवेशिक कानूनों को बदलने की पहल की — 125 साल पुराने बैंकिंग साक्ष्य कानून को डिजिटल युग के अनुरूप ढालने और ISI को 'बॉडी कॉर्पोरेट' बनाने के लिए। लेकिन सदन में नीट और राम मंदिर के मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे ने प्रश्नकाल ही नहीं होने दिया।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 अगस्त 2026 को लोकसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पेश किया।
राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 सदन में रखा।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 1891 के 125 साल पुराने कानून की जगह लेगा और बैंकिंग साक्ष्य को डिजिटल युग के अनुरूप बनाएगा।
ISI बिल संस्थान को 'बॉडी कॉर्पोरेट' बनाएगा; राष्ट्रपति 'विजिटर' होंगे और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स नीति-निर्धारण करेगा।
नीट पेपर लीक और राम मंदिर दान विवाद पर विपक्ष के हंगामे से प्रश्नकाल नहीं हो सका।

केंद्र सरकार ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को लोकसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए — 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026' और 'इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026'। ये दोनों विधेयक औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों की जगह लेंगे और बैंकिंग साक्ष्य प्रणाली तथा सांख्यिकी संस्थान के कामकाज को आधुनिक ज़रूरतों के अनुरूप ढालेंगे।

किसने पेश किए विधेयक

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 सदन के पटल पर रखा। वहीं, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 प्रस्तुत किया। दोनों विधेयकों का उद्देश्य औपनिवेशिक युग के कानूनों को निरस्त कर उनकी जगह समकालीन ढाँचा स्थापित करना है।

बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल: क्या बदलेगा

प्रस्तावित बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 वर्ष 1891 के बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट की जगह लेगा, जो 125 से अधिक वर्षों से अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड पेश करने के नियम तय करता आया है। नए विधेयक का मकसद बैंकिंग साक्ष्य से जुड़े कानून को डिजिटल बैंकिंग के मौजूदा तरीकों के अनुरूप बनाना है।

विधेयक में बिना रोक-टोक बैंकिंग रिकॉर्ड तक पहुँच के बजाय बेहतर और सटीक न्यायिक निगरानी पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही, यह बैंकों को गैर-ज़रूरी कानूनी कार्यवाहियों से सुरक्षित रखते हुए साक्ष्य तक पहुँच सुनिश्चित करने का प्रयास करता है। गौरतलब है कि डिजिटल लेनदेन के विस्तार के साथ पुराना कानून न्यायिक प्रक्रिया में बाधक बन रहा था।

ISI बिल: संस्थान को मिलेगा नया ढाँचा

इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 का प्रमुख उद्देश्य संस्थान को 'बॉडी कॉर्पोरेट' के रूप में पुनर्गठित करना है, ताकि इसके कामकाज में दक्षता आए, शिक्षा और शोध में उत्कृष्टता को बढ़ावा मिले और सांख्यिकी विज्ञान की उभरती ज़रूरतों को पूरा किया जा सके।

विधेयक के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति संस्थान के 'विजिटर' होंगे। एक 'बोर्ड ऑफ गवर्नर्स' के गठन का प्रावधान है, जो संस्थान की मुख्य नीति-निर्धारक संस्था होगी। इस बोर्ड की अध्यक्षता एक चेयरपर्सन करेंगे, जो अकादमिक्स, उद्योग, शिक्षा, सार्वजनिक नीति या सांख्यिकी विज्ञान के क्षेत्र से किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।

सदन में हंगामा, प्रश्नकाल नहीं हो सका

इन विधेयकों की प्रस्तुति के बीच लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित रही। नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर विपक्ष के शोर-शराबे के चलते प्रश्नकाल नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

आगे क्या होगा

दोनों विधेयकों पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी बाकी है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल के पारित होने से डिजिटल बैंकिंग साक्ष्य से जुड़े मुकदमों में स्पष्टता आएगी, जबकि ISI बिल से संस्थान की स्वायत्तता और शोध क्षमता को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

1891 को बदलने की ज़रूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी — डिजिटल बैंकिंग के दौर में 125 साल पुराना कानून अदालतों में व्यावहारिक अड़चन बन चुका था। असली सवाल यह है कि नया विधेयक न्यायिक निगरानी और बैंकों की सुरक्षा के बीच संतुलन कितनी बारीकी से बनाता है, क्योंकि अतीत में ऐसे सुधारों में कार्यान्वयन की खामियाँ रही हैं। ISI के पुनर्गठन का प्रस्ताव स्वागतयोग्य है, लेकिन 'बॉडी कॉर्पोरेट' ढाँचे में चेयरपर्सन की नियुक्ति-प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर संसद में गहरी बहस ज़रूरी है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 क्या है?
यह विधेयक 1891 के बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट की जगह लेगा, जो 125 से अधिक वर्षों से अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड पेश करने के नियम तय करता था। नया बिल बैंकिंग साक्ष्य को डिजिटल बैंकिंग के तरीकों के अनुरूप बनाने और न्यायिक निगरानी को बेहतर करने पर केंद्रित है।
इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 से क्या बदलेगा?
इस बिल के तहत ISI को 'बॉडी कॉर्पोरेट' के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा। भारत के राष्ट्रपति संस्थान के 'विजिटर' होंगे और एक 'बोर्ड ऑफ गवर्नर्स' मुख्य नीति-निर्धारक संस्था के रूप में काम करेगा, जिसकी अध्यक्षता किसी प्रतिष्ठित अकादमिक या उद्योग विशेषज्ञ द्वारा की जाएगी।
ये दोनों बिल लोकसभा में किसने पेश किए?
बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया, जबकि इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026 को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने प्रस्तुत किया।
3 अगस्त को लोकसभा में प्रश्नकाल क्यों नहीं हुआ?
नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और प्रश्नकाल नहीं हो सका।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 क्यों बदला जा रहा है?
125 साल पुराना यह कानून डिजिटल बैंकिंग के मौजूदा दौर में अदालती प्रक्रियाओं में व्यावहारिक बाधा बन चुका था। नया विधेयक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने और न्यायिक निगरानी को अधिक सटीक बनाने के लिए लाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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