10 अगस्त 2026
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राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पास, 135 साल पुराना ब्रिटिशकालीन कानून होगा समाप्त

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राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पास, 135 साल पुराना ब्रिटिशकालीन कानून होगा समाप्त

सारांश

135 साल पुराने ब्रिटिशकालीन 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891' की विदाई तय हो गई — राज्यसभा ने 10 अगस्त को नया बिल ध्वनि मत से पास किया। डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने वाला यह बदलाव भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में अहम मोड़ साबित हो सकता है।

मुख्य बातें

राज्यसभा ने 10 अगस्त 2026 को बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल ध्वनि मत से पारित किया।
यह बिल 135 साल पुराने 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891' की जगह लेगा, जो ब्रिटिश शासनकाल में बना था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बिल डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता देगा और 'पूरी प्राइवेसी व सुरक्षा' सुनिश्चित करेगा।
मतदान के समय विपक्षी सदस्य नारेबाज़ी करते हुए सदन से वॉकआउट कर गए।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में 'चंदा चोर...' कहा, लेकिन शोर में उनकी बात दब गई।
कई दलों के सांसदों ने बिल का स्वागत करते हुए डेटा प्राइवेसी प्रावधानों पर ज़ोर दिया।

राज्यसभा ने 10 अगस्त 2026 को बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिससे ब्रिटिश शासनकाल में बना 135 साल पुराना 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891' इतिहास बन जाएगा। यह नया विधेयक वित्तीय साक्ष्य से जुड़े कानूनी ढाँचे को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग की ज़रूरतों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। हालाँकि, मतदान के समय विपक्षी सदस्य नारेबाज़ी करते हुए सदन से बाहर चले गए।

नए कानून की ज़रूरत क्यों पड़ी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में बिल की आवश्यकता समझाते हुए कहा कि 1891 का मूल कानून उस दौर में बनाया गया था जब बैंकिंग रिकॉर्ड केवल भौतिक (फिजिकल) रूप में रखे जाते थे। उस समय इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य कानूनी कार्यवाही में बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति को साक्ष्य के रूप में मान्यता देना था, ताकि बैंक अधिकारियों को अदालत में मूल लेजर प्रस्तुत करने की बाध्यता से मुक्ति मिल सके।

सीतारमण ने यह भी कहा कि यह बिल 'पूरी प्राइवेसी और सुरक्षा' सुनिश्चित करने के लिए पेश किया गया है। डिजिटल बैंकिंग के तेज़ विस्तार के साथ अब रिकॉर्ड आधुनिक तकनीकी माध्यमों से तैयार और संरक्षित किए जाते हैं, जिनके लिए पुराने कानून में कोई प्रावधान नहीं था।

सदन में हंगामा और विपक्ष का वॉकआउट

जैसे ही बिल पेश किया गया, विपक्षी सदस्य नारेबाज़ी पर उतर आए। उप-सभापति ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को 1952 के नियमों के तहत बोलने की अनुमति देने की पेशकश की, बशर्ते वे अपनी बात बिल तक सीमित रखें। इस पर तीखी बहस छिड़ गई। खड़गे ने ऊँची आवाज़ में 'चंदा चोर...' कहा, लेकिन सदन के शोर-शराबे में उनकी बात पूरी तरह सुनी नहीं जा सकी। इसके बाद उप-सभापति ने सदस्यों से विषय पर केंद्रित रहने का अनुरोध किया।

किन सांसदों ने रखे विचार

बिल पर बोलने वाले सांसदों में मोहम्मद नदीमुल हक (अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, पश्चिम बंगाल), अरुण सिंह (भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश), मानस रंजन मंगराज (बीजू जनता दल, ओडिशा), एस. निरंजन रेड्डी (वाईएसआरसीपी, आंध्र प्रदेश), राजेंद्र हीरालाल जैन (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, महाराष्ट्र), भाष्यम रामा कृष्णा (तेलुगु देशम पार्टी, आंध्र प्रदेश), रवि चंद्र वद्दिराजू (वीआरएस, तेलंगाना), एल.के. सुधीश (डीएमडीके, तमिलनाडु), डॉ. एम. धनपाल (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम, तमिलनाडु) और डॉ. ज्योति नागनाथ वाघमारे (शिव सेना, महाराष्ट्र) शामिल रहे।

इन सांसदों ने लंबे समय से लंबित इस तकनीकी सुधार का स्वागत किया और नए कानून में डेटा प्राइवेसी तथा सुरक्षा प्रावधानों पर भी अपने विचार रखे।

आम जनता और बैंकिंग क्षेत्र पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल लेनदेन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुके हैं और अदालतों में वित्तीय साक्ष्य से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं। नया कानून डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को कानूनी रूप से मान्य साक्ष्य के रूप में स्थापित करेगा, जिससे बैंकों और उनके ग्राहकों दोनों को न्यायिक प्रक्रिया में राहत मिलेगी। गौरतलब है कि यह विधेयक अब लोकसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति से कानून का रूप लेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनका क्रियान्वयन कैसे होगा — खासकर तब जब भारत में साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल वित्तीय अपराध तेज़ी से बढ़ रहे हैं। विपक्ष का वॉकआउट इस बहस को संसद के बाहर ले जाता है, जहाँ जवाबदेही की माँग और भी तीखी हो सकती है। कानून बनाना पहला कदम है; न्यायपालिका और बैंकिंग नियामकों को इसे ज़मीन पर उतारने में अभी लंबा रास्ता तय करना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026 क्या है?
यह वह विधेयक है जो 135 साल पुराने 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891' की जगह लेगा और डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में मान्यता देगा। राज्यसभा ने इसे 10 अगस्त 2026 को ध्वनि मत से पारित किया।
1891 के पुराने कानून में क्या कमी थी?
1891 का कानून उस दौर के लिए बना था जब बैंक रिकॉर्ड केवल भौतिक (कागज़ी) रूप में रखे जाते थे। डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता देने का कोई स्पष्ट प्रावधान उसमें नहीं था।
विपक्ष ने बिल का विरोध क्यों किया?
विपक्षी सदस्य बिल पेश होते समय नारेबाज़ी करते रहे और बाद में वॉकआउट कर गए। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'चंदा चोर...' कहा, हालाँकि शोर-शराबे में उनकी पूरी बात सुनी नहीं जा सकी; विपक्ष के विरोध का विस्तृत कारण सदन में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हो पाया।
इस कानून से आम बैंक ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
नया कानून डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को अदालतों में वैध साक्ष्य के रूप में स्वीकार करेगा, जिससे वित्तीय विवादों में न्यायिक प्रक्रिया तेज़ और सरल होगी। साथ ही, डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा के प्रावधान ग्राहकों की बैंकिंग जानकारी की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
बिल अब कानून कब बनेगा?
राज्यसभा से पास होने के बाद यह बिल लोकसभा की मंजूरी के लिए जाएगा और दोनों सदनों की स्वीकृति के बाद राष्ट्रपति की अनुमति से यह कानून का रूप लेगा।
राष्ट्र प्रेस
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