राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल पास, 135 साल पुराना ब्रिटिशकालीन कानून होगा समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा ने 10 अगस्त 2026 को बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिससे ब्रिटिश शासनकाल में बना 135 साल पुराना 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891' इतिहास बन जाएगा। यह नया विधेयक वित्तीय साक्ष्य से जुड़े कानूनी ढाँचे को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग की ज़रूरतों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। हालाँकि, मतदान के समय विपक्षी सदस्य नारेबाज़ी करते हुए सदन से बाहर चले गए।
नए कानून की ज़रूरत क्यों पड़ी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में बिल की आवश्यकता समझाते हुए कहा कि 1891 का मूल कानून उस दौर में बनाया गया था जब बैंकिंग रिकॉर्ड केवल भौतिक (फिजिकल) रूप में रखे जाते थे। उस समय इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य कानूनी कार्यवाही में बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति को साक्ष्य के रूप में मान्यता देना था, ताकि बैंक अधिकारियों को अदालत में मूल लेजर प्रस्तुत करने की बाध्यता से मुक्ति मिल सके।
सीतारमण ने यह भी कहा कि यह बिल 'पूरी प्राइवेसी और सुरक्षा' सुनिश्चित करने के लिए पेश किया गया है। डिजिटल बैंकिंग के तेज़ विस्तार के साथ अब रिकॉर्ड आधुनिक तकनीकी माध्यमों से तैयार और संरक्षित किए जाते हैं, जिनके लिए पुराने कानून में कोई प्रावधान नहीं था।
सदन में हंगामा और विपक्ष का वॉकआउट
जैसे ही बिल पेश किया गया, विपक्षी सदस्य नारेबाज़ी पर उतर आए। उप-सभापति ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को 1952 के नियमों के तहत बोलने की अनुमति देने की पेशकश की, बशर्ते वे अपनी बात बिल तक सीमित रखें। इस पर तीखी बहस छिड़ गई। खड़गे ने ऊँची आवाज़ में 'चंदा चोर...' कहा, लेकिन सदन के शोर-शराबे में उनकी बात पूरी तरह सुनी नहीं जा सकी। इसके बाद उप-सभापति ने सदस्यों से विषय पर केंद्रित रहने का अनुरोध किया।
किन सांसदों ने रखे विचार
बिल पर बोलने वाले सांसदों में मोहम्मद नदीमुल हक (अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, पश्चिम बंगाल), अरुण सिंह (भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश), मानस रंजन मंगराज (बीजू जनता दल, ओडिशा), एस. निरंजन रेड्डी (वाईएसआरसीपी, आंध्र प्रदेश), राजेंद्र हीरालाल जैन (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, महाराष्ट्र), भाष्यम रामा कृष्णा (तेलुगु देशम पार्टी, आंध्र प्रदेश), रवि चंद्र वद्दिराजू (वीआरएस, तेलंगाना), एल.के. सुधीश (डीएमडीके, तमिलनाडु), डॉ. एम. धनपाल (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम, तमिलनाडु) और डॉ. ज्योति नागनाथ वाघमारे (शिव सेना, महाराष्ट्र) शामिल रहे।
इन सांसदों ने लंबे समय से लंबित इस तकनीकी सुधार का स्वागत किया और नए कानून में डेटा प्राइवेसी तथा सुरक्षा प्रावधानों पर भी अपने विचार रखे।
आम जनता और बैंकिंग क्षेत्र पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल लेनदेन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुके हैं और अदालतों में वित्तीय साक्ष्य से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं। नया कानून डिजिटल बैंक रिकॉर्ड को कानूनी रूप से मान्य साक्ष्य के रूप में स्थापित करेगा, जिससे बैंकों और उनके ग्राहकों दोनों को न्यायिक प्रक्रिया में राहत मिलेगी। गौरतलब है कि यह विधेयक अब लोकसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति से कानून का रूप लेगा।