छत्तीसगढ़: बस्तर में अंतिम प्रमुख नक्सली पापा राव ने आत्मसमर्पण किया

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छत्तीसगढ़: बस्तर में अंतिम प्रमुख नक्सली पापा राव ने आत्मसमर्पण किया

सारांश

बस्तर में नक्सल-मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम; पापा राव उर्फ मंगू ने आत्मसमर्पण कर दिया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की कहानी और क्या है इसका महत्व।

Key Takeaways

  • पापा राव का आत्मसमर्पण बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं।
  • राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस घटना पर मिश्रित रही हैं।

रायपुर, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बस्तर को नक्सल-मुक्त घोषित करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा से सिर्फ एक सप्ताह पहले, एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है; इस क्षेत्र में सक्रिय अंतिम प्रमुख नक्सल कैडर, पापा राव उर्फ ​​मंगू, ने अपने हथियारबंद समूह के साथ आत्मसमर्पण किया है।

सुकमा जिले के निवासी और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसीएम) के वरिष्ठ सदस्य, ५६ वर्षीय पापा राव, एक AK-47 और अन्य हथियार लेकर बीजापुर ज़िले के कुतरू पुलिस स्टेशन पहुंचे। उनके साथ १७ साथी भी थे, जिनमें १० पुरुष और ८ महिलाएं शामिल थीं, जिन्हें बाद में बस से जगदलपुर ले जाया गया।

सुरक्षा बलों ने इस ग्रुप से आठ AK-47 राइफलें, एक एसएलआर और एक आईएनएसएएस राइफल बरामद कीं। उन्हें पकड़ने के लिए २५ लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

पापा राव, जो पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के प्रमुख थे और दक्षिण सब-जोनल ब्यूरो के सदस्य भी थे, उन्हें पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन नंबर १ के पूर्व कमांडर माडवी हिडमा के मारे जाने के बाद बस्तर का सबसे ज्यादा वांटेड नक्सली माना जाता था। वह बस्तर के जंगलों, नदियों और इलाके से अच्छी तरह वाकिफ थे, क्योंकि वह कई बार पुलिस ऑपरेशन्स से बच निकले थे।

गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कवर्धा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इस घटना की पुष्टि की। उन्होंने कहा, "पापा राव के सरेंडर के साथ ही, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में अब कोई भी सक्रिय सदस्य नहीं बचा है।"

उन्होंने यह भी बताया कि सरेंडर से ठीक पहले उन्होंने पापा राव से मोबाइल फोन पर बात की थी। मंत्री ने कहा कि राज्य के बाहर अब सिर्फ दो सबसे बड़े नक्सली नेता, मिशिर बेसरा और गणपति, ही सक्रिय हैं, जो संगठन के बचे-खुचे हिस्से को चला रहे हैं।

अधिकारियों ने इस घटना को नक्सली संगठन की पश्चिम बस्तर डिवीजनल कमेटी का लगभग पूरी तरह से खात्मा बताया। बटालियन नंबर १ के कमांडर देवा के सरेंडर और पिछले साल मुठभेड़ों में १७ बड़े नेताओं, जिनमें माडवी हिडमा, महासचिव बसवराजू और गणेश उइके शामिल थे, के मारे जाने के बाद, पापा राव ही आखिरी फ्रंटलाइन लड़ाके बचे थे।

हाल के महीनों में भूपति, रूपेश और रामधर सहित सैकड़ों अन्य कैडरों ने भी हथियार डाल दिए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने पापा राव के सरेंडर को बस्तर से सशस्त्र नक्सलवाद का पूरी तरह से खात्मा बताया है।

हालांकि, राज्य कांग्रेस ने इस पर चिंता जताई है। पार्टी अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की और चेतावनी दी कि समय सीमा समाप्त होने के बाद आदिवासियों को और अधिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है, और बस्तर के प्राकृतिक संसाधन निजी कंपनियों को सौंपे जा सकते हैं।

उन्होंने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि किसी भी निर्दोष आदिवासी व्यक्ति को झूठा नक्सली करार देकर गिरफ्तार न किया जाए।

Point of View

इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि नक्सल मुद्दा अभी भी संवेदनशील है और सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है।
NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

पापा राव कौन हैं?
पापा राव उर्फ मंगू, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य थे और बस्तर के सबसे वांटेड नक्सलियों में शामिल थे।
आत्मसमर्पण का क्या महत्व है?
इस आत्मसमर्पण से नक्सली संगठन का प्रभाव कम होगा और बस्तर को नक्सल-मुक्त घोषित करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने आत्मसमर्पण के बाद नक्सलवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का संकल्प लिया है।
क्या यह नक्सलवाद का अंत है?
यह एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन नक्सलवाद की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं क्या हैं?
राज्य कांग्रेस ने चिंता जताई है कि आदिवासियों पर उत्पीड़न बढ़ सकता है।
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