बीएयू वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह: जेनजी से संवाद के बिना कृषि रोजगार और उद्यमिता की राह अधूरी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (बीएयू) के वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह ने 5 अगस्त 2026 को भागलपुर में स्पष्ट किया कि जेनरेशन-जेड (जेनजी) के साथ निरंतर और सार्थक संवाद ही बिहार के युवाओं को कृषि क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता की दिशा में ले जाने की कुंजी है। उन्होंने कहा कि राज्य की आधी आबादी युवा है और इस जनसांख्यिकीय ताकत को सही मार्गदर्शन व सरकारी सहयोग के बिना नहीं भुनाया जा सकता।
संवाद क्यों जरूरी है
डॉ. सिंह ने कहा, 'बच्चों से संवाद बहुत जरूरी है। बच्चों से संवाद से हम उनकी सोच को समझेंगे और उसी के साथ आगे बढ़ेंगे। इसमें सभी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सिर्फ शैक्षणिक संस्थान ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावक को भी संवाद करना चाहिए। जेनजी को भी सोचना चाहिए।' उनके अनुसार यह संवाद एकतरफा नहीं, बल्कि द्विपक्षीय होना चाहिए — जहाँ युवाओं से सुझाव भी लिए जाएं और उन्हें कार्ययोजना का हिस्सा बनाया जाए।
बिहार की युवा आबादी: एक अवसर
वाइस-चांसलर ने बताया कि बिहार की 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग की युवा आबादी कुल जनसंख्या का करीब 45 से 50 प्रतिशत है। उन्होंने इस वर्ग को 'धरोहर' की संज्ञा देते हुए कहा कि हर जिले में इस आयु के युवाओं की संख्या, उनकी शैक्षणिक योग्यता और करियर आकांक्षाओं का डेटाबेस तैयार करना अनिवार्य है। इसी डेटाबेस के आधार पर जिलेवार कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।
कृषि में उभरते अवसर
डॉ. सिंह ने रेखांकित किया कि कृषि अब केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रही। फूड प्रोसेसिंग, एग्री-टेक, न्यूट्रिशन और क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में बिहार के युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, 'खाना सभी को प्रतिदिन चाहिए। पहले हम पेट भरने की बात कर रहे थे, अब पोषण की बात कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर हो गए और अब पोषण सुरक्षा पर काम करना है।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में एग्री-स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है।
सरकार से अपेक्षाएं
वाइस-चांसलर ने सरकार से ठोस नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की। उनके अनुसार युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने के लिए टैक्स-फ्री लोन की सुविधा और जिलेवार बिजनेस मॉड्यूल तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'सरकार को युवाओं के लिए जरूरी योजना लानी चाहिए। हम हर जिले का प्लान बनाकर आगे बढ़ सकते हैं।' गौरतलब है कि बिहार में कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर कई योजनाएं संचालित हैं, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
आगे की राह
डॉ. सिंह का मानना है कि अगर सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और संस्थागत सहयोग एकसाथ मिले तो बिहार के युवा कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं। बीएयू इस दिशा में शैक्षणिक और शोध स्तर पर अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।