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बीएयू वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह: जेनजी से संवाद के बिना कृषि रोजगार और उद्यमिता की राह अधूरी

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बीएयू वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह: जेनजी से संवाद के बिना कृषि रोजगार और उद्यमिता की राह अधूरी

सारांश

बीएयू वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह का संदेश साफ है — बिहार की 45-50% युवा आबादी एक अवसर है, बोझ नहीं। लेकिन इसे भुनाने के लिए जेनजी से संवाद, जिलेवार डेटाबेस और सरकारी टैक्स-फ्री लोन जैसे ठोस कदम जरूरी हैं। कृषि अब खेत से आगे निकल चुकी है।

मुख्य बातें

बीएयू वाइस-चांसलर डॉ.
सिंह ने 5 अगस्त 2026 को भागलपुर में जेनजी से निरंतर संवाद की जरूरत पर जोर दिया।
बिहार में 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग के युवा कुल जनसंख्या का 45 से 50 प्रतिशत हैं।
हर जिले में युवाओं की योग्यता और आकांक्षाओं का डेटाबेस तैयार करने की सिफारिश की गई।
फूड प्रोसेसिंग, एग्री-टेक, न्यूट्रिशन और क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग में युवाओं के लिए बड़े अवसर बताए गए।
सरकार से टैक्स-फ्री लोन और जिलेवार बिजनेस मॉड्यूल बनाने की मांग की गई।

बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (बीएयू) के वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह ने 5 अगस्त 2026 को भागलपुर में स्पष्ट किया कि जेनरेशन-जेड (जेनजी) के साथ निरंतर और सार्थक संवाद ही बिहार के युवाओं को कृषि क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता की दिशा में ले जाने की कुंजी है। उन्होंने कहा कि राज्य की आधी आबादी युवा है और इस जनसांख्यिकीय ताकत को सही मार्गदर्शन व सरकारी सहयोग के बिना नहीं भुनाया जा सकता।

संवाद क्यों जरूरी है

डॉ. सिंह ने कहा, 'बच्चों से संवाद बहुत जरूरी है। बच्चों से संवाद से हम उनकी सोच को समझेंगे और उसी के साथ आगे बढ़ेंगे। इसमें सभी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सिर्फ शैक्षणिक संस्थान ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावक को भी संवाद करना चाहिए। जेनजी को भी सोचना चाहिए।' उनके अनुसार यह संवाद एकतरफा नहीं, बल्कि द्विपक्षीय होना चाहिए — जहाँ युवाओं से सुझाव भी लिए जाएं और उन्हें कार्ययोजना का हिस्सा बनाया जाए।

बिहार की युवा आबादी: एक अवसर

वाइस-चांसलर ने बताया कि बिहार की 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग की युवा आबादी कुल जनसंख्या का करीब 45 से 50 प्रतिशत है। उन्होंने इस वर्ग को 'धरोहर' की संज्ञा देते हुए कहा कि हर जिले में इस आयु के युवाओं की संख्या, उनकी शैक्षणिक योग्यता और करियर आकांक्षाओं का डेटाबेस तैयार करना अनिवार्य है। इसी डेटाबेस के आधार पर जिलेवार कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।

कृषि में उभरते अवसर

डॉ. सिंह ने रेखांकित किया कि कृषि अब केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रही। फूड प्रोसेसिंग, एग्री-टेक, न्यूट्रिशन और क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में बिहार के युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, 'खाना सभी को प्रतिदिन चाहिए। पहले हम पेट भरने की बात कर रहे थे, अब पोषण की बात कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर हो गए और अब पोषण सुरक्षा पर काम करना है।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में एग्री-स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है।

सरकार से अपेक्षाएं

वाइस-चांसलर ने सरकार से ठोस नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की। उनके अनुसार युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने के लिए टैक्स-फ्री लोन की सुविधा और जिलेवार बिजनेस मॉड्यूल तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'सरकार को युवाओं के लिए जरूरी योजना लानी चाहिए। हम हर जिले का प्लान बनाकर आगे बढ़ सकते हैं।' गौरतलब है कि बिहार में कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर कई योजनाएं संचालित हैं, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।

आगे की राह

डॉ. सिंह का मानना है कि अगर सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और संस्थागत सहयोग एकसाथ मिले तो बिहार के युवा कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं। बीएयू इस दिशा में शैक्षणिक और शोध स्तर पर अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'संवाद' और 'डेटाबेस' की माँग तब तक अधूरी रहेगी जब तक इसके लिए संस्थागत ढाँचा और बजट आवंटन न हो। बिहार में कृषि-आधारित स्टार्टअप के लिए नीतियाँ पहले से मौजूद हैं, फिर भी युवा पलायन जारी है — यह दर्शाता है कि समस्या जागरूकता की नहीं, क्रियान्वयन की है। जिलेवार बिजनेस मॉड्यूल का विचार ठोस है, लेकिन इसे विश्वविद्यालय स्तर पर नहीं, राज्य सरकार के नीति ढाँचे में शामिल करना होगा। असली सवाल यह है कि बीएयू जैसे संस्थान इस एजेंडे को नीति-निर्माताओं तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुँचा पाते हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएयू वाइस-चांसलर डॉ. डी.आर. सिंह ने जेनजी के बारे में क्या कहा?
डॉ. सिंह ने कहा कि जेनरेशन-जेड के साथ निरंतर और द्विपक्षीय संवाद जरूरी है — जिसमें शैक्षणिक संस्थान, अभिभावक और युवा स्वयं सभी की भागीदारी हो। उनके अनुसार इसी संवाद से युवाओं को कृषि और उद्यमिता में सही दिशा मिल सकती है।
बिहार में कृषि क्षेत्र में युवाओं के लिए क्या अवसर हैं?
डॉ. सिंह के अनुसार फूड प्रोसेसिंग, एग्री-टेक, न्यूट्रिशन और क्लाइमेट स्मार्ट फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में बिहार के युवाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। कृषि अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़ चुकी है और पोषण सुरक्षा एक बड़ा उभरता हुआ क्षेत्र है।
बिहार के युवाओं के लिए जिलेवार डेटाबेस की क्यों जरूरत है?
डॉ. सिंह ने कहा कि हर जिले में 18-21 वर्ष के युवाओं की संख्या, उनकी शैक्षणिक योग्यता और करियर आकांक्षाओं का डेटाबेस बनाने से जिलेवार कार्ययोजना तैयार की जा सकती है। इससे संसाधनों का सही वितरण और लक्षित मार्गदर्शन संभव होगा।
बीएयू वाइस-चांसलर ने सरकार से क्या मांगें रखीं?
उन्होंने सरकार से युवा उद्यमियों के लिए टैक्स-फ्री लोन की सुविधा और जिलेवार बिजनेस मॉड्यूल तैयार करने की अपील की। उनका कहना था कि सरकारी समर्थन के बिना युवाओं को रोजगार देने वाला बनाना संभव नहीं है।
बिहार की कितनी आबादी युवा है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
डॉ. सिंह के अनुसार बिहार की 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग की आबादी कुल जनसंख्या का करीब 45 से 50 प्रतिशत है। यह जनसांख्यिकीय लाभांश राज्य के लिए बड़ा अवसर है, बशर्ते इसे सही मार्गदर्शन और नीतिगत समर्थन मिले।
राष्ट्र प्रेस
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