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भारत डायनेमिक्स को ₹810.79 करोड़ का अनुबंध, IAF के लिए 160 SAT-SAAW ग्लाइड बम खरीदे जाएंगे

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भारत डायनेमिक्स को ₹810.79 करोड़ का अनुबंध, IAF के लिए 160 SAT-SAAW ग्लाइड बम खरीदे जाएंगे

सारांश

रक्षा मंत्रालय ने BDL के साथ ₹810.79 करोड़ का अनुबंध किया — IAF के लिए 160 SAT-SAAW स्वदेशी ग्लाइड बम जो सुखोई, जगुआर और हॉक से दागे जा सकते हैं। DRDO-निर्मित यह हथियार दुश्मन के एयरफील्ड को सुरक्षित दूरी से तबाह करने में सक्षम है और 60% स्वदेशी सामग्री से बना है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ ₹810.79 करोड़ का अनुबंध किया।
IAF के लिए 160 SAT-SAAW (सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन) और संबंधित उपकरण खरीदे जाएंगे।
यह प्रणाली DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित है और इसमें लगभग 60% स्वदेशी सामग्री है।
हथियार जगुआर , हॉक और सुखोई-30 MKI से दागे जा सकते हैं; दुश्मन की वायु रक्षा सीमा के बाहर से हमला संभव।
आपूर्ति 2027-28 और 2028-29 के दौरान होगी।
अनुबंध Buy Indian-IDDM श्रेणी के तहत; रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर।

रक्षा मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ ₹810.79 करोड़ का अनुबंध किया, जिसके तहत भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) और संबंधित उपकरणों की खरीद की जाएगी। यह समझौता वायुसेना की लंबी दूरी से सटीक हमला करने की परिचालन क्षमता को नई ऊँचाई देने के उद्देश्य से किया गया है।

अनुबंध का विवरण और श्रेणी

रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह खरीद 'बाय इंडियन — इंडिजिनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड' (Buy Indian-IDDM) श्रेणी के अंतर्गत की जा रही है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा नीति का प्रमुख स्तंभ है। अनुबंध पर हस्ताक्षर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हुए।

गौरतलब है कि यह प्रणाली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित की गई है। मंत्रालय के अनुसार इसमें लगभग 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज और ट्विन स्टोर कैरियर जैसी उप-प्रणालियों का भी स्वदेशीकरण किया गया है।

SAT-SAAW की तकनीकी विशेषताएँ

SAT-SAAW एक एयर-टू-ग्राउंड प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम है, जिसे जगुआर, हॉक और सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली की सीमा में प्रवेश किए बिना — अर्थात सुरक्षित दूरी से — एयरफील्ड को सटीक रूप से निशाना बना सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लाइड बम पारंपरिक सामरिक मिसाइलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम लागत वाले होते हैं, क्योंकि इनमें आगे बढ़ने के लिए अलग रॉकेट या जेट इंजन नहीं होता — ये लॉन्च करने वाले विमान की गति और एयरोडायनामिक ग्लाइड क्षमता का उपयोग कर लक्ष्य तक पहुँचते हैं। SAT-SAAW में उच्च-विस्फोटक, प्री-फ्रैगमेंटेड डीप-पेनेट्रेशन वारहेड लगाया गया है, जो एयरफील्ड अवसंरचना को अधिकतम नुकसान पहुँचाने में सक्षम है। सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन प्रणाली इसे उच्च स्तर की सटीकता प्रदान करती है।

लक्ष्य और सैन्य महत्व

ये स्मार्ट ग्लाइड बम विशेष रूप से रनवे, टैक्सी ट्रैक, मजबूत बंकर, विमान हैंगर, रडार प्रतिष्ठान, ईंधन भंडारण केंद्र और संचार सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ढाँचों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इनका उद्देश्य संघर्ष के शुरुआती चरण में दुश्मन के एयरबेस को निष्क्रिय कर उसकी हवाई शक्ति को कमजोर करना होता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वायु शक्ति को व्यापक रूप से आधुनिक बना रहा है और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। BDL इससे पहले भी मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।

आपूर्ति की समयसीमा और आगे का रास्ता

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, SAT-SAAW की आपूर्ति 2027-28 और 2028-29 के दौरान की जाएगी। इन हथियारों के बेड़े में शामिल होने से IAF की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसी भी संघर्ष की स्थिति में निर्बाध हवाई अभियान चलाने की क्षमता और मजबूत होगी। यह कदम भारत के रक्षा उत्पादन को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दुश्मन के वायु रक्षा क्षेत्र में घुसे बिना उसके एयरबेस को निष्क्रिय करने पर केंद्रित है। 60% स्वदेशी सामग्री की उपलब्धि उल्लेखनीय है, लेकिन शेष 40% आयातित घटकों की निर्भरता और उनकी आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर ध्यान देना भी जरूरी है। आपूर्ति 2027-29 के बीच होने का अर्थ है कि मौजूदा भू-राजनीतिक दबाव के बीच IAF को इन हथियारों के लिए अभी और इंतजार करना होगा। दीर्घकालिक दृष्टि से, BDL जैसी सार्वजनिक रक्षा कंपनियों को इस तरह के उच्च-मूल्य, उच्च-तकनीक अनुबंध मिलना आत्मनिर्भरता नीति की असली परीक्षा है — और यह परिणाम सकारात्मक दिशा में है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SAT-SAAW क्या है और यह कैसे काम करता है?
SAT-SAAW (सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन) एक स्वदेशी एयर-टू-ग्राउंड प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम है जिसे DRDO ने विकसित किया है। यह लड़ाकू विमान की गति और एयरोडायनामिक ग्लाइड क्षमता का उपयोग कर सैटेलाइट नेविगेशन की मदद से दुश्मन के एयरफील्ड को सटीकता से निशाना बनाता है — बिना विमान को दुश्मन की वायु रक्षा की सीमा में लाए।
BDL को मिला यह अनुबंध कितने का है और इसमें क्या शामिल है?
रक्षा मंत्रालय ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ ₹810.79 करोड़ का अनुबंध किया है। इसके तहत IAF के लिए 160 SAT-SAAW और संबंधित उपकरणों की खरीद की जाएगी। यह खरीद 'Buy Indian-IDDM' श्रेणी के अंतर्गत है, जो स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता देती है।
SAT-SAAW किन विमानों से दागा जा सकता है?
SAT-SAAW को भारतीय वायुसेना के जगुआर, हॉक और सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है। ये सभी IAF के परिचालन बेड़े का हिस्सा हैं, जिससे इसकी त्वरित तैनाती संभव होगी।
SAT-SAAW की आपूर्ति कब तक होगी?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार SAT-SAAW की आपूर्ति 2027-28 और 2028-29 के दौरान की जाएगी। इन दो वर्षों में 160 हथियारों की डिलीवरी पूरी होने की उम्मीद है।
इस हथियार प्रणाली में स्वदेशी सामग्री कितनी है?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार SAT-SAAW में लगभग 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके अलावा इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज और ट्विन स्टोर कैरियर जैसी उप-प्रणालियों का भी स्वदेशीकरण किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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