रक्षा मंत्रालय का BEL के साथ ₹1,476 करोड़ का करार, सेना की निगरानी व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता होगी मजबूत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रक्षा मंत्रालय का BEL के साथ ₹1,476 करोड़ का करार, सेना की निगरानी व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता होगी मजबूत

सारांश

रक्षा मंत्रालय ने BEL हैदराबाद के साथ ₹1,476 करोड़ का करार किया है — पाँच ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खरीद के लिए, जिसमें 72% स्वदेशी सामग्री होगी। यह सौदा सेना की निगरानी, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता को मजबूत करेगा और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक और ठोस कदम है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्रालय ने 5 मई 2026 को BEL हैदराबाद के साथ ₹1,476 करोड़ का अनुबंध किया।
सौदे में 5 ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खरीद शामिल है, जो सेना की निगरानी, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता बढ़ाएंगे।
अनुबंध में कम से कम 72% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य की गई है।
करार 'बाय इंडियन – IDDM' श्रेणी के तहत हुआ; हस्ताक्षर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में।
इससे पहले ₹975 करोड़ के टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए DRDO-विकसित ट्रॉल असेंबली का सौदा भी किया गया था।

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार, 5 मई 2026 को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), हैदराबाद के साथ ₹1,476 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारतीय सेना के लिए पाँच ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की खरीद की जाएगी। इस सौदे से सेना की निगरानी, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

सौदे की मुख्य विशेषताएँ

यह अनुबंध 'बाय (इंडियन – इंडिजेनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)' श्रेणी के तहत किया गया है। इसमें कम से कम 72 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल होगी, जो देश में रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अनुबंध पर हस्ताक्षर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 (रक्षा मंत्रालय) में किए गए।

सेना की परिचालन क्षमता पर असर

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के शामिल होने से भारतीय सेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। ये सिस्टम विशेष रूप से निगरानी, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के क्षेत्र में सेना को तकनीकी बढ़त दिलाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सीमाओं पर सुरक्षा ढाँचे को लगातार आधुनिक बनाने में जुटा है।

स्वदेशी उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

इस सौदे से घरेलू कंपनियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और सप्लाई चेन को नए व्यावसायिक अवसर मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि यह करार 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को और गति प्रदान करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे प्रोजेक्ट भारत को रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बना रहे हैं।

टी-72 और टी-90 टैंकों का पिछला सौदा

गौरतलब है कि इस सौदे से कुछ दिन पहले ही रक्षा मंत्रालय ने ₹975 करोड़ की लागत से टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए ट्रॉल असेंबली की खरीद का निर्णय भी लिया था। यह ट्रॉल असेंबली रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की गई है और युद्ध के दौरान बारूदी सुरंगों (माइनफील्ड) को निष्क्रिय कर टैंकों के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार करती है।

क्या होगा आगे

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रॉल असेंबली एंटी-टैंक माइन — विशेषकर प्रॉक्सिमिटी मैग्नेटिक फ्यूज वाली — को निष्क्रिय करने में सक्षम है, जिससे युद्ध परिस्थितियों में सैन्य वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर लगातार जोर दिया जा रहा है और ये दोनों सौदे उसी रणनीतिक दिशा में बढ़ते कदम हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

476 करोड़ का यह BEL अनुबंध सुर्खियों में आकर्षक लगता है, लेकिन असली कसौटी यह है कि '72% स्वदेशी सामग्री' की शर्त कागज़ों से ज़मीन तक कितनी उतरती है — पिछले कई रक्षा सौदों में स्वदेशीकरण के दावे और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच की खाई चिंताजनक रही है। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती क्षमताओं के मद्देनज़र यह निवेश ज़रूरी है, लेकिन पाँच सिस्टम की खरीद एक व्यापक आधुनिकीकरण योजना की शुरुआत भर है। MSME और सप्लाई चेन को वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उपठेकेदारी की निगरानी पारदर्शी हो।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रक्षा मंत्रालय और BEL के बीच ₹1,476 करोड़ का सौदा क्या है?
यह 5 मई 2026 को हुआ वह अनुबंध है जिसके तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), हैदराबाद भारतीय सेना के लिए पाँच ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाएगी। इन सिस्टम का उद्देश्य सेना की निगरानी, संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता को मजबूत करना है।
इस सौदे में स्वदेशी सामग्री कितनी होगी?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस अनुबंध में कम से कम 72 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल होगी। यह सौदा 'बाय इंडियन – इंडिजेनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड (IDDM)' श्रेणी के तहत किया गया है।
इस सौदे से MSME और घरेलू उद्योग को क्या फायदा होगा?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस सौदे से घरेलू कंपनियों, MSME और सप्लाई चेन को नए व्यावसायिक अवसर मिलेंगे। यह 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहल को गति देने का हिस्सा है।
टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए ट्रॉल असेंबली सौदा क्या है?
इस BEL सौदे से कुछ दिन पहले रक्षा मंत्रालय ने ₹975 करोड़ की लागत से टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए DRDO-विकसित ट्रॉल असेंबली खरीदने का निर्णय लिया था। ट्रॉल असेंबली माइनफील्ड में एंटी-टैंक माइन को निष्क्रिय कर टैंकों के लिए सुरक्षित मार्ग बनाती है।
यह करार भारतीय सेना की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता को कैसे मजबूत करेगा?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये पाँच ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम सेना को वास्तविक समय निगरानी, उन्नत संचार और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग-काउंटर जैमिंग क्षमताएँ प्रदान करेंगे। इससे सेना को आधुनिक युद्ध परिदृश्यों में तकनीकी बढ़त मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले