बेलगावी में खुदाई के दौरान मिले 14 प्राचीन सोने के सिक्के, मजदूरों ने प्रशासन को सौंपे
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के बेलगावी जिले के सौंदत्ती तालुक के इंचल गांव में खुदाई कार्य के दौरान दिहाड़ी मजदूरों को एक मिट्टी के मटके में 14 प्राचीन सोने के सिक्के मिले हैं। मजदूरों ने ईमानदारी की अनुकरणीय मिसाल पेश करते हुए ये सभी सिक्के तुरंत प्रशासन को सौंप दिए, जिसके बाद तालुक प्रशासन ने उनकी मुक्त कंठ से सराहना की।
कैसे हुई खोज
वीबी जीरामजी योजना के अंतर्गत इंचल गांव में स्थित बीसीएम हॉस्टल के पास काम कर रहे दिहाड़ी मजदूरों को खुदाई के दौरान जमीन में एक पुराना मिट्टी का बर्तन मिला। जब इस बर्तन को खोला गया, तो उसमें से 14 सोने के सिक्के निकले, जो ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं।
सिक्कों का वजन और अनुमानित मूल्य
इन सिक्कों का कुल वजन 54.8 ग्राम है और प्रशासनिक आकलन के अनुसार इनकी बाज़ार कीमत लगभग ₹8.27 लाख आंकी गई है। सभी 14 सिक्कों पर हाथी की आकृति अंकित है। इतिहास के जानकारों के अनुसार हाथी तलकाडु के गंगा वंश का शाही प्रतीक था, और ये सिक्के 10वीं से 15वीं शताब्दी के बीच के माने जा रहे हैं।
प्रशासन को सौंपने की प्रक्रिया
मजदूरों ने सिक्के अपने पास रखने का कोई प्रयास नहीं किया और तत्काल अधिकारियों को सूचित किया। पंचायत विकास अधिकारी (पीडीओ) और तालुक पंचायत कर्मचारियों की उपस्थिति में ये सिक्के सौंदत्ती तहसीलदार मल्लिकार्जुन हेग्गनवर को सौंपे गए। तहसीलदार हेग्गनवर ने सभी सिक्कों को विधिवत रूप से सरकारी खजाने में जमा करा दिया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
तालुक प्रशासन ने मजदूरों की इस ईमानदारी की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अधिकारियों ने कहा कि मजदूर चाहते तो इन बहुमूल्य सिक्कों को छुपा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा न करके समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि गंगा वंश दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंशों में से एक था, जिसका प्रभाव क्षेत्र आधुनिक कर्नाटक के बड़े हिस्से तक फैला था। इस प्रकार के सिक्कों की खोज पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब यह देखना होगा कि पुरातत्व विभाग इन सिक्कों की आगे जाँच कब और कैसे करता है।