बेलगावी में 198 मुस्लिम वोटर्स के नाम हटाने का आरोप, भाजपा नेता डॉ. रवि पाटिल को सशर्त जमानत
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के बेलगावी में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के ज़रिए मतदाता सूची से 198 मुस्लिम वोटर्स के नाम हटाने के आरोप में दर्ज मामले ने तीखा सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में नामज़द भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता डॉ. रवि बी. पाटिल को बेलगावी की दूसरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 4 अक्टूबर 2026 को सशर्त जमानत प्रदान की है।
मामले की पृष्ठभूमि
आरोप है कि 22 सितंबर 2026 को बेलगावी के वीरभद्रनगर इलाके में स्थित पोलिंग बूथ 195 और 196 पर SIR प्रक्रिया के दौरान जीवित और कानूनी रूप से वैध मतदाताओं के नाम फ़ॉर्म नंबर 7 के ज़रिए हटाने की कोशिश की गई। मार्केट पुलिस स्टेशन में वार्ड 12 के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की शिकायत के आधार पर यह मुकदमा दर्ज हुआ।
गौरतलब है कि डॉ. रवि बी. पाटिल ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बेलगावी उत्तर (बेलगाम उत्तर) निर्वाचन क्षेत्र से BJP के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। मामला दर्ज होते ही वे अंडरग्राउंड हो गए थे।
एफआईआर में आरोप
मार्केट पुलिस स्टेशन अपराध संख्या 218/2026 के अंतर्गत डॉ. रवि पाटिल, विजय हॉस्पिटल के स्टाफ सदस्य प्रशांत मुंदिनमनी और शंकर नायक समेत कुल 25 लोगों के विरुद्ध मामला पंजीकृत किया गया है। आरोपियों पर फर्ज़ी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने, गलत सूचना देने और शहर की कानून-व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास करने का आरोप है।
यह शिकायत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 336(4), 353, 61(2), 3(5), 3(7), 192 एवं 190 के तहत दर्ज की गई है — जिनमें धोखाधड़ी, जालसाज़ी और लोक-शांति भंग करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
पुलिस जाँच में क्या सामने आया
बेलगावी मार्केट पुलिस की जाँच के अनुसार, आरोपियों ने SIR प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए वैध मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फ़ॉर्म नंबर 7 का इस्तेमाल किया। जाँच अधिकारियों के अनुसार, यह सब 22 सितंबर को वीरभद्रनगर के दो पोलिंग बूथों पर हुआ। पुलिस की प्राथमिक जाँच में यह दावा किया जा रहा है कि जो मतदाता जीवित और पात्र थे, उनके नाम जानबूझकर हटाने की कोशिश की गई।
सियासी घमासान
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में मतदाता सूची के SIR (Special Summary Revision) को लेकर विभिन्न दल पहले से ही आमने-सामने हैं। आलोचकों का कहना है कि अल्पसंख्यक मतदाताओं को लक्षित कर वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ की जाती रही है, जबकि BJP ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। सशर्त जमानत मिलने के बाद अब अदालती सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
आगे क्या होगा
अदालत ने डॉ. रवि पाटिल को सशर्त जमानत देते हुए कुछ शर्तें निर्धारित की हैं, जिनका ब्यौरा फ़िलहाल सार्वजनिक नहीं हुआ है। मार्केट पुलिस स्टेशन की जाँच जारी है और अन्य आरोपियों के बारे में स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। यह मामला आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में महत्त्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।