बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने का आरोप: BJP पार्षद और चुनाव अधिकारियों पर FIR
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान 7,561 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश के आरोप में सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बूथ लेवल एजेंट-1 (BLA-1) सह बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के पार्षद श्रीनिवास मोटकर और तीन चुनाव अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। यह शिकायत वार्ड नंबर 23, बूथ नंबर 94 के कांग्रेस बूथ लेवल एजेंट गौतम ने दर्ज कराई है।
मामले का मुख्य घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, SIR प्रक्रिया 29 जून 2026 को शुरू हुई थी और 24 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी। इसके बाद मतदाताओं को अपने नाम जुड़वाने के लिए दावे पेश करने और आपत्तियाँ दर्ज कराने का अवसर दिया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 21 सितंबर 2026 को मोटकर ने बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन क्षेत्र में 7,561 मतदाताओं के नामों की पुनर्जाँच की माँग वाली एक अर्जी दाखिल की। आरोप यह भी है कि चुनाव अधिकारियों ने इस अर्जी को पहले अस्वीकार कर दिया था और उसकी पावती भी जारी की थी, इसके बावजूद 22 सितंबर 2026 को नाम हटाने के लिए 'फॉर्म-7' के तहत आवेदन जमा किए गए।
नियमों के उल्लंघन के आरोप
SIR दिशानिर्देशों के मुताबिक, एक BLA अधिकतम 30 'फॉर्म-7' आवेदन जमा कर सकता है। शिकायत में आरोप है कि इस सीमा की अनदेखी करते हुए चुनाव अधिकारियों ने 7,561 आवेदन स्वीकार किए और उन पर कार्रवाई भी की। इस तरह यह नियम से करीब 252 गुना अधिक आवेदन हैं।
FIR में जिन अधिकारियों के नाम शामिल हैं, उनमें असिस्टेंट कमिश्नर नंदीश, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) सुमलता और केस वर्कर शरणबसवा हैं। शिकायत में इनके और मोटकर के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।
अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने का आरोप
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि शिकायत के अनुसार इन 7,561 आवेदनों में शामिल मतदाताओं में से कथित तौर पर लगभग 98.08 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय से थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये आवेदन जानबूझकर अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवाने के उद्देश्य से दाखिल किए गए थे।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन कृत्यों का मकसद न केवल मतदाता सूची से नाम हटाना था, बल्कि समुदायों के बीच विभाजन और वैमनस्य पैदा करना, और योग्य मतदाताओं के मताधिकार को नुकसान पहुँचाना भी था।
सरकार और चुनाव आयोग की स्थिति
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में SIR प्रक्रिया पहले से ही विवादों में रही है और विभिन्न दलों द्वारा मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लगाए जाते रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार FIR दर्ज कर आगे की जाँच शुरू कर दी गई है।
यह भी आरोप है कि आरोपियों ने चुनाव अधिकारियों को गलत सूचना देकर योग्य मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की। अभी तक किसी भी आरोपी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे की जाँच
पुलिस ने शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली है और मामले की विस्तृत जाँच जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का गंभीर उल्लंघन होगा। आने वाले दिनों में यह मामला कर्नाटक की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।