5 अक्टूबर 2026
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बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने की कोशिश: भाजपा बीएलए श्रीनिवास मोटकर सहित चार पर FIR

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बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने की कोशिश: भाजपा बीएलए श्रीनिवास मोटकर सहित चार पर FIR

सारांश

कर्नाटक में मतदाता सूची से छेड़छाड़ का मामला अब बल्लारी तक पहुँचा — जहाँ BJP बीएलए पर 7,561 नाम हटाने की कोशिश का आरोप है, जिनमें 98% से अधिक अल्पसंख्यक। एक दिन पहले बेलगावी में भी यही विवाद था। कर्नाटक की राजनीति में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

मुख्य बातें

बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से 7,561 वोटरों के नाम कथित तौर पर हटाने की कोशिश पर 5 अक्टूबर 2026 को FIR दर्ज।
BJP बीएलए-1 श्रीनिवास मोटकर सहित असिस्टेंट कमिश्नर नंदिश , BLO सुमालता और केस वर्कर शरणबसवा — चार आरोपी।
शिकायत के अनुसार हटाए जाने वाले 98.08 प्रतिशत मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से थे।
एसआईआर प्रक्रिया के तहत एक बीएलए द्वारा तय सीमा से अधिक आवेदन जमा करने का भी आरोप।
बेलगावी में BJP नेता डॉ.
रवि पाटिल पर 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में अदालत ने सशर्त जमानत दी; उनके खिलाफ 20-25 लोगों की FIR दर्ज।

कर्नाटक के बल्लारी में मतदाता सूची से 7,561 वोटरों के नाम कथित तौर पर गैरकानूनी ढंग से हटाने की कोशिश के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बूथ लेवल एजेंट-1 (बीएलए-1) श्रीनिवास मोटकर सहित चार लोगों के खिलाफ 5 अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप है कि हटाए जाने वाले 98.08 प्रतिशत मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से थे, जिससे यह मामला राज्य में सियासी तूफान का नया केंद्र बन गया है।

मुख्य आरोप और FIR का ब्यौरा

FIR के अनुसार, बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के पार्षद और BJP बीएलए-1 श्रीनिवास मोटकर ने बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के ज़रिए आवेदन जमा किए। शिकायत में कहा गया है कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत एक बीएलए द्वारा जमा किए जा सकने वाले आवेदनों की संख्या पर पाबंदी है, जिसे कथित तौर पर नज़रअंदाज़ किया गया।

आरोपों के मुताबिक, मोटकर ने चुनाव अधिकारियों को गलत जानकारी देकर वोटर लिस्ट से नाम हटवाने की कोशिश की। शिकायत में यह भी आरोप है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करना और समुदायों के बीच बंटवारा पैदा करना था।

अन्य आरोपियों पर मिलीभगत का आरोप

FIR में श्रीनिवास मोटकर के अलावा बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के असिस्टेंट कमिश्नर नंदिश, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) सुमालता और केस वर्कर शरणबसवा का भी नाम शामिल है। इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने इस प्रक्रिया में कथित मिलीभगत की और आवेदन जमा करने व उन पर कार्रवाई करने में सहयोग किया। पुलिस ने बताया कि केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

बेलगावी में भी इसी तरह का मामला, BJP नेता को जमानत

गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इससे ठीक एक दिन पहले कर्नाटक के बेलगावी में BJP नेता डॉ. रवि पाटिल पर एसआईआर के ज़रिए 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवाने का आरोप लगाया गया था। बेलगावी की दूसरी अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत ने डॉ. रवि पाटिल को सशर्त जमानत प्रदान की। इस मामले में डॉ. पाटिल सहित 20-25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान चरम पर है। राज्य में कई जगहों से अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिशों के आरोप सामने आ रहे हैं।

सियासी प्रतिक्रिया और व्यापक संदर्भ

यह बल्लारी का मामला कर्नाटक में मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर बढ़ते विवाद की नवीनतम कड़ी है। विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को लोकतंत्र पर सुनियोजित हमला बताते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग से दखल देने की माँग की है। BJP ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आलोचकों का कहना है कि यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मतदाता सूची की निष्पक्षता और अल्पसंख्यक समुदाय के मताधिकार के लिए गंभीर खतरे का संकेत होगा। जाँच के नतीजे और न्यायिक प्रक्रिया यह तय करेगी कि इस मामले की आगे क्या दिशा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

दो FIR, एक ही पैटर्न। यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं दिखती; शिकायतों में 98% से अधिक अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप एक सुनियोजित रणनीति की ओर इशारा करता है — अगर आरोप सही साबित हों। असली सवाल यह है कि एसआईआर जैसी नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया राजनीतिक हथियार बनने से कैसे बचे, और चुनाव आयोग इसे रोकने के लिए क्या ठोस तंत्र बनाता है। मतदाता सूची की पारदर्शिता और जवाबदेही के बिना, लोकतंत्र की बुनियाद पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बल्लारी में वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मामला क्या है?
बल्लारी सिटी विधानसभा क्षेत्र में BJP के बीएलए-1 श्रीनिवास मोटकर पर आरोप है कि उन्होंने फॉर्म-7 के ज़रिए 7,561 मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन जमा किए, जिनमें कथित तौर पर 98.08% अल्पसंख्यक समुदाय से थे। 5 अक्टूबर 2026 को मोटकर सहित चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
इस मामले में किन-किन लोगों पर FIR दर्ज हुई है?
FIR में BJP बीएलए-1 श्रीनिवास मोटकर, बल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के असिस्टेंट कमिश्नर नंदिश, बूथ लेवल ऑफिसर सुमालता और केस वर्कर शरणबसवा — कुल चार लोगों के नाम हैं। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने इस प्रक्रिया में कथित मिलीभगत की।
एसआईआर प्रक्रिया क्या है और इसमें गड़बड़ी का आरोप क्यों है?
एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मतदाता सूची को अद्यतन करने की चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। शिकायत में आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत एक बीएलए द्वारा जमा किए जा सकने वाले आवेदनों की तय सीमा को कथित तौर पर नज़रअंदाज़ किया गया और चुनाव अधिकारियों को गलत जानकारी दी गई।
बेलगावी का संबंधित मामला क्या है?
इससे एक दिन पहले बेलगावी में BJP नेता डॉ. रवि पाटिल पर एसआईआर के ज़रिए 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटवाने का आरोप लगा था। उनके खिलाफ 20-25 लोगों की FIR दर्ज हुई और बेलगावी की दूसरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत दी।
इस मामले का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
कर्नाटक में लगातार दो दिनों में दो अलग-अलग जिलों में इसी तरह के आरोप सामने आने से मतदाता सूची की निष्पक्षता को लेकर राज्य में सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से दखल देने की माँग की है और मामले की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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