भगवान शिव पर आपत्तिजनक बयान: आचार्य प्रमोद कृष्णम बोले — दूसरे धर्मों का अपमान करने वाला मुसलमान नहीं
सारांश
मुख्य बातें
धर्मगुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 2 अगस्त 2026 को मुरादाबाद में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौलाना जरजिस अंसारी द्वारा भगवान शिव पर दिए गए आपत्तिजनक बयान को वे इस्लाम की भावना के विरुद्ध मानते हैं। उन्होंने कहा कि जो भी मौलाना इस तरह के बयान देता है, वह उनकी नज़र में मुसलमान नहीं है।
मुख्य बयान और आचार्य की प्रतिक्रिया
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कोई भी सच्चा मुसलमान दूसरे धर्मों का अपमान नहीं करता। उन्होंने कहा, 'अगर कोई ऐसा करता है तो वह मुसलमान नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि मौलाना जरजिस अंसारी को पहले इस्लाम की सही तालीम लेनी चाहिए और उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि मौलाना को सद्बुद्धि मिले।
संसद परिसर में प्रदर्शन पर तीखी टिप्पणी
संसद परिसर में पप्पू यादव के प्रदर्शन पर आचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जबसे इस पद पर आए हैं, तब से संसद को थियेटर बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने पप्पू यादव से आग्रह किया कि यदि वे अभिनय करना चाहते हैं तो आगामी रामलीला में कालनेमि, खरदूषण या मेघनाथ का पाठ करें, लेकिन सनातन का अपमान न करें।
सनातन और कांग्रेस पर आचार्य का रुख
आचार्य ने कहा कि सनातन हिंदुओं का विषय है और यह राहुल गांधी का विषय नहीं है। कांग्रेस के संसद में हुड़दंग पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुद्ध की करुणा, महावीर की अहिंसा और महात्मा गांधी के सत्य को आत्मसात करते हुए उन्हें माफ कर दिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पीएम ने भले माफ किया हो, लेकिन देश की जनता ऐसे लोगों को माफ नहीं करेगी।
वंदे मातरम विवाद पर प्रतिक्रिया
असदुद्दीन ओवैसी के वंदे मातरम संबंधी बयान पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि एक सच्चा मुसलमान पाँच वक्त वंदे मातरम करता है और ओवैसी को यह समझना चाहिए।
मुरादाबाद में गुरुकुल उद्घाटन
आचार्य प्रमोद कृष्णम मुरादाबाद में सुधांशु महाराज के सानिध्य में आयोजित एक गुरुकुल के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे थे। कार्यक्रम के बाद उन्होंने देश के माता-पिता से अनुरोध किया कि यदि वे चाहते हैं कि उनके बच्चे सही दिशा में बढ़ें, तो उन्हें गुरुकुल शिक्षा की ओर प्रेरित करें। यह बयान ऐसे समय आया है जब धार्मिक बयानों और सांप्रदायिक संवेदनशीलता को लेकर देशभर में बहस तेज़ है।