आचार्य प्रमोद कृष्णम: विरोध-प्रदर्शन संविधान के दायरे में हो, राहुल पर भीड़तंत्र का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 22 जुलाई को गाजियाबाद में प्रधानमंत्री आवास की ओर किए गए विपक्ष के मार्च और छात्र-प्रदर्शनों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच की माँग भी की।
छात्र आंदोलन पर आचार्य का रुख
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, 'यदि छात्रों की वास्तविक समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था, तो उसमें हिंसा और अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे छात्रों की जायज माँगों का समर्थन करते हैं, परंतु किसी भी आंदोलन की आड़ में कानून-व्यवस्था को चुनौती देना स्वीकार्य नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों के प्रदर्शन और छात्र-असंतोष को लेकर देश में व्यापक बहस छिड़ी हुई है।
विपक्ष पर सीधा निशाना
आचार्य ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों के मुद्दों का उपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए कर रहे हैं। उनके अनुसार, 'विपक्ष देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहा है।' उन्होंने कहा कि भारत ने बड़े जन-आंदोलनों का इतिहास देखा है, लेकिन विरोध के नाम पर अलगाववाद, हिंसा और अराजकता को कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व पर टिप्पणी करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आरोप लगाया कि 'राहुल गांधी लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलने का प्रयास कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में हो रहे विरोध-प्रदर्शन देश के लिए चिंता का विषय हैं और सुरक्षा एजेंसियों को संसद के भीतर व बाहर पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए। गौरतलब है कि यह बयान संसद परिसर में विपक्षी सांसदों के काले कपड़े पहनकर किए गए प्रतीकात्मक विरोध के संदर्भ में आया।
डिंपल यादव की भूमिका को सराहा
विपक्षी गठबंधन की सांसद डिंपल यादव की भूमिका की प्रशंसा करते हुए आचार्य ने कहा कि पूरे विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका 'सबसे संतुलित और सराहनीय' रही। उन्होंने यहाँ तक कहा कि राहुल गांधी के स्थान पर डिंपल यादव को विपक्ष का नेता बनाने पर विचार किया जाना चाहिए — एक ऐसा सुझाव जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन सकता है।
यूसीसी और संसदीय विरोध पर विचार
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मुद्दे पर आचार्य ने कहा कि यह केवल किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय है और देशभर में समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए। संसद परिसर में काले कपड़ों में हुए विरोध को उन्होंने 'केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने का प्रयास' बताया। उन्होंने दोहराया कि देशहित सर्वोपरि है और लोकतांत्रिक असहमति को हमेशा संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहकर व्यक्त किया जाना चाहिए।