अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद गहलोत का BJP पर हमला — 'बंगाल में गली-गली गुंडागर्दी'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने 31 मई 2026 को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की। गहलोत ने आरोप लगाया कि इस घटना ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 'चाल, चरित्र और चेहरे' को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
मुख्य आरोप और बयान
गहलोत ने कहा, 'जब से चुनाव में TMC हारी है, तब से बंगाल में गुंडागर्दी चरम पर है। गली-गली में हिंसा हो रही है, TMC के कार्यालयों पर लगातार हमले हो रहे हैं और उन पर कब्ज़े करवाए जा रहे हैं।' उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा देश बंगाल में हो रही इन गतिविधियों को देख रहा है, तो केंद्र सरकार चुप क्यों है।
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस सत्ता बदलते ही अपना रंग बदल लेती है, और यह किसी से छिपा नहीं है कि सत्ताधारी दल की बात मानना उनकी मजबूरी होती है।
चुनाव प्रक्रिया पर सवाल
गहलोत ने बंगाल चुनाव की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनके अनुसार, चुनाव आयोग ने बंगाल में ढाई लाख कर्मचारी तैनात किए, जबकि पूरे देश के चुनाव में केवल तीन लाख कर्मचारी लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी के IPS अधिकारी मोहल्लों में जाकर मतदाताओं को धमका रहे थे, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 27 लाख लोगों को मतदान का अवसर ही नहीं मिला और इसीलिए चुनाव कुछ महीने के लिए स्थगित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस विषय पर टिप्पणी की है।
बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का संदर्भ
गहलोत ने कहा कि पश्चिम बंगाल की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है — सुभाष चंद्र बोस से लेकर रवींद्रनाथ टैगोर तक की त्याग और बलिदान की परंपरा। उन्होंने कहा कि वे पहले ही आगाह कर चुके थे कि यदि BJP बंगाल में सत्ता में आई तो पूरा देश निराश होगा।
डबल इंजन सरकार पर कटाक्ष
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डबल इंजन सरकार' के नारे पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि बंगाल में यह डबल इंजन विकास की बजाय 'डबल मार' के रूप में जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वही इंजन आज गुंडागर्दी और दमन के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
युवाओं से आह्वान
गहलोत ने युवा पीढ़ी से सक्रिय राजनीतिक भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी के संविधान-निर्माण के समय की भावना के अनुरूप चलना चाहिए। उनका कहना था कि छात्र और युवा किसी भी दल में जाएँ, लेकिन सही विचारधारा की पहचान करना उनकी ज़िम्मेदारी है। आने वाले दिनों में बंगाल की स्थिति और राजनीतिक तनाव राष्ट्रीय बहस का केंद्र बने रहने की संभावना है।