मदरसों की एटीएस जांच का स्वागत, हर रिकॉर्ड खुला: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी
सारांश
मुख्य बातें
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 4 जुलाई को बरेली में तीन अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी — भारत-जापान समझौते, उत्तर प्रदेश के मदरसों में आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की जांच, और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तदफीन। उन्होंने मदरसों की जांच में पूर्ण सहयोग का भरोसा देते हुए कहा कि मदरसे 'खुली किताब' हैं और वहाँ कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है।
भारत-जापान समझौतों पर रुख
मौलाना रजवी बरेलवी ने भारत और जापान के बीच हुए व्यापार, आर्थिक और अन्य क्षेत्रों के समझौतों का स्वागत किया। उनके अनुसार, दो देशों के बीच इस प्रकार के द्विपक्षीय समझौते राष्ट्रीय प्रगति और आम जनता के हित में आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि देशों के प्रमुख समय-समय पर ऐसे करार करते रहते हैं, जो दीर्घकालिक विकास की नींव बनते हैं।
एटीएस जांच: मदरसे तैयार, दरवाज़े खुले
उत्तर प्रदेश में मदरसों की एटीएस जांच के आदेश पर मौलाना ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह पाँचवीं बार जांच का आदेश दिया गया है। इससे पहले मदारिस-ए-अरबिया एसोसिएशन ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने जांच को बरकरार रखा।
मौलाना ने स्पष्ट किया कि एटीएस अधिकारी जब चाहें मदरसों का निरीक्षण कर सकते हैं। विदेशी और घरेलू फंडिंग, बैंक खाते, दस्तावेज़, रजिस्टर — सभी रिकॉर्ड जांच के लिए उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक दृष्टि से मदरसे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन हैं और बेहतर होता कि जांच उसी विभाग के माध्यम से होती, लेकिन सरकार के एटीएस जांच के फैसले का भी स्वागत है।
आतंकवाद पर कड़ा रुख
मौलाना ने आतंकवाद को 'गंभीर बीमारी' बताते हुए कहा कि इससे लड़ना पूरी दुनिया की ज़िम्मेदारी है। पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस देश ने आतंकवाद को पाला, आज वही उसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहा है। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारें अक्सर आतंकवाद की भाषा तो बोलती हैं, लेकिन इसे जड़ से मिटाने की ठोस रणनीति दिखाई नहीं देती।
खामेनेई की तदफीन और भारत से पैतृक संबंध
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तदफीन के बारे में मौलाना ने कहा कि उनकी मृत्यु इज़रायल और अमेरिका की कार्रवाई में हुई। चार महीने बाद उनका जनाजा पूरे ईरान में निकाला जा रहा है, जिसमें 120 देशों के प्रतिनिधि तेहरान पहुँचे हैं — भारत के प्रतिनिधि भी उनमें शामिल हैं।
मौलाना के अनुसार, खामेनेई का पैतृक संबंध उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किन्तूर गाँव से रहा है। उनके पिता शिक्षा के लिए ईरान गए और वहीं बस गए। परिवार दोबारा किन्तूर नहीं लौटा, लेकिन वहाँ के लोग समय-समय पर ईरान जाकर उनसे मिलते रहे। मौलाना ने कहा कि आज केवल किन्तूर ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में शोक की लहर है।
आगे क्या
मदरसों की एटीएस जांच अब अदालत की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी। मदरसा प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के निष्कर्ष क्या सामने आते हैं और क्या इससे मदरसा शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर व्यापक नीतिगत बदलाव होता है।