12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या भारत की अगली कृषि क्रांति एआई‑संचालित होगी: डॉ. जितेंद्र सिंह?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या भारत की अगली कृषि क्रांति एआई‑संचालित होगी: डॉ. जितेंद्र सिंह?

सारांश

क्या भारत की कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका भविष्य को बदल सकती है? डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई के जरिए कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए संभावनाओं की चर्चा की है, जो छोटे किसानों के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर सकती है। जानें इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन की प्रमुख बातें।

मुख्य बातें

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से कृषि में बेहतर उत्पादकता संभव है।
भारत के 60 करोड़ किसानों के लिए 10 प्रतिशत उत्पादकता वृद्धि एक बड़ा अवसर है।
इंडिया एआई मिशन से 10,372 करोड़ रुपए का निवेश हो रहा है।
ड्रोन और उपग्रह तकनीक खेती में सहायक होंगी।
महाएग्री-एआई नीति एक आदर्श मॉडल है।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की अगली कृषि क्रांति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा संचालित होगी, यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज मुंबई में आयोजित एआई4 एग्री 2026 शिखर सम्मेलन में साझा की। उन्होंने एआई को खेती की नीतियों, अनुसंधान और निवेश ढांचे का एक केंद्रीय स्तंभ बताया। इस सम्मेलन में “ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन एआई इन एग्रीकल्चर एंड इन्वेस्टर समिट 2026” के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि एआई उन संरचनात्मक चुनौतियों के लिए बड़े पैमाने पर समाधान प्रस्तुत करता है जो लंबे समय से कृषि उत्पादकता को प्रभावित कर रही हैं – जैसे अनियमित मौसम, जानकारी की असमानता, और टुकड़े‑टुकड़े बाजार।

उन्होंने कहा, “एआई जो समाधान प्रस्तुत करता है वह कोई नई रोग‑निदान नहीं है; यह अंततः एक ऐसा उपचार है जिसे पूरे देश में बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक दक्षिण के लगभग 60 करोड़ किसानों के लिए यदि उत्पादकता में केवल 10 प्रतिशत की वृद्धि हो जाए, तो यह इस सदी का सबसे बड़ा गरीबी‑निवारण अवसर होगा।

कृषि को एक पुराने, परंपरागत क्षेत्र के बजाय एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस एआई प्रयास को 10,372 करोड़ रुपए के इंडिया एआई मिशन से जोड़ा, जो स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग क्षमता, डेटासेट और स्टार्टअप ढांचे का बड़े पैमाने पर विकास कर रहा है।

उन्होंने भारतजन - भारत के सरकार‑स्वामित्व वाले बड़े भाषा‑मॉडल पारिस्थितिकी‑तंत्र-की चर्चा की, जिसने पहले ही “एग्री परम” नामक एक क्षेत्र‑विशिष्ट कृषि मॉडल जारी किया है जो 22 भारतीय भाषाओं में कार्य करता है और किसानों को अपनी मातृभाषा में सलाह‑सहायता तक पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “यह वह एआई है जो किसानों से मराठी, भोजपुरी, या कन्नड़ में बात करता है,” और भाषाई समावेशन के महत्व पर जोर दिया। मंत्री ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) इंडिया एआई ओपन स्टैक को समर्थन दे रहा है, जो एक खुला, अंतरसंचालित ढांचा है, ताकि देश के किसी भी हिस्से में विकसित किए गए एग्री‑एआई समाधान राष्ट्रीय फ्रेमवर्क में आसानी से जुड़ सकें।

अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन आईआईटी, आईआईसी और आईसीएआर के साथ मिलकर डीप‑टेक और एआई अनुसंधान को वित्त पोषित कर रहा है, जिसमें कृषि अनुप्रयोग भी शामिल हैं। डॉ. सिंह ने ड्रोन और उपग्रह‑आधारित मैपिंग की ओर इशारा किया, जो पहले से ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड और स्वामित्व मिशन को मजबूत कर रही हैं, क्योंकि वे भूमि और मिट्टी के सत्यापित डेटा प्रदान करती हैं। उन्होंने जलवायु बुद्धिमत्ता में निवेश की बात की, जहां पृथ्वी विज्ञान और एआई को प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में एकीकृत किया जा रहा है, ताकि किसान “घबराएं नहीं, बल्कि योजना बनाएं।” उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका टिकाऊ और रोग‑प्रतिरोधी फसलों के विकास में बेहद महत्वपूर्ण होगी, जिसमें कीट और पौधों के रोगों का शुरुआती, लक्षण‑रहित पता लगाना भी शामिल है, और एक चक्रीय फसल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में भी यह महत्वपूर्ण योगदान देगी।

संभावनाओं के पैमाने पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की लगभग 14 करोड़ खेती इकाइयाँ, जिनमें अधिकांश छोटे और सीमांत किसान हैं, एक साथ वार्षिक लगभग 70,000 करोड़ रुपये का मूल्य उत्पन्न कर सकती हैं, अगर एआई‑संचालित सलाह प्रत्येक किसान को बेहतर निवेश‑समय, कीट‑भविष्यवाणी और बाजार‑संबंधन के माध्यम से प्रति वर्ष केवल 5,000 रुपए भी बचा दे। उन्होंने महाराष्ट्र की 500 करोड़ रुपये की महाएग्री-एआई नीति 2025–29 को एक आदर्श मॉडल के रूप में उद्धृत किया और कहा कि केंद्र ऐसी राज्य‑स्तरीय पहलों को समन्वित और बढ़ावा देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कृषि में क्या महत्व है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता कृषि उत्पादकता को बढ़ाने, मौसम की अनियमितताओं का सामना करने और किसानों को बेहतर सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई के बारे में क्या कहा?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई को खेती नीति और अनुसंधान का केंद्रीय स्तंभ बताया और इसके माध्यम से किसानों के लिए आर्थिक अवसरों की चर्चा की।
भारत में एआई का प्रयोग किस प्रकार किया जाएगा?
एआई का प्रयोग खेती के लिए बेहतर निर्णय लेने, कीट-भविष्यवाणी और बाजार संबंधी सलाह देने के लिए किया जाएगा।
क्या एआई से किसानों की आय में वृद्धि होगी?
हाँ, एआई द्वारा किसानों को दी गई सलाह से उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकती है।
महाएग्री-एआई नीति क्या है?
महाएग्री-एआई नीति महाराष्ट्र की एक पहल है, जो 2025-29 तक कृषि में एआई का उपयोग बढ़ाने के लिए बनाई गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले