मोहन भागवत: भारत की समग्र दृष्टि विश्व संकटों का उत्तर, NEP-2020 सम्मेलन में बोले RSS सरसंघचालक
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 28 जून 2026 को बेंगलुरु में कहा कि भारत की समग्र और एकात्म दृष्टि ही आज विश्व के समक्ष उपस्थित जटिल समस्याओं का वास्तविक समाधान प्रस्तुत करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया को पूर्णता देना भारत का ऐतिहासिक दायित्व है और भारतीय शिक्षण मंडल (BSM) का कार्य इसी व्यापक सभ्यतागत मिशन की एक कड़ी है।
सम्मेलन का संदर्भ
डॉ. भागवत बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में 26 से 28 जून तक आयोजित भारतीय शिक्षण मंडल के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'ऑपरेशनलाइजिंग NEP-2020 : इंटीग्रेटिंग इंडियन नॉलेज सिस्टम्स' के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का उद्घाटन कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने किया था।
भारतीय दृष्टि की विशिष्टता
डॉ. भागवत ने कहा कि वर्तमान वैश्विक विचारधाराएँ जीवन और समाज के केवल आंशिक पक्षों को रेखांकित करती हैं, जबकि भारतीय दृष्टि जीवन को उसकी संपूर्णता में देखती है। उनके शब्दों में, "विश्व कल्याण के लिए भारत की इस पूर्ण दृष्टि को दुनिया तक पहुँचाना आवश्यक है। हमारा कार्य वास्तव में विश्व को पूर्णता देना है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय दृष्टिकोण अन्य विचारों को खारिज नहीं करता, बल्कि 'अनेकता' के सिद्धांत के तहत शास्त्रार्थ और संवाद के माध्यम से सत्य के सार को ग्रहण करने की परंपरा पर आधारित है।
शिक्षा और मानव विकास
सरसंघचालक ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल का उद्देश्य केवल रोज़गारपरक शिक्षा तक सीमित नहीं है। यह मनुष्य के समग्र विकास की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें शिक्षा को आर्थिक दृष्टि के साथ-साथ मानवीय, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि संगठन भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने का प्रयास कर रहा है जो व्यक्ति और समाज दोनों के सर्वांगीण विकास का मार्ग खोले।
राजनीतिक तटस्थता पर ज़ोर
डॉ. भागवत ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारतीय शिक्षण मंडल स्वयं को सभी राजनीतिक दलों और उनकी आवश्यकताओं से अलग रखकर कार्य करता है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी ऐसे रचनात्मक कार्यों को राजनीतिक संगठनों से पृथक रखा था, क्योंकि राजनीतिक दलों के साथ रहते हुए यह कार्य प्रभावी ढंग से नहीं किया जा सकता।
नई वेबसाइट और सम्मेलन में भागीदारी
समापन समारोह में डॉ. भागवत ने भारतीय शिक्षण मंडल की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया, जिससे भारतीय शिक्षा की अवधारणा और संगठन की गतिविधियाँ देश-विदेश के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेंगी। इस अवसर पर BSM के अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद जोशी, अखिल भारतीय महासचिव डॉ. भरतशरण सिंह सहित देशभर से आए लगभग 380 शिक्षाविद्, शिक्षक, शोधकर्ता और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। आगे यह देखना होगा कि BSM की वेबसाइट और सम्मेलन के निष्कर्ष NEP-2020 के ज़मीनी क्रियान्वयन में कितना योगदान दे पाते हैं।