भव्य योजना: ₹33,660 करोड़ से 100 औद्योगिक पार्क, नई पीढ़ी की इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के तहत ₹33,660 करोड़ की केंद्रीय क्षेत्र योजना के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसका उद्देश्य देश में नई पीढ़ी की विश्वस्तरीय औद्योगिक अवसंरचना खड़ी करना है। इस योजना के अंतर्गत 100 औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिनमें से पहले चरण में 50 प्रस्तावों का चयन किया जाएगा। उद्योग जगत ने इसे विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और रोज़गार सृजन की दिशा में एक साहसिक कदम बताया है।
योजना की मुख्य संरचना
भव्य योजना पुराने आपूर्ति-आधारित औद्योगिक विकास मॉडल से हटकर माँग-आधारित और प्रतिस्पर्धी व्यवस्था को केंद्र में रखती है। उन राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी जो औद्योगिक क्षमता, भूमि उपलब्धता, निवेशकों की रुचि और क्षेत्रीय विशेषताओं के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करेंगे। इस प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया का संचालन एक पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए होगा।
योजना के तहत विकसित होने वाले औद्योगिक पार्कों में पहले से स्वीकृत भूमि, तैयार अवसंरचना और एकीकृत सेवाएँ उपलब्ध होंगी — यानी निवेशकों के लिए प्लग-एंड-प्ले मॉडल। इससे विनिर्माण इकाइयों की स्थापना में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से कम होने की उम्मीद है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के अध्यक्ष पंकज मोहिंदरू ने कहा कि राज्यों द्वारा संचालित प्रतिस्पर्धी मॉडल और पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विश्वस्तरीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किए जा सकेंगे, जिनमें आधुनिक अवसंरचना, बेहतर संपर्क व्यवस्था और निवेशकों के लिए अनुकूल प्रक्रियाएँ होंगी।
मोहिंदरू ने कहा, 'यह योजना भारत को घरेलू और वैश्विक निवेश के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।'
वैश्विक संदर्भ और भारत की स्थिति
दुनिया के कई देशों में प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क सफल विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ बन चुके हैं। आलोचकों का कहना है कि भारत अब तक इस क्षेत्र में वैश्विक मानकों से पीछे रहा है। भव्य योजना इसी संरचनात्मक कमज़ोरी को दूर करने का प्रयास है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में पुनर्गठन हो रहा है और कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ चीन से बाहर विकल्प तलाश रही हैं — भारत के लिए यह एक रणनीतिक अवसर है।
लॉजिस्टिक्स और आर्थिक असर
कोलियर्स इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नादर के अनुसार, इन औद्योगिक पार्कों के आसपास वेयरहाउसिंग की माँग में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। नादर ने कहा कि यह योजना नए विनिर्माण केंद्रों के उदय को बढ़ावा देगी, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति शृंखलाओं को मज़बूती देगी तथा देश भर में संतुलित आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि भव्य योजना केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं है — यह राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित कर औद्योगिक नीति-निर्माण में एक नया अध्याय लिख सकती है। आने वाले महीनों में 50 प्रस्तावों के चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस योजना की वास्तविक दिशा स्पष्ट होगी।