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'भव्य' योजना: देशभर में 100 विश्वस्तरीय इंडस्ट्रियल पार्क, ₹33,660 करोड़ का प्रावधान

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'भव्य' योजना: देशभर में 100 विश्वस्तरीय इंडस्ट्रियल पार्क, ₹33,660 करोड़ का प्रावधान

सारांश

केंद्र सरकार की 'भव्य' योजना महज एक नीतिगत दस्तावेज़ नहीं — यह ₹33,660 करोड़ की प्रतिबद्धता है। छह वर्षों में 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क, प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर और एसपीवी-आधारित जवाबदेही के साथ यह भारत की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 'भव्य' योजना के लिए 23 मई 2026 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।
2026-27 से 2031-32 तक छह वर्षों में देशभर में 100 औद्योगिक पार्क विकसित करने का लक्ष्य; वित्तीय प्रावधान ₹33,660 करोड़ ।
पहले चरण में 50 पार्क चुनौती-आधारित प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से चुने जाएंगे।
गैर-पहाड़ी राज्यों में न्यूनतम 100 एकड़ , पहाड़ी व पूर्वोत्तर राज्यों में 25 एकड़ भूमि अनिवार्य।
परियोजनाएँ कंपनी अधिनियम 2013 के तहत गठित SPV के माध्यम से क्रियान्वित होंगी।
योजना को मेक इन इंडिया और पीएम गति शक्ति से जोड़ा जाएगा।

केंद्र सरकार ने 23 मई 2026 को अपनी महत्वाकांक्षी 'भव्य' योजना के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए, जिसके तहत 2026-27 से 2031-32 तक छह वर्षों में देशभर में 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इस योजना के लिए ₹33,660 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है और इसे भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।

योजना का ढाँचा और चरणबद्ध क्रियान्वयन

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, योजना के पहले चरण में 50 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनका चयन चुनौती-आधारित प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से होगा। दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि ग्रीनफील्ड और पात्र ब्राउनफील्ड — दोनों प्रकार के औद्योगिक पार्क इस योजना के अंतर्गत विकसित किए जा सकेंगे।

भूमि के लिए न्यूनतम सीमा भी तय की गई है। गैर-पहाड़ी राज्यों में कम से कम 100 एकड़ भूमि अनिवार्य होगी, जबकि पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों में यह सीमा 25 एकड़ रखी गई है। 1,000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार किया जा सकेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएँ

योजना के अंतर्गत विकसित होने वाले औद्योगिक पार्कों में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, विश्वसनीय बिजली और जल आपूर्ति, श्रमिकों के लिए सहायक सुविधाएँ, डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम और टिकाऊ विकास संबंधी ढाँचा शामिल होगा। यह ढाँचा निवेशकों को 'निवेश-तैयार' वातावरण उपलब्ध कराने की मंशा से तैयार किया गया है।

गौरतलब है कि यह योजना मेक इन इंडिया, पीएम गति शक्ति और सरकार के वैश्विक विनिर्माण केंद्र विजन के अनुरूप तैयार की गई है, जिससे नीतिगत तालमेल सुनिश्चित किया जा सके।

एसपीवी के ज़रिए क्रियान्वयन

इन परियोजनाओं को कंपनी अधिनियम 2013 के तहत गठित विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से लागू किया जाएगा। यही एसपीवी परियोजनाओं की योजना, संचालन, प्रबंधन, निवेशकों को सुविधा देने और दीर्घकालिक रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह संरचना परियोजना की जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

अन्य योजनाओं से समन्वय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि 'भव्य' योजना को लॉजिस्टिक्स, स्किल डेवलपमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा और औद्योगिक विकास से जुड़ी केंद्र एवं राज्य सरकारों की अन्य योजनाओं के साथ एकीकृत किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के विकल्प के रूप में उभरने का प्रयास कर रहा है और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में निवेश के अवसर तलाश रही हैं।

आगे की राह

पहले चरण के 50 पार्कों के लिए चयन प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सफलता राज्यों के साथ समन्वय, भूमि अधिग्रहण की गति और एसपीवी के कुशल प्रबंधन पर निर्भर करेगी। यदि क्रियान्वयन समयसीमा के भीतर हुआ, तो यह भारत के मैन्युफैक्चरिंग परिदृश्य को गुणात्मक रूप से बदलने की क्षमता रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा राज्यों की भूमि उपलब्धता और एसपीवी की क्षमता में होगी — दोनों ही भारत के पिछले औद्योगिक पार्क प्रयोगों में अड़चन रहे हैं। ₹33,660 करोड़ का प्रावधान छह वर्षों में 100 पार्कों के लिए औसतन ₹336 करोड़ प्रति पार्क बनता है, जो विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पर्याप्त है या नहीं — यह क्षेत्र और पैमाने पर निर्भर करेगा। चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया पारदर्शिता का संकेत देती है, परंतु बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र के यह भी पिछली योजनाओं की तरह कागज़ी लक्ष्यों तक सिमट सकती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'भव्य' योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'भव्य' योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक पहल है, जिसके तहत 2026-27 से 2031-32 के बीच देशभर में 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना और निवेश के लिए तैयार आधुनिक बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराना है।
'भव्य' योजना के लिए कितना बजट रखा गया है?
योजना के लिए ₹33,660 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है, जो छह वर्षों में 100 औद्योगिक पार्कों के विकास पर खर्च होगा। पहले चरण में 50 पार्क विकसित किए जाएंगे।
औद्योगिक पार्कों के लिए भूमि की न्यूनतम सीमा क्या है?
गैर-पहाड़ी राज्यों में कम से कम 100 एकड़ भूमि अनिवार्य है, जबकि पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों में यह सीमा 25 एकड़ रखी गई है। 1,000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार किया जा सकेगा।
इन औद्योगिक पार्कों में कौन-सी सुविधाएँ होंगी?
योजना के तहत पार्कों में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, विश्वसनीय बिजली-पानी आपूर्ति, श्रमिकों के लिए सहायक सुविधाएँ, डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम और टिकाऊ विकास संबंधी ढाँचा शामिल होगा।
परियोजनाओं का प्रबंधन कैसे होगा?
परियोजनाओं को कंपनी अधिनियम 2013 के तहत गठित विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा। यही SPV योजना, संचालन, प्रबंधन, निवेशकों को सुविधा और दीर्घकालिक रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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