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भव्य योजना: ₹33,660 करोड़ से 6 वर्षों में 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क, DPIIT ने जारी किए दिशानिर्देश

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भव्य योजना: ₹33,660 करोड़ से 6 वर्षों में 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क, DPIIT ने जारी किए दिशानिर्देश

सारांश

भव्य योजना महज़ एक बुनियादी ढाँचा कार्यक्रम नहीं — यह भारत की वैश्विक विनिर्माण महत्वाकांक्षा का ब्लूप्रिंट है। ₹33,660 करोड़ और 100 पार्कों के साथ, DPIIT ने छह साल में वह करने का लक्ष्य रखा है जो दशकों में नहीं हो सका। असली परीक्षा अब SPV के क्रियान्वयन और राज्यों की तैयारी की है।

मुख्य बातें

DPIIT ने 24 मई 2025 को भव्य योजना के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए।
कुल ₹33,660 करोड़ की लागत से 2026-27 से 2031-32 के बीच 100 औद्योगिक पार्क विकसित होंगे।
पहले चरण में प्रतियोगिता-आधारित चयन से अधिकतम 50 पार्क चुने जाएंगे।
गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम भूमि 100 एकड़ ; पहाड़ी/पूर्वोत्तर/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 25 एकड़ ।
NICDC को परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) नामित किया गया; SPV के ज़रिए क्रियान्वयन होगा।
GIS-आधारित निगरानी और DPIIT सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संचालन समिति का प्रावधान।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 24 मई 2025 को भव्य योजना के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए — यह एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसके तहत 2026-27 से 2031-32 तक ₹33,660 करोड़ की लागत से देशभर में 100 निवेश-तैयार औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। यह योजना 'मेक इन इंडिया' और 'पीएम गति शक्ति' के व्यापक ढाँचे के अनुरूप भारत को वैश्विक विनिर्माण गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक संरचित प्रयास है।

योजना की मुख्य संरचना

कुल छह वर्षीय कार्यकाल में 100 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। पहले चरण में प्रतियोगिता-आधारित चयन प्रक्रिया के ज़रिए अधिकतम 50 पार्कों का चुनाव किया जाएगा। भूमि की न्यूनतम सीमा गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए 100 एकड़ और पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों तथा छोटे राज्यों के लिए 25 एकड़ निर्धारित की गई है। योजना में 1000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार का प्रावधान है।

ग्रीनफील्ड के साथ-साथ पात्र ब्राउनफील्ड पार्कों को भी इस योजना में शामिल किया गया है, जो मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन का अवसर देता है।

बुनियादी ढाँचे के मानक

दिशानिर्देशों में 'प्लग-एंड-प्ले' अवसंरचना का विशेष उल्लेख है — जिसमें भूमिगत उपयोगिता प्रणालियाँ, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना, श्रमिक आवास, परीक्षण प्रयोगशालाएँ, डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम और कौशल विकास सुविधाएँ शामिल हैं। बहुआयामी लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और सतत विकास सुविधाएँ भी अनिवार्य घटकों में रखी गई हैं।

चयन और वित्तपोषण तंत्र

प्रस्तावों का मूल्यांकन चुनौती-आधारित ढाँचे के तहत होगा, जिसमें बहुआयामी कनेक्टिविटी, स्थल उपयुक्तता, बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता, डिजिटल शासन की तैयारी और दीर्घकालिक स्थिरता जैसे वस्तुनिष्ठ मापदंड शामिल हैं। वित्तीय सहायता इक्विटी अंशदान के रूप में दी जाएगी, जो एसपीवी को हस्तांतरित भूमि के मूल्य और निर्धारित परियोजना लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़ी होगी।

परियोजनाओं का क्रियान्वयन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गठित विशेष प्रयोजन वाहनों (SPV) के माध्यम से होगा। ये SPV परियोजना नियोजन, विकास, संचालन, निवेशक सुविधा और दीर्घकालिक रखरखाव के लिए जवाबदेह होंगे।

निगरानी और शासन व्यवस्था

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) को परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) के रूप में नामित किया गया है। पारदर्शिता के लिए GIS-आधारित निगरानी प्रणाली, आवधिक प्रगति रिपोर्टिंग, लेखापरीक्षा तंत्र और DPIIT सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति का प्रावधान है। निजी डेवलपर्स की भागीदारी के लिए भी स्पष्ट शासन ढाँचे और जवाबदेही तंत्र परिभाषित किए गए हैं।

व्यापक औद्योगिक प्रभाव

यह योजना ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है। दिशानिर्देशों में रसद, कौशल विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और केंद्र-राज्य सरकार की अन्य पहलों के साथ समन्वय का प्रावधान है। आलोचकों का कहना है कि योजना की सफलता राज्यों की भूमि उपलब्धता और SPV के प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगी। क्रियान्वयन की गति ही तय करेगी कि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने में कितना कारगर साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत में औद्योगिक पार्क योजनाओं का इतिहास क्रियान्वयन की खाई से भरा पड़ा है — घोषणाएँ बड़ी, ज़मीनी नतीजे सीमित। SPV-आधारित मॉडल और चुनौती-आधारित चयन सही दिशा में कदम हैं, पर राज्यों की भूमि उपलब्धता और नौकरशाही की गति सबसे बड़ी बाधाएँ बनी रहेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब चीन+1 रणनीति के तहत वैश्विक निवेशक विकल्प तलाश रहे हैं — यदि पहले 50 पार्क समयसीमा में तैयार हुए, तो यह योजना गेम-चेंजर बन सकती है; अन्यथा यह भी उन महत्वाकांक्षी घोषणाओं की सूची में जुड़ जाएगी जो कागज़ पर ही रह गईं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भव्य योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
भव्य योजना भारत सरकार की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसके तहत 2026-27 से 2031-32 के बीच ₹33,660 करोड़ की लागत से 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण गंतव्य के रूप में स्थापित करना और घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करना है।
भव्य योजना के तहत औद्योगिक पार्कों का चयन कैसे होगा?
पार्कों का चयन चुनौती-आधारित (Challenge-Based) प्रतियोगिता प्रक्रिया से होगा, जिसमें बहुआयामी कनेक्टिविटी, स्थल उपयुक्तता, बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता, डिजिटल शासन और दीर्घकालिक स्थिरता जैसे मापदंडों पर मूल्यांकन किया जाएगा। पहले चरण में अधिकतम 50 पार्क चुने जाएंगे।
भव्य योजना में भूमि की न्यूनतम आवश्यकता क्या है?
गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम 100 एकड़ और पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों तथा छोटे राज्यों के लिए 25 एकड़ भूमि अनिवार्य है। योजना में 1000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार का प्रावधान है।
भव्य योजना का क्रियान्वयन कौन करेगा और निगरानी कैसे होगी?
NICDC को परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA) नामित किया गया है और परियोजनाएँ SPV के माध्यम से लागू होंगी। GIS-आधारित निगरानी, आवधिक ऑडिट और DPIIT सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संचालन समिति पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
भव्य योजना से आम नागरिकों और उद्योगों को क्या फायदा होगा?
योजना के तहत रोज़गार सृजन, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत का एकीकरण और घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूती मिलने की उम्मीद है। प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढाँचा और डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम निवेशकों के लिए कारोबार शुरू करना आसान बनाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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