22 सितंबर 2026
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भोपाल में अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई: तरावली गांव से 12 भट्टी, 200 लीटर कच्ची शराब जब्त

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भोपाल में अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई: तरावली गांव से 12 भट्टी, 200 लीटर कच्ची शराब जब्त

सारांश

सागर जिले के जहरीले शराब हादसे के बाद मध्य प्रदेश में अभियान तेज हुआ। भोपाल के तरावली गांव में पुलिस और आबकारी दस्ते ने 12 भट्टी, दो बॉयलर और 200 लीटर से अधिक कच्ची शराब जब्त की। ₹10 में प्लास्टिक पन्नी में बिकने वाली यह शराब गरीब तबके तक आसानी से पहुँच रही थी।

मुख्य बातें

भोपाल के तरावली गांव में 22 सितंबर 2026 को पुलिस और आबकारी विभाग ने संयुक्त छापेमारी की।
मौके से 12 भट्टी , दो बॉयलर , कई ड्रम और 200 लीटर से अधिक कच्ची शराब जब्त की गई।
शराब को प्लास्टिक की पन्नी में पैक कर ₹10 और ₹20 में बेचा जाता था।
जमीन में बनी भट्टियों को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।
यह कार्रवाई सागर जिले के बंडा में हुए जहरीले शराब कांड और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद तेज हुई।

सागर जिले के जहरीले शराब कांड के बाद मध्य प्रदेश पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में भोपाल के तरावली गांव से 12 भट्टी, दो बॉयलर और 200 लीटर से अधिक कच्ची शराब जब्त की गई है। 22 सितंबर 2026 को हुई इस छापेमारी में जंगली इलाके में चल रहे अवैध शराब निर्माण के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ और यह भी खुलासा हुआ कि यहाँ बनी शराब मात्र ₹10 और ₹20 में प्लास्टिक की पन्नी में पैक करके बेची जाती थी।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस और आबकारी दस्ते ने जब तरावली गांव के जंगली इलाके में दबिश दी, तो मौके पर भगदड़ मच गई। छापामारी दल ने वहाँ से 12 भट्टियाँ, दो बॉयलर और कई ड्रम बरामद किए — जिनमें से कुछ खाली थे और कुछ में शराब भरी हुई थी। जमीन के अंदर बनाई गई भट्टियों को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।

इसके अलावा बड़ी मात्रा में लाहन — जो कच्ची शराब बनाने में कच्चे माल के रूप में उपयोग होता है — भी जब्त किया गया। अधिकारियों के अनुसार यहाँ तैयार शराब को प्लास्टिक की पन्नियों में सील करके बेहद कम कीमत पर बेचा जाता था, जिससे इसकी पहुँच बेहद व्यापक थी।

सागर कांड की पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब से कई लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए और राज्यभर में अवैध शराब के विरुद्ध अभियान चलाने के निर्देश जारी किए थे।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अवैध शराब निर्माण का कारोबार लंबे समय से सक्रिय है। कुछ-कुछ समय के अंतराल पर ऐसी घटनाएँ सामने आती रहती हैं जिनमें जानें तक जाती हैं — और हर बार कार्रवाई के बाद भी यह नेटवर्क फिर सक्रिय हो जाता है।

शराब बेचने का तरीका उजागर

जाँच में सामने आया कि तरावली में बनने वाली कच्ची शराब को प्लास्टिक की पन्नी में पैक करके मात्र ₹10 और ₹20 प्रति पन्नी की दर से बेचा जाता था। यह सस्ती कीमत इस शराब को गरीब तबके तक आसानी से पहुँचाने का ज़रिया बनती थी, जो स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत खतरनाक है।

विशेषज्ञों के अनुसार इतनी कम कीमत पर बिकने वाली कच्ची शराब में अक्सर जहरीले रसायन — जैसे मेथेनॉल — मिले होते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं।

आगे की कार्रवाई

आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जब्त सामग्री को सुरक्षित कर लिया गया है और आगे की जाँच जारी है। मध्य प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार राज्यभर में ऐसी छापेमारी का सिलसिला जारी रहेगा। प्रशासन का कहना है कि अवैध शराब के नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए ग्रामीण और जंगली इलाकों में भी विशेष अभियान चलाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऊपर से आदेश आते हैं, कार्रवाई होती है, और फिर कुछ समय बाद सब पहले जैसा। मध्य प्रदेश में अवैध शराब नेटवर्क की असली ताकत उसकी कीमत में है — ₹10 की पन्नी जब तक उपलब्ध है, माँग बनी रहेगी। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार सिर्फ भट्टियाँ तोड़ने से आगे जाकर आपूर्ति शृंखला में शामिल सरगनाओं और भ्रष्ट तंत्र पर कार्रवाई करेगी — या यह अभियान भी अगले हादसे तक ठंडा पड़ जाएगा।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल के तरावली गांव में क्या कार्रवाई हुई?
22 सितंबर 2026 को पुलिस और आबकारी विभाग के संयुक्त दस्ते ने तरावली गांव के जंगली इलाके में छापा मारकर 12 भट्टी, दो बॉयलर और 200 लीटर से अधिक कच्ची शराब जब्त की। जमीन में बनाई गई भट्टियों को मौके पर नष्ट कर दिया गया।
यह कार्रवाई किस कारण से शुरू हुई?
सागर जिले के बंडा में हुए जहरीले शराब कांड के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों पर कार्रवाई की और राज्यभर में अवैध शराब के विरुद्ध अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्हीं निर्देशों के बाद भोपाल में यह छापेमारी की गई।
तरावली में बनी शराब कैसे बेची जाती थी?
जाँच में सामने आया कि यहाँ बनी कच्ची शराब को प्लास्टिक की पन्नी में पैक करके मात्र ₹10 और ₹20 में बेचा जाता था। यह सस्ती कीमत इसे गरीब तबके तक आसानी से पहुँचाती थी।
अवैध कच्ची शराब इतनी खतरनाक क्यों होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार कच्ची शराब में अक्सर मेथेनॉल जैसे जहरीले रसायन मिले होते हैं, जो सेवन करने पर अंधेपन या मौत का कारण बन सकते हैं। सागर के बंडा कांड में भी ऐसी ही जहरीली शराब से कई लोगों की जान गई थी।
मध्य प्रदेश में अब आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार राज्यभर में ग्रामीण और जंगली इलाकों में विशेष छापेमारी अभियान जारी रहेगा। जब्त सामग्री की जाँच की जा रही है और मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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