पटना में पीएचडी धारकों का लोकभवन मार्च रोका, आर-ब्लॉक पर वाटर कैनन तैनात; 18 दिन से आमरण अनशन जारी
सारांश
मुख्य बातें
पटना में 22 अगस्त 2026 को ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के बैनर तले सैकड़ों पीएचडी डिग्रीधारकों और शोधार्थियों ने लोकभवन की ओर मार्च किया, जिसे पुलिस ने आर-ब्लॉक पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। उच्च शिक्षा में रोज़गार, अतिथि शिक्षकों की समस्याओं और पीएचडी शोधार्थियों के अकादमिक भविष्य को लेकर यह आंदोलन पिछले 18 दिनों से जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी गर्दनीबाग से तिरंगा लेकर निकले और वीर कुंवर सिंह पार्क होते हुए लोकभवन की ओर बढ़ने लगे। पुलिस पहले से ही आर-ब्लॉक पर मुस्तैद थी और बैरिकेडिंग के ज़रिये मार्च को वहीं रोक दिया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारी बैरिकेड पर चढ़कर नारेबाज़ी करने लगे।
स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन सहित व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए थे। प्रदर्शनकारियों के सड़क पर डटे रहने के कारण आर-ब्लॉक के आसपास कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा, हालाँकि पुलिस के अनुसार दक्षिणी फ्लैंक से वाहनों की आवाजाही बाधित नहीं हुई।
पुलिस की प्रतिक्रिया
पटना के एसपी (लॉ एंड ऑर्डर) कृष्ण मुरारी प्रसाद ने बताया कि आंदोलन में मुख्य रूप से अतिथि शिक्षक, पीएचडी धारक और शोध के अंतिम चरण में पहुँचे छात्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आर-ब्लॉक से आगे का क्षेत्र संवेदनशील है — जहाँ उच्च न्यायालय, आयकर कार्यालय और वीरचंद पटेल पथ जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान स्थित हैं — इसलिए प्रदर्शनकारियों को वहीं रोकना आवश्यक था।
एसपी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के ज़रिये मुख्यमंत्री कार्यालय में ज्ञापन सौंपने का अवसर दिया गया। दंडाधिकारी के माध्यम से इस प्रतिनिधिमंडल को वहाँ भेजने की व्यवस्था की गई। पुलिस ने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन समाप्त करने की अपील भी की।
आंदोलन का नेतृत्व और माँगें
आंदोलन का नेतृत्व कुमुद पटेल कर रहे हैं, जो 17 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगें हैं — उच्च शिक्षा में रोज़गार के अवसरों का विस्तार, अतिथि शिक्षकों की समस्याओं का स्थायी समाधान, और पीएचडी धारकों तथा शोधार्थियों के अकादमिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार की ओर से ठोस नीतिगत कदम।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में उच्च शिक्षा संस्थानों में नियमित शिक्षकों के हज़ारों पद रिक्त पड़े हैं और अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति दीर्घकालिक नीति के अभाव में अनिश्चितता में है।
आम जनता पर असर
प्रदर्शन के कारण आर-ब्लॉक और उससे सटे इलाकों में घंटों यातायात जाम रहा, जिससे आम नागरिकों को असुविधा हुई। पुलिस के अनुसार अब तक प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार नहीं किया और आंदोलन शांतिपूर्ण रहा।
क्या होगा आगे
पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक ठोस आश्वासन नहीं मिलता, आमरण अनशन और आंदोलन जारी रहेगा।