बिहार कैबिनेट ने रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को दी मंजूरी, 27 एजेंडों पर लगी मुहर
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने 27 मई 2026 को बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को लागू करने की स्वीकृति दे दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में पटना में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 27 महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगाई गई, जिनमें स्वास्थ्य, रोजगार, न्यायपालिका और भूमि प्रबंधन से जुड़े अहम फैसले शामिल हैं। यह बैठक बिहार के प्रशासनिक और सामाजिक ढाँचे में व्यापक बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
रैयती भूमि क्रय नीति: मुख्य प्रावधान
कैबिनेट ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 के गठन को औपचारिक स्वीकृति दी। यह नीति राज्य में भूमि अधिग्रहण और क्रय की प्रक्रिया को नियमित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसके साथ ही बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त संशोधन नियमावली 2026 को भी मंजूरी दी गई, जो भूमि रिकॉर्ड के सर्वेक्षण और प्रबंधन को अद्यतन करेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े फैसले
पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के हड्डी रोग विभाग के अंतर्गत स्वतंत्र स्पाइन सब-स्पेशियलिटी यूनिट स्थापित करने के लिए 39 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई। इससे रीढ़ की हड्डी से जुड़े जटिल उपचार राज्य में ही उपलब्ध हो सकेंगे।
इसके अलावा बिहार चिकित्सा शिक्षा सेवा भर्ती, नियुक्ति एवं प्रोन्नति (द्वितीय संशोधन) नियमावली 2026 को भी स्वीकृति दी गई। सरकार के अनुसार इससे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर की कमी दूर होगी तथा चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
विधायकों और सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा
कैबिनेट ने बिहार विधान मंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्यों तथा उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह सुविधा अखिल भारतीय सेवा के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों, राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों, पेंशनधारियों और उनके आश्रितों तक भी विस्तारित होगी — बिहार सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत।
रोजगार और कौशल विकास: नए पदों का सृजन
युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के अंतर्गत विशेष नियोजन निदेशालय के छह नए प्रशाखाओं के लिए 57 पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई। साथ ही पूर्व से गठित 'छात्र एवं युवा कल्याण निदेशालय' के छह नए प्रशाखाओं के लिए पूर्व से स्वीकृत सात पदों को प्रत्यार्पित करते हुए 55 पदों के सृजन की मंजूरी भी प्रदान की गई।
न्यायपालिका विस्तार: मधुबनी और दरभंगा में नए न्यायालय
बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 के तहत मधुबनी (सदर) न्यायमंडल में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश का एक अतिरिक्त न्यायालय तथा दरभंगा न्यायमंडल के अधीन बेनीपुर अनुमंडलीय न्यायालय में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश का एक न्यायालय स्थापित करने के लिए कुल दो पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई। यह कदम मद्य निषेध से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से इन न्यायालयों पर मुकदमों का दबाव लगातार बढ़ा है।