19 अगस्त 2026
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राम मंदिर चंदा घोटाले पर रोहित पवार का BJP पर हमला: 'ना खाएंगे, ना खाने देंगे' का वादा खोखला निकला

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राम मंदिर चंदा घोटाले पर रोहित पवार का BJP पर हमला: 'ना खाएंगे, ना खाने देंगे' का वादा खोखला निकला

सारांश

एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने BJP के 'ना खाऊंगा' नारे को कोरा वादा बताते हुए राम मंदिर चंदे में ₹1,500 करोड़ के कथित घोटाले और SIT द्वारा क्लीनचिट देने पर सवाल उठाए। साथ ही महाराष्ट्र में 'रूल ऑफ बिजनेस' बदलाव को सत्ता केंद्रीकरण की कोशिश करार दिया।

मुख्य बातें

एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने 19 अगस्त को मुंबई में BJP पर भ्रष्टाचार के मोर्चे पर तीखा हमला बोला।
स्थानीय लोगों के हवाले से राम मंदिर चंदे में कथित तौर पर ₹1,500 करोड़ के घोटाले का आरोप।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT ने जांच के बाद समिति सदस्यों को क्लीनचिट दी — पवार ने इस पर सवाल उठाए।
पवार ने महाराष्ट्र में 'रूल ऑफ बिजनेस' बदलाव को सत्ता पर नियंत्रण की कोशिश बताया।
BJP पर 2029 चुनावों को ध्यान में रखकर राजनीतिक परिदृश्य को अनुकूल बनाने का आरोप।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने बुधवार, 19 अगस्त को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भ्रष्टाचार के मोर्चे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राम मंदिर चंदा विवाद को केंद्र में रखते हुए कहा कि BJP का 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' का नारा महज एक राजनीतिक छलावा साबित हुआ है।

'ना खाएंगे' का नारा और ज़मीनी हकीकत

2014 में सत्ता में आने से पहले BJP ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़े रुख का संदेश देते हुए यह नारा बुलंद किया था। रोहित पवार ने कहा कि इस नारे के ज़रिए पार्टी ने आम जनता को यह भरोसा दिलाया था कि वह किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगी। लेकिन उनके अनुसार, कई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

राम मंदिर चंदा विवाद: ₹1,500 करोड़ के घोटाले का आरोप

रोहित पवार ने कहा कि देश की जनता ने सैकड़ों वर्षों के संघर्ष के बाद चंदा एकत्रित कर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का सपना साकार किया था। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों के अनुसार इस चंदे में करीब ₹1,500 करोड़ का घोटाला हुआ है। यह आरोप उन्होंने स्थानीय लोगों के हवाले से लगाए, जिसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर समिति में BJP के विचारों के अनुरूप काम करने वाले लोग शामिल थे। जब मामला सार्वजनिक हुआ, तो समिति के सदस्यों को पहले निलंबित किया गया और फिर इस्तीफा देना पड़ा।

SIT जांच और क्लीनचिट पर सवाल

पवार ने बताया कि इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के बाद समिति के सदस्यों को क्लीनचिट दे दी गई। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया एक ऐसे तंत्र की ओर इशारा करती है जहाँ जाँच करने वाले और जाँच के दायरे में आने वाले एक ही विचारधारा के होते हैं।

महाराष्ट्र में 'रूल ऑफ बिजनेस' बदलाव पर चिंता

रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'रूल ऑफ बिजनेस' में किए गए बदलाव पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, पहले मंत्री अपने स्तर पर फाइलों और नियमों में बदलाव कर सकते थे, लेकिन नए बदलाव के बाद जो चीजें पहले अनाधिकारिक थीं, उन्हें आधिकारिक दर्जा दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब यह देखना होगा कि एकनाथ शिंदे के निर्णयों पर मुख्यमंत्री की ओर से कोई हस्तक्षेप होता है या नहीं।

2029 चुनाव और BJP की रणनीति पर आरोप

पवार ने आरोप लगाया कि BJP ने स्पेशल इंटेलिजेंस रिपोर्ट (SIR) के माध्यम से राजनीतिक स्थिति को अपने पक्ष में करने की कोशिश की और कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के वोट काटने का काम किया। उन्होंने कहा कि BJP अब 2029 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर पूरे राजनीतिक परिदृश्य को अनुकूल बनाने में जुटी है। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता इन सब मुद्दों पर अपना फैसला सुनाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह मुद्दा BJP की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान के केंद्र से जुड़ा है। SIT द्वारा क्लीनचिट देना और फिर विपक्ष का उस पर सवाल उठाना — यह उस पुरानी बहस को फिर जीवित करता है कि क्या सरकार-नियुक्त जांच एजेंसियाँ स्वतंत्र रूप से काम कर सकती हैं। महाराष्ट्र में 'रूल ऑफ बिजनेस' बदलाव पर पवार की चिंता को महज राजनीतिक बयानबाजी मानकर नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं होगा — प्रशासनिक नियमों में बदलाव के दीर्घकालिक निहितार्थ होते हैं जिन पर गहरी नज़र रखना ज़रूरी है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहित पवार ने राम मंदिर चंदा घोटाले में कितने रुपये के घपले का आरोप लगाया?
रोहित पवार ने स्थानीय लोगों के हवाले से कथित तौर पर राम मंदिर चंदे में करीब ₹1,500 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया। यह दावा स्थानीय लोगों का है और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
BJP का 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' नारा क्या था?
यह नारा BJP ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपने कड़े रुख को दर्शाने के लिए दिया था। रोहित पवार का आरोप है कि इस नारे के बावजूद कई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के मामलों में कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
राम मंदिर चंदा विवाद में SIT ने क्या किया?
उत्तर प्रदेश सरकार ने विवाद के बाद मामले की जांच के लिए SIT गठित की। रोहित पवार के अनुसार, जांच के बाद समिति के सदस्यों को क्लीनचिट दे दी गई, जिस पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र में 'रूल ऑफ बिजनेस' में क्या बदलाव हुआ?
रोहित पवार के अनुसार, पहले मंत्री अपने स्तर पर फाइलों और नियमों में बदलाव कर सकते थे। नए बदलाव के तहत जो चीजें पहले अनाधिकारिक थीं, उन्हें आधिकारिक दर्जा दे दिया गया है। उनका कहना है कि इससे सत्ता केंद्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
रोहित पवार ने UP चुनाव को लेकर क्या कहा?
रोहित पवार ने कहा कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता BJP को इन सब मुद्दों पर माकूल जवाब देगी। उन्होंने कहा कि अगर BJP को लगता है कि वह अपनी 'धूर्तता' से लोगों को भ्रमित करने में सफल रहेगी, तो यह उसकी गलतफहमी है।
राष्ट्र प्रेस
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