कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना का बड़ा बयान: भाजपा ने धर्म को व्यापार समझा
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मेरठ में रविवार को भगवान परशुराम की यात्रा के दौरान एक युवक द्वारा फरसा लहराने पर कार्रवाई की चेतावनी देने वाली डीएसपी सुचिता सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। इस घटना से ब्राह्मण संगठनों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। वहीं, कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है।
कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि परशुराम, जिनके सनातन धर्म में करोड़ों श्रद्धालु हैं, केवल भगवान विष्णु के छठे अवतार नहीं हैं, बल्कि वे त्याग, तपस्या और दृढ़ इच्छाशक्ति के प्रतीक भी माने जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पर आस्था के नाम पर भावनाओं से खेलने का आरोप हमेशा से लगता रहा है। चुनाव के समय वे हर धर्म, जाति और समुदाय से वोट मांगते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली घटनाओं से इन समुदायों के प्रति सम्मान पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने कहा कि चाहे प्रयागराज में धार्मिक हस्तियों का अपमान हो, या युवा श्रद्धालुओं के बाल खींचने जैसी हरकतें हों, या वर्तमान में विशेष समुदायों को लक्षित कर बनाई जा रही फिल्में हों, यह प्रश्न उठता है कि ऐसा माहौल कौन बना रहा है?...
उन्होंने यह भी कहा कि क्यों इस तरह की भावनाओं को उकसाया जा रहा है और ऐसा करने वाले लोगों को संरक्षण कौन दे रहा है। स्पष्ट है कि ये घटनाएं कहीं न कहीं सरकार की सहानुभूति के कारण हो रही हैं। राजनीति को धर्म और जाति से अलग रखा जाना चाहिए, विशेषकर धर्म से। भाजपा ने हमेशा धर्म को व्यापार की तरह देखा है जबकि कांग्रेस ने धर्म को धर्म की तरह। मेरठ में जो भी हुआ, वह गलत है।
ज्ञात हो कि मेरठ में रविवार को धूमधाम से भव्य शौर्य यात्रा निकाली गई थी। इस दौरान कुछ युवक हाथों में फरसा लहराते हुए दिखाई दिए। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही डिप्टी एसपी सुचिता सिंह ने जब यह देखा, तो उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाल लिया।
माइक लेकर उन्होंने भरी भीड़ के बीच घोषणा की कि जो लोग फरसा लहरा रहे हैं, उनकी तस्वीरें ली जा रही हैं और उन सभी पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।