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मध्य प्रदेश में बोरसर गांव की अनोखी पहल: गाली मुक्त गांव

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मध्य प्रदेश में बोरसर गांव की अनोखी पहल: गाली मुक्त गांव

सारांश

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव बना 'गाली मुक्त गांव', जहां अपशब्द बोलने पर 500 रुपए जुर्माना या सफाई करनी होगी। यह पहल गांव में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए की गई है। जानिए कैसे यह नियम गांव में लोगों के व्यवहार को बदल रहा है।

मुख्य बातें

गाली-गलौज पर 500 रुपए का जुर्माना या सफाई की सजा।
ग्राम पंचायत द्वारा सर्वसम्मति से पारित नियम।
गांव में सकारात्मक बदलाव की कोशिश।
बच्चों और बड़ों में गाली-गलौज को रोकने का प्रयास।
आसपास के गांवों में भी इस पहल का समर्थन।

बुरहानपुर, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव में एक अनोखा नियम लागू किया गया है, जिसके अनुसार गाली-गलौज करने पर 500 रुपए का जुर्माना या एक घंटे की सफाई करनी होगी। यह निर्णय ग्राम पंचायत द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के तहत लिया गया है। इस नियम की जानकारी देने वाले पोस्टर गांव में हर जगह लगाए गए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांव में लोगों के व्यवहार को सुधारना और विवादों को समाप्त करना है।

उप सरपंच विनोद शिंदे ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "हमारे गांव में गाली-गलौज को रोकने के लिए यह एक सकारात्मक पहल है। पहले बच्चों और बड़ों द्वारा मां-बहनों के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया जाता था। हमने ऐसे शब्दों का उपयोग करने वालों पर 500 रुपए का जुर्माना या एक घंटे गांव की सफाई की सजा तय की है।"

उन्होंने कहा कि इस पहल के परिणाम सकारात्मक रहे हैं और अब लोग अपशब्दों का उपयोग करने से बच रहे हैं। उप-सरपंच ने यह भी बताया कि आसपास के गांव के लोग इस विचार का स्वागत कर रहे हैं।

एक स्थानीय निवासी जयश्री ने बताया, "अब कोई भी गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग नहीं कर रहा है और यदि कोई ऐसा करता है, तो उसे जुर्माना देना होगा। इस नियम के कारण लोग अब ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं करते, क्योंकि इसमें सजा का प्रावधान है। पहले हमारे गांव के बच्चे गाली-गलौज के शब्दों का प्रयोग करते थे और इसकी गंभीरता को नहीं समझते थे, हालांकि माता-पिता उन्हें समझाने की कोशिश करते थे।"

एक युवक अश्विन पाटिल ने कहा, "हमने अपने गांव में 'गाली मुक्त गांव' की पहल शुरू की है और हम मध्य प्रदेश में ऐसा करने वाला पहला गांव बन गए हैं। इस पहल के तहत, यदि कोई व्यक्ति गाली-गलौज करते हुए पाया जाता है, तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा या एक घंटे तक गांव की सफाई करने का निर्देश दिया जाएगा। यह विचार दो बातों को देखकर आया। पहली बात यह कि 12-13 साल के बच्चे गाली-गलौज की गंभीरता को समझे बिना ही आम बोलचाल में इसका उपयोग कर रहे थे। दूसरी बात यह समझ में आई कि किसी भी बड़े विवाद की जड़ गाली ही होती है।"

उन्होंने बताया कि यह उनका विचार था, जिसके बारे में सरपंच और उप-सरपंच से चर्चा की गई थी। उसके बाद 'गाली मुक्त गांव' बनाने का निर्णय लिया गया। हम सभी ने एक शपथ ली है और इस संबंध में पंचायत की ओर से भी एक पत्र जारी किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है। गांव की पंचायत ने जो निर्णय लिया है, वह निश्चित रूप से लोगों के व्यवहार में सुधार लाने का प्रयास है। यह देखते हुए कि गाली-गलौज आम बोलचाल का हिस्सा बन गया था, यह पहल आवश्यक थी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाली मुक्त गांव का क्या मतलब है?
गाली मुक्त गांव का अर्थ है कि गांव में अपशब्दों का उपयोग करने पर जुर्माना या सजा का प्रावधान है।
इस नियम का उद्देश्य क्या है?
इस नियम का उद्देश्य गांव में लोगों के व्यवहार को सुधारना और विवादों को सुलझाना है।
क्या लोग इस पहल का स्वागत कर रहे हैं?
हां, आसपास के गांव के लोग भी इस पहल का स्वागत कर रहे हैं।
यह पहल कब से लागू हुई है?
यह पहल हाल ही में ग्राम पंचायत द्वारा लागू की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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