मध्य प्रदेश में खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध: उल्लंघन करने पर कठोर दंड

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मध्य प्रदेश में खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध: उल्लंघन करने पर कठोर दंड

सारांश

मध्य प्रदेश में खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। उल्लंघन के मामलों में सख्त सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान है।

Key Takeaways

  • खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान।
  • सभी श्रम अधिकारियों को निर्देश जारी।
  • “वेदा पहल” के तहत प्रयास जारी।
  • कार्पस फंड का गठन पुनर्वास के लिए।

भोपाल, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि किसी उद्योग में बाल श्रम पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें आर्थिक दंड और सजा भी शामिल है।

सहायक श्रम आयुक्त राखी जोशी ने बताया कि प्रदेश में १४ से १८ वर्ष तक के बच्चों को खतरनाक उद्योगों में काम पर रखने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। श्रम स्टार रेटिंग प्रणाली के तहत यदि किसी संस्थान में बाल श्रम या बंधक श्रम पाया जाता है, तो उस संस्थान को जीरो टॉलरेंस नीति के अनुसार शून्य अंक दिए जाएंगे।

इस संदर्भ में प्रदेश के सभी श्रम अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिन संस्थानों में बाल या बंधुआ श्रमिक नहीं हैं, उन्हें अन्य मापदंडों के आधार पर श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। बाल श्रम के उन्मूलन के लिए श्रम विभाग द्वारा “वेदा पहल” के तहत निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस पहल के अंतर्गत हर शुक्रवार को नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं और अभियोजन मामलों की निगरानी की जा रही है। इसके अतिरिक्त, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर १०९८ (टोल-फ्री) पर प्राप्त शिकायतों की भी लगातार समीक्षा की जा रही है। सहायक श्रम आयुक्त द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, १९८६ के तहत दोषी पाए जाने पर २० हजार से ५० हजार रुपये तक का जुर्माना और ६ माह से २ वर्ष तक की कारावास की सजा का प्रावधान है।

वहीं, बंधक श्रम पद्धति (उन्मूलन) अधिनियम, १९७६ के अंतर्गत अधिकतम तीन वर्ष की कारावास या दो हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केंद्र द्वारा प्रवर्तित योजना २०२१ के अंतर्गत वयस्क पुरुष श्रमिकों को एक लाख रुपये, महिला श्रमिकों और अनाथ बच्चों को दो लाख रुपये तथा शारीरिक शोषण या मानव तस्करी के पीड़ितों को तीन लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा, प्रत्येक जिले में पुनर्वास के लिए कार्पस फंड का गठन भी किया गया है।

Point of View

बल्कि समाज में बाल श्रम के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

मध्य प्रदेश में बाल श्रम पर प्रतिबंध कब लागू हुआ?
यह प्रतिबंध हाल ही में लागू किया गया है, जिसमें खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर पूर्ण रोक लगा दी गई है।
उल्लंघन करने पर क्या दंड है?
यदि किसी उद्योग में बाल श्रम पाया जाता है, तो जुर्माना २० हजार से ५० हजार रुपये तक और कारावास की सजा ६ माह से २ वर्ष तक हो सकती है।
क्या बंधक श्रम के लिए भी कोई प्रावधान हैं?
हाँ, बंधक श्रम के लिए भी सजा का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम तीन वर्ष की कारावास या जुर्माना शामिल है।
इस पहल के तहत क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
बाल श्रम उन्मूलन के लिए 'वेदा पहल' के अंतर्गत निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें नियमित समीक्षा बैठकें शामिल हैं।
क्या सहायता योजनाएं हैं बंधक श्रमिकों के लिए?
बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केंद्र द्वारा प्रवर्तित योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
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