ब्रिक्स बैठक में विपक्षी सीएम को न बुलाना लोकतंत्र-विरोधी: सपा सांसद अवधेश प्रसाद
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने 14 सितंबर 2026 को अयोध्या में मीडिया से बात करते हुए ब्रिक्स बैठक में विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित न किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस कदम को भाजपा की 'लोकतंत्र-विरोधी सोच' का प्रतिबिंब बताते हुए कहा कि इस तरह के निर्णय देश में लोकतंत्र की जड़ों को कमज़ोर करते हैं।
ब्रिक्स बैठक और विपक्षी राज्यों की अनदेखी
अवधेश प्रसाद के अनुसार, जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में नहीं है, उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ब्रिक्स कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राज्यों और उनके प्रतिनिधियों का समान सम्मान होना चाहिए। विपक्षी मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए।
गौरतलब है कि ब्रिक्स एक बहुपक्षीय मंच है जिसमें भारत की भागीदारी राष्ट्रीय स्तर पर होती है। ऐसे में विपक्षी आलोचकों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों में राज्यों की भागीदारी दलीय आधार पर नहीं, बल्कि समावेशी रूप से होनी चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर प्रतिक्रिया
अयोध्या में राम मंदिर के चंदे से जुड़े विवाद पर भी सपा सांसद ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि कोषाध्यक्ष का पद अत्यंत ज़िम्मेदारी भरा होता है, क्योंकि ट्रस्ट को लाखों रुपये के चंदे के साथ-साथ सोना, चाँदी, नकद और भूमि भी प्राप्त होती है।
अवधेश प्रसाद ने कहा कि यदि कोई कोषाध्यक्ष यह दावा करता है कि उसने किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए और संबंधित स्थान का दौरा तक नहीं किया, तो यह एक 'गंभीर और गैर-ज़िम्मेदाराना स्थिति' है। उन्होंने ट्रस्ट में पदोन्नति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
ब्रिक्स डिनर मेनू विवाद और राहुल गांधी की पोस्ट
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा ब्रिक्स डिनर के मेनू को लेकर की गई पोस्ट पर भी अवधेश प्रसाद ने अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहाँ अलग-अलग प्रकार के पहनावे और भोजन की परंपराएँ हैं। उनके अनुसार सभी प्रकार के भोजन का सम्मान किया जाना चाहिए, साथ ही देश की परंपराओं और मान्यताओं का संरक्षण भी अनिवार्य है।
सपा का घोषणापत्र और उत्तर प्रदेश विकास
समाजवादी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र को लेकर अवधेश प्रसाद ने कहा कि पार्टी के लिए यह दस्तावेज़ महज चुनावी औपचारिकता नहीं, बल्कि 'पवित्र दस्तावेज़' की तरह है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में आने पर घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरी तरह लागू करने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावी घोषणापत्र में प्रत्येक जिले की स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर विकास योजनाएँ शामिल की जाएँ। उनके अनुसार, राज्य का समग्र विकास तभी संभव है जब जिला-स्तरीय आवश्यकताओं को केंद्र में रखकर नीतियाँ बनाई जाएँ। आने वाले समय में सपा किस तरह इन मुद्दों को अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।