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बीएसएफ की महिला टीम ने एवरेस्ट पर गाया 'वंदे मातरम', अमित शाह बोले— 'नारी शक्ति ने रचा इतिहास'

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बीएसएफ की महिला टीम ने एवरेस्ट पर गाया 'वंदे मातरम', अमित शाह बोले— 'नारी शक्ति ने रचा इतिहास'

सारांश

बीएसएफ की पहली पूर्ण-महिला टीम ने डायमंड जुबली वर्ष में 'मिशन वंदे मातरम' के तहत माउंट एवरेस्ट की 8,848.86 मीटर ऊँची चोटी फतह की और वहाँ 'वंदे मातरम' गाया। लद्दाख, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और कारगिल की चार कांस्टेबलों की यह उपलब्धि नारी शक्ति और राष्ट्रीय गौरव का जीवंत प्रतीक बन गई है।

मुख्य बातें

बीएसएफ की पहली पूर्ण-महिला माउंट एवरेस्ट अभियान टीम ने 'मिशन वंदे मातरम' के तहत 8,848.86 मीटर की चोटी सर की।
टीम ने गुरुवार सुबह 8 बजे शिखर पर पहुँचकर 'वंदे मातरम' गाया।
टीम में शामिल थीं — कौसर फातिमा (लद्दाख), मुनमुन घोष (पश्चिम बंगाल), रबेका सिंह (उत्तराखंड) और त्सेरिंग चोरोल (कारगिल)।
यह अभियान बीएसएफ के डायमंड जुबली वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 22 मई को एक्स पर टीम को सैल्यूट किया और 'नारी शक्ति ने इतिहास रचा' कहा।

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की पहली पूर्ण-महिला माउंट एवरेस्ट अभियान टीम ने 'मिशन वंदे मातरम' के तहत 8,848.86 मीटर ऊँची दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर इतिहास रच दिया। इस टीम ने गुरुवार सुबह 8 बजे शिखर पर पहुँचकर 'वंदे मातरम' गाया, जो साहस, देशभक्ति और दृढ़ संकल्प का अभूतपूर्व प्रतीक बन गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस उपलब्धि पर टीम को सैल्यूट करते हुए कहा कि नारी शक्ति ने बीएसएफ की अजेय ताकत को साबित किया।

कौन हैं इस ऐतिहासिक टीम की सदस्य

बीएसएफ की इस चार सदस्यीय महिला टीम में लद्दाख की कांस्टेबल कौसर फातिमा, पश्चिम बंगाल की कांस्टेबल मुनमुन घोष, उत्तराखंड की कांस्टेबल रबेका सिंह और कारगिल की कांस्टेबल त्सेरिंग चोरोल शामिल थीं। यह चारों जवान देश के अलग-अलग कोनों से आती हैं, जो स्वयं में विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण है।

गौरतलब है कि यह अभियान बीएसएफ के डायमंड जुबली वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

अमित शाह की प्रतिक्रिया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार, 22 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'नारी शक्ति ने बीएसएफ की अजेय ताकत को साबित किया। बीएसएफ की सभी महिला माउंटेनियरिंग टीम को मेरी हार्दिक बधाई, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर इतिहास रचा। फोर्स की डायमंड जुबली मनाते हुए उन्होंने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर फतह हासिल की और वंदे मातरम गाया, जिससे हिम्मत, देशभक्ति और लगन की एक अनोखी मिसाल कायम हुई। टीम के सभी सदस्यों को मेरा सैल्यूट।'

बीएसएफ का बयान: जहाँ साँस लेना भी चुनौती

बीएसएफ ने अपनी आधिकारिक एक्स पोस्ट में इस उपलब्धि का विवरण देते हुए लिखा कि जहाँ अधिकांश लोगों को ऑक्सीजन सहायता की ज़रूरत होती है और सीधे खड़े रहना भी एक चुनौती होती है, वहाँ इन 'महिला सीमा प्रहरियों' ने अटूट स्वर में 'वंदे मातरम' गाया। बल ने इसे 'नारी शक्ति की ताकत, जुझारूपन और अदम्य भावना' का प्रतीक बताया।

राष्ट्रीय गौरव और महिला सशक्तिकरण का संदेश

यह उपलब्धि महज एक पर्वतारोहण की सफलता नहीं है — यह उस व्यापक बदलाव का प्रतीक है जो भारत के अर्धसैनिक बलों में महिलाओं की भूमिका के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीएसएफ जैसे बल, जो पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान रहे हैं, अब महिला जवानों को अग्रिम पंक्ति की भूमिकाओं और चुनौतीपूर्ण अभियानों में शामिल कर रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार राष्ट्रीय स्तर पर 'नारी शक्ति' को नीतिगत प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत कर रही है। माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) की चोटी पर 'वंदे मातरम' का गायन इस संदेश को वैश्विक मंच पर ले जाता है।

आगे की राह

बीएसएफ की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद उम्मीद की जा रही है कि अन्य अर्धसैनिक और सैन्य बलों में भी महिला अधिकारियों और जवानों के लिए ऐसे साहसिक अभियानों के अवसर बढ़ाए जाएँगे। यह टीम न केवल बीएसएफ बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस प्रतीकात्मकता में है जो यह देश के अर्धसैनिक बलों में महिलाओं की बदलती भूमिका के बारे में स्थापित करती है। चार अलग-अलग राज्यों और पृष्ठभूमियों की महिला कांस्टेबलों का एक साथ दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर पहुँचना यह दर्शाता है कि भर्ती और प्रशिक्षण नीतियों में बदलाव ज़मीन पर नतीजे दे रहे हैं। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि अर्धसैनिक बलों में महिलाओं की कुल हिस्सेदारी अभी भी बेहद कम है — इस एकल उपलब्धि को व्यापक संस्थागत सुधार की ज़रूरत को नज़रअंदाज़ करने का आधार नहीं बनना चाहिए।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएसएफ की 'मिशन वंदे मातरम' महिला टीम ने माउंट एवरेस्ट कब फतह किया?
बीएसएफ की पहली पूर्ण-महिला माउंट एवरेस्ट अभियान टीम ने गुरुवार सुबह 8 बजे 8,848.86 मीटर ऊँची चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की। यह अभियान बीएसएफ के डायमंड जुबली वर्ष के अवसर पर 'मिशन वंदे मातरम' के तहत आयोजित किया गया था।
बीएसएफ की एवरेस्ट महिला टीम में कौन-कौन शामिल थीं?
टीम में चार कांस्टेबल शामिल थीं — लद्दाख की कौसर फातिमा, पश्चिम बंगाल की मुनमुन घोष, उत्तराखंड की रबेका सिंह और कारगिल की त्सेरिंग चोरोल। ये चारों देश के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
अमित शाह ने बीएसएफ की महिला टीम को सैल्यूट क्यों किया?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 22 मई को एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीएसएफ की महिला माउंटेनियरिंग टीम ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर इतिहास रचा और 'वंदे मातरम' गाकर हिम्मत, देशभक्ति और लगन की अनोखी मिसाल कायम की। उन्होंने इसे 'नारी शक्ति की अजेय ताकत' का प्रमाण बताया।
बीएसएफ का डायमंड जुबली वर्ष क्या है और इस अभियान से इसका क्या संबंध है?
बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने पर डायमंड जुबली मना रहा है। इसी उपलक्ष्य में 'मिशन वंदे मातरम' के तहत यह ऐतिहासिक अभियान आयोजित किया गया, जिसमें पहली बार केवल महिला जवानों की टीम ने एवरेस्ट पर चढ़ाई की।
माउंट एवरेस्ट की चोटी पर 'वंदे मातरम' गाना इतना खास क्यों है?
8,848.86 मीटर की ऊँचाई पर वायुमंडलीय ऑक्सीजन बेहद कम होती है और अधिकांश पर्वतारोहियों को ऑक्सीजन सिलेंडर की ज़रूरत पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में अटूट स्वर में राष्ट्रगीत गाना शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का असाधारण प्रदर्शन है, जिसे बीएसएफ ने 'नारी शक्ति की अदम्य भावना' का प्रतीक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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