बुडगाम आर एंड बी डिवीजन में अनधिकृत उपकरण खरीद: जम्मू-कश्मीर सरकार ने नई जांच समिति गठित की
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 31 जुलाई 2026 को बुडगाम जिले के सड़क एवं भवन (आर एंड बी) डिवीजन में कथित अनधिकृत उपकरण खरीद मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। लोक निर्माण (आर एंड बी) विभाग ने एक नई जांच समिति गठित कर तत्कालीन कार्यकारी अभियंता पर प्रक्रियात्मक एवं वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
सरकारी आदेश के अनुसार, यह नई समिति 14 अगस्त 2024 के सरकारी आदेश संख्या 245-पीडब्ल्यू (आर एंड बी) 2024 के स्थान पर गठित की गई है। वित्त विभाग द्वारा 6 जुलाई को जारी सलाह के अनुसरण में यह ताज़ा जांच आदेश दिया गया है।
यह मामला मेसर्स न्यू बीटी एंटरप्राइजेज बनाम जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और अन्य के अंतर्गत सीसीपी संख्या 207/2022 से जुड़ा हुआ है, जैसा कि सरकारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।
जांच का दायरा
समिति को निर्देश दिया गया है कि वह बजटीय प्रावधानों के बिना, सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना और खरीद नियमों का उल्लंघन करते हुए की गई कथित उपकरण खरीद की व्यापक जांच करे। जांच ठोस साक्ष्यों के आधार पर व्यक्तिगत उत्तरदायित्व निर्धारित करने पर केंद्रित रहेगी।
समिति को आदेश जारी होने की तिथि से 21 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और निष्कर्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि यह समयसीमा तय करना प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मंशा को दर्शाता है।
तबादले से नहीं मिलेगी छूट
केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि समिति में नामित अधिकारियों के किसी भी बाद के तबादले या पदस्थापन में परिवर्तन से उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों से मुक्ति नहीं मिलेगी। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि जांच बिना किसी प्रशासनिक रुकावट के अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे।
आम जनता पर असर
यह मामला सार्वजनिक निर्माण विभाग में खरीद पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के व्यापक प्रश्न से जुड़ा है। आलोचकों का कहना है कि बिना बजटीय अनुमोदन के उपकरण खरीद से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग होता है और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
क्या होगा आगे
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्धारित होगा कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक या आगे की प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है या नहीं। इस जांच के नतीजे जम्मू-कश्मीर में सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की निगरानी के भविष्य के स्वरूप को भी प्रभावित कर सकते हैं।