31 जुलाई 2026
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बुडगाम आर एंड बी डिवीजन में अनधिकृत उपकरण खरीद: जम्मू-कश्मीर सरकार ने नई जांच समिति गठित की

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बुडगाम आर एंड बी डिवीजन में अनधिकृत उपकरण खरीद: जम्मू-कश्मीर सरकार ने नई जांच समिति गठित की

सारांश

जम्मू-कश्मीर सरकार ने बुडगाम आर एंड बी डिवीजन में बिना बजटीय मंजूरी और खरीद नियमों का उल्लंघन कर उपकरण खरीदने के मामले में नई जांच समिति गठित की है। समिति को 21 दिन में रिपोर्ट देनी है और तबादले से भी जिम्मेदारी से छूट नहीं मिलेगी।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 31 जुलाई 2026 को बुडगाम आर एंड बी डिवीजन में अनधिकृत उपकरण खरीद की नई जांच के आदेश दिए।
नई समिति 14 अगस्त 2024 के सरकारी आदेश संख्या 245-पीडब्ल्यू (आर एंड बी) 2024 के स्थान पर गठित की गई है।
जांच का आधार वित्त विभाग द्वारा 6 जुलाई को जारी सलाह और सीसीपी संख्या 207/2022 से जुड़ा मामला है।
समिति 21 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और बजटीय प्रावधान, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी तथा खरीद नियमों के उल्लंघन की जांच करेगी।
नामित अधिकारियों के तबादले से उन्हें जांच की जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं मिलेगी।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 31 जुलाई 2026 को बुडगाम जिले के सड़क एवं भवन (आर एंड बी) डिवीजन में कथित अनधिकृत उपकरण खरीद मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं। लोक निर्माण (आर एंड बी) विभाग ने एक नई जांच समिति गठित कर तत्कालीन कार्यकारी अभियंता पर प्रक्रियात्मक एवं वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

सरकारी आदेश के अनुसार, यह नई समिति 14 अगस्त 2024 के सरकारी आदेश संख्या 245-पीडब्ल्यू (आर एंड बी) 2024 के स्थान पर गठित की गई है। वित्त विभाग द्वारा 6 जुलाई को जारी सलाह के अनुसरण में यह ताज़ा जांच आदेश दिया गया है।

यह मामला मेसर्स न्यू बीटी एंटरप्राइजेज बनाम जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और अन्य के अंतर्गत सीसीपी संख्या 207/2022 से जुड़ा हुआ है, जैसा कि सरकारी आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।

जांच का दायरा

समिति को निर्देश दिया गया है कि वह बजटीय प्रावधानों के बिना, सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना और खरीद नियमों का उल्लंघन करते हुए की गई कथित उपकरण खरीद की व्यापक जांच करे। जांच ठोस साक्ष्यों के आधार पर व्यक्तिगत उत्तरदायित्व निर्धारित करने पर केंद्रित रहेगी।

समिति को आदेश जारी होने की तिथि से 21 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और निष्कर्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि यह समयसीमा तय करना प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मंशा को दर्शाता है।

तबादले से नहीं मिलेगी छूट

केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि समिति में नामित अधिकारियों के किसी भी बाद के तबादले या पदस्थापन में परिवर्तन से उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों से मुक्ति नहीं मिलेगी। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि जांच बिना किसी प्रशासनिक रुकावट के अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे।

आम जनता पर असर

यह मामला सार्वजनिक निर्माण विभाग में खरीद पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के व्यापक प्रश्न से जुड़ा है। आलोचकों का कहना है कि बिना बजटीय अनुमोदन के उपकरण खरीद से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग होता है और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

क्या होगा आगे

जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्धारित होगा कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक या आगे की प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है या नहीं। इस जांच के नतीजे जम्मू-कश्मीर में सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की निगरानी के भविष्य के स्वरूप को भी प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा 21 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट और उस पर की जाने वाली कार्रवाई से होगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुडगाम आर एंड बी डिवीजन अनधिकृत उपकरण खरीद मामला क्या है?
यह मामला बुडगाम जिले के लोक निर्माण (आर एंड बी) विभाग के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता द्वारा कथित तौर पर बिना बजटीय प्रावधान, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और खरीद नियमों का उल्लंघन करते हुए उपकरण खरीदने से संबंधित है। यह सीसीपी संख्या 207/2022 के अंतर्गत न्यायालय में भी विचाराधीन है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने नई जांच समिति क्यों गठित की?
वित्त विभाग द्वारा 6 जुलाई को जारी सलाह के आधार पर 14 अगस्त 2024 के पुराने आदेश के स्थान पर नई समिति गठित की गई है। इसका उद्देश्य प्रक्रियात्मक और वित्तीय अनियमितताओं के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करना है।
जांच समिति को रिपोर्ट कब तक देनी है?
जांच समिति को आदेश जारी होने की तिथि से 21 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और निष्कर्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
क्या तबादले के बाद भी जांच समिति के सदस्यों की जिम्मेदारी बनी रहेगी?
हाँ, सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नामित अधिकारियों के किसी भी बाद के तबादले या पदस्थापन में परिवर्तन से उन्हें सौंपी गई जांच की जिम्मेदारियों से मुक्ति नहीं मिलेगी।
इस जांच के बाद क्या कार्रवाई हो सकती है?
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्धारित होगा कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक या आगे की प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है या नहीं। रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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