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पद्मश्री भारत भूषण त्यागी का मोदी सरकार की कृषि नीति पर बयान: 'किसान अब उत्पादक से व्यावसायिक बन रहा है'

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पद्मश्री भारत भूषण त्यागी का मोदी सरकार की कृषि नीति पर बयान: 'किसान अब उत्पादक से व्यावसायिक बन रहा है'

सारांश

बुलंदशहर के पद्मश्री किसान भारत भूषण त्यागी ने मोदी सरकार की कृषि नीतियों को ऐतिहासिक करार दिया — FPO, एथेनॉल और प्राकृतिक खेती को किसानों की नई पहचान बताया। उनका कहना है कि किसान अब केवल उत्पादक नहीं, व्यावसायिक इकाई बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

पद्मश्री किसान भारत भूषण त्यागी ने 17 सितंबर 2026 को बुलंदशहर में मोदी सरकार की कृषि नीतियों को ऐतिहासिक बताया।
उनके अनुसार किसान सभाओं में अब बिजली और गन्ना भुगतान जैसे पुराने मुद्दे उस तीव्रता से नहीं उठते।
एथेनॉल को लेकर फैलाई जा रही धारणाओं को उन्होंने 'भ्रामक' बताया और इसे किसानों व अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी कहा।
10,000 फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियाँ खोलने की घोषणा को उन्होंने कृषि क्षेत्र का बड़ा कदम माना।
कोविड के बाद युवाओं का कृषि की ओर बढ़ता रुझान और प्राकृतिक खेती को उन्होंने टिकाऊ अर्थव्यवस्था का आधार बताया।

बुलंदशहर के पद्मश्री सम्मानित प्रगतिशील किसान भारत भूषण त्यागी ने 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर केंद्र सरकार की कृषि नीतियों को ऐतिहासिक बताया और कहा कि किसानों की आय में बढ़ोतरी, सहकारिता आधारित प्रौद्योगिकी विकास और युवाओं की कृषि में भागीदारी के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। उनके अनुसार, मोदी के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में जो बदलाव आए हैं, उनका सीधा लाभ ज़मीनी स्तर पर किसानों को मिल रहा है।

किसानों की बदलती तस्वीर

त्यागी ने कहा, 'कृषि के लिए बहुत छोटे-छोटे बारीक मुद्दों पर भी काम किया गया है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है।' उन्होंने स्वतंत्रता के बाद हुई हरित क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में प्रकृति और किसान दोनों की अनदेखी हुई थी। उनके अनुसार वर्तमान सरकार के कार्यकाल में किसान को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी से जुड़ा और 'ऊर्जादाता' के रूप में स्थापित करने के संकल्प सामने आ रहे हैं।

किसान सभाओं में बदला एजेंडा

त्यागी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले किसान सभाओं में बिजली की समस्या, गन्ने के बकाया भुगतान और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे बार-बार उठते थे। उनके अनुसार अब ये मुद्दे उस रूप में नहीं उठते क्योंकि 'समय पर गन्ने का भुगतान होता है और आगे कई अवसर खोल दिए गए हैं।' यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब कृषि क्षेत्र में आय अस्थिरता राष्ट्रीय बहस का विषय बनी हुई है।

एथेनॉल नीति पर पक्षधरता

एथेनॉल के भविष्य को लेकर चल रही बहस पर त्यागी ने कहा कि एथेनॉल को ईंधन के रूप में सीमित मानने वाली धारणाएँ 'भ्रामक' हैं। उनके अनुसार एथेनॉल किसानों और देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की एथेनॉल सम्मिश्रण नीति का लक्ष्य पेट्रोल में मिश्रण को बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि करना है।

युवाओं और प्राकृतिक खेती की ओर रुझान

त्यागी ने कहा कि कोविड-19 के बाद बड़ी संख्या में युवा खेती की ओर आकर्षित हुए हैं। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और रसायन मुक्त खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार कृषक उत्पादक संगठन (FPO) और सहकारिता की स्थापना से किसान अब 'उत्पादक से व्यावसायिक' होने की दिशा में प्रेरित हो रहे हैं। उन्होंने 10,000 फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियाँ खोलने की घोषणा को कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम बताया।

आगे की राह

त्यागी के अनुसार टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव कृषि में नवाचार और युवाओं की भागीदारी पर टिकी है। बाज़ार द्वारा शोषण की समस्या को दूर करने के लिए किसानों को बाज़ार से सीधे जोड़ने की दिशा में जो प्रयास हो रहे हैं, वे आने वाले वर्षों में कृषि आबादी की दशा बदल सकते हैं — यदि इन्हें ज़मीन पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कृषि नीति का मूल्यांकन केवल एक प्रगतिशील किसान के बयान से नहीं होता। किसानों की औसत आय, कृषि ऋण और MSP की प्रभावशीलता जैसे व्यापक आँकड़े इस तस्वीर को पूरा करते हैं, जो इस बयान में अनुपस्थित हैं। FPO की संख्या बढ़ाना सराहनीय है, पर उनकी वित्तीय स्थिरता और बाज़ार पहुँच पर स्वतंत्र रिपोर्टें मिली-जुली रही हैं। एथेनॉल को लेकर त्यागी की दलील नीतिगत रूप से सही हो सकती है, लेकिन खाद्य सुरक्षा बनाम ऊर्जा उपयोग की बहस को 'भ्रामक' कहकर खारिज करना उस जटिल विमर्श को सरल बनाना है जो वैश्विक स्तर पर जारी है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मश्री भारत भूषण त्यागी कौन हैं?
भारत भूषण त्यागी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के एक प्रगतिशील किसान हैं जिन्हें भारत सरकार ने कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया है। वे जैविक और प्राकृतिक खेती के प्रमुख पक्षधर माने जाते हैं।
भारत भूषण त्यागी ने मोदी सरकार की किन कृषि नीतियों की सराहना की?
उन्होंने किसानों की आय में बढ़ोतरी, समय पर गन्ना भुगतान, कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) की स्थापना, एथेनॉल नीति और युवाओं की कृषि में भागीदारी को प्रमुख उपलब्धियाँ बताया। साथ ही 10,000 फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियाँ खोलने की घोषणा को भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण कदम कहा।
एथेनॉल नीति पर त्यागी का क्या कहना है?
त्यागी के अनुसार एथेनॉल को ईंधन के रूप में सीमित बताने वाली धारणाएँ भ्रामक हैं। उनका मत है कि एथेनॉल किसानों की आमदनी बढ़ाने और देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने दोनों दृष्टियों से फायदेमंद है।
कोविड के बाद युवाओं का खेती की ओर रुझान क्यों बढ़ा?
त्यागी के अनुसार कोविड-19 महामारी के बाद बड़ी संख्या में युवा शहरों से लौटकर या वैकल्पिक आजीविका की तलाश में कृषि की ओर आकर्षित हुए। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और रसायन मुक्त खेती के बढ़ते अवसरों ने भी इस रुझान को प्रोत्साहित किया।
कृषक उत्पादक संगठन (FPO) किसानों के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
FPO किसानों को सामूहिक रूप से बाज़ार से जोड़ते हैं, जिससे वे केवल उत्पादक न रहकर व्यावसायिक इकाई बन सकते हैं। त्यागी के अनुसार यह मॉडल बाज़ार द्वारा व्यक्तिगत किसान के शोषण को कम करने में सहायक है।
राष्ट्र प्रेस
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