एफएओ 'एग्रीकोला मेडल' पर पद्मश्री सेठपाल सिंह बोले — 'मोदी ने कृषि को दी नई दिशा, देश के लिए गौरव का क्षण'
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2026 के लिए अपना सर्वोच्च कृषि सम्मान 'एग्रीकोला मेडल' प्रदान किया है। इस ऐतिहासिक सम्मान पर सहारनपुर के पद्मश्री पुरस्कार विजेता प्रगतिशील किसान सेठपाल सिंह ने कहा कि यह केवल प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि समूचे भारत का सम्मान है।
गौरव का क्षण: सेठपाल सिंह की प्रतिक्रिया
पद्मश्री सेठपाल सिंह ने कहा, 'यह मात्र प्रधानमंत्री मोदी की ही नहीं, बल्कि पूरे देश का स्वागत है।' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आगे बढ़कर कृषि क्षेत्र को नए उत्थान की तरफ लेकर गए हैं। किसानों को एफपीओ और स्टार्टअप स्किल डेवलपमेंट के माध्यम से सहयोग देकर तथा चाय किसानों को विविधता की ओर ले जाकर भारत ने यह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है।
कृषि सुधारों पर सेठपाल सिंह का मूल्यांकन
सेठपाल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि क्षेत्र में कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। उन्होंने तीन कृषि कानूनों का उल्लेख करते हुए — जिनका किसान संगठनों ने विरोध किया था — कहा कि वे कानून किसानों की दिशा और दशा दोनों बदलने में सक्षम थे। मिलेट्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की पहल को उन्होंने भारतीय किसानों के लिए एक सशक्त संदेश बताया।
उन्होंने मोटे अनाज के फायदे गिनाते हुए कहा कि ये पोषक तत्वों से भरपूर हैं, इनमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जरूरत कम होती है — जो लागत और पर्यावरण दोनों के लिहाज से किसानों के हित में है।
पीएम किसान सम्मान निधि और किसानों की आमदनी
सेठपाल सिंह ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की सराहना करते हुए कहा कि इससे किसान अपनी फसलों के लिए समय पर खाद, बीज और सिंचाई की व्यवस्था कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में कई क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं और किसानों की आमदनी दोगुना करने के प्रयास जारी हैं।
वैश्विक दबाव और भारतीय किसानों के हित
सेठपाल सिंह ने कहा कि कुछ देश भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र में दबाव बनाकर प्रवेश करना चाहते हैं, क्योंकि भारत तेज़ी से विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत एक किसान-प्रधान देश है, जहाँ छोटी जोत के किसानों की बहुलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे कितना भी दबाव हो, वे देश के किसानों के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेंगे।
खाद जैसे आयातित संसाधनों पर सब्सिडी देकर सरकार ने किसानों पर आर्थिक बोझ कम करने की कोशिश की है, यह बात भी सेठपाल सिंह ने रेखांकित की। आज पूरी दुनिया भारत की कृषि नीति की ओर ध्यान से देख रही है — यह उनका मानना है।