PM मोदी को FAO का 'एग्रीकोला मेडल': शुभम तिवारी बोले — भारत की कृषि नीतियों की वैश्विक स्वीकृति
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के सर्वोच्च सम्मान 'एग्रीकोला मेडल' से नवाज़े जाने पर शहडोल स्थित मिलेट स्टार्टअप ग्रेनॉक्सी के संस्थापक और युवा उद्यमी शुभम तिवारी ने इसे भारत के लिए एक ऐतिहासिक गौरव का क्षण बताया है। तिवारी के अनुसार, यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारत की किसान-केंद्रित नीतियों, खाद्य सुरक्षा ढाँचे और कृषि कूटनीति की वैश्विक मान्यता है।
भारत की कृषि उपलब्धियाँ और वैश्विक पहचान
शुभम तिवारी ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत को खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त नेतृत्वकर्ता के रूप में देख रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कोविड महामारी के दौरान 80 करोड़ से अधिक लोगों तक मुफ्त राशन पहुँचाने की योजना का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने वैश्विक खाद्य प्रबंधन का एक अनुकरणीय उदाहरण बताया। उनके अनुसार, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के ज़रिए करोड़ों किसानों तक प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता पहुँचाई गई, जो डिजिटल वितरण प्रणाली की सफलता को दर्शाती है।
तिवारी ने यह भी रेखांकित किया कि विशाल जनसंख्या के बावजूद भारत ने खाद्यान्न प्रबंधन, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और तकनीक-आधारित कृषि योजनाओं के माध्यम से एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, FAO जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा भारत की सराहना यह संकेत देती है कि देश की नीतियाँ अब वैश्विक स्तर पर उदाहरण बन रही हैं।
एमएसपी, खाद्य भंडारण और आत्मनिर्भर कृषि
तिवारी ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने किसानों और घरेलू कृषि हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वैश्विक दबावों के बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), खाद्य भंडारण और किसान सहायता जैसी नीतियाँ अडिग रहीं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर कृषि मॉडल को बढ़ावा देकर भारत ने यह सिद्ध किया है कि किसान देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की सबसे महत्वपूर्ण धुरी हैं।
मिलेट्स क्रांति और ग्रेनॉक्सी की भूमिका
मिलेट्स, डिजिटल एग्रीकल्चर और किसान कल्याण के संदर्भ में तिवारी ने बताया कि भारत ने मिलेट्स को वैश्विक स्तर पर 'सुपरफूड' के रूप में स्थापित करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। वे स्वयं ग्रेनॉक्सी के माध्यम से शहडोल क्षेत्र में किसानों, महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHG) और मिलेट-आधारित फूड इकोसिस्टम के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
तिवारी के अनुसार, जमीनी स्तर पर मिलेट्स के प्रति जागरूकता और माँग तेज़ी से बढ़ रही है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि, पोषण स्तर में सुधार और सस्टेनेबल फार्मिंग को बल मिल रहा है। यह बदलाव केवल नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि गाँवों में वास्तविक रूप से दिखाई दे रहा है।
भारतीय कृषि कूटनीति को नई ताकत
प्रधानमंत्री मोदी की बढ़ती वैश्विक साख पर तिवारी ने कहा कि भारत की 'फार्मर फर्स्ट' नीति, प्राकृतिक खेती और मिलेट्स-आधारित न्यूट्रिशन मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीरता से देखा जा रहा है। उनके अनुसार, मिलेट्स को लेकर भारत की पहल ने वैश्विक बाज़ार का ध्यान आकर्षित किया है, जिसका सीधा लाभ देश के किसानों और ग्रेनॉक्सी जैसे मिलेट स्टार्टअप्स को मिल रहा है। यह पुरस्कार भारतीय पारंपरिक अनाजों को वैश्विक हेल्दी फूड बाज़ार तक पहुँचाने के अवसर को और व्यापक बनाता है।