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द्वारका एक्सप्रेसवे–नेल्सन मंडेला मार्ग टनल को कैबिनेट की मंजूरी, ₹6,969.67 करोड़ की 6-लेन परियोजना स्वीकृत

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द्वारका एक्सप्रेसवे–नेल्सन मंडेला मार्ग टनल को कैबिनेट की मंजूरी, ₹6,969.67 करोड़ की 6-लेन परियोजना स्वीकृत

सारांश

₹6,969.67 करोड़ की यह टनल परियोजना सिर्फ एक सड़क नहीं — यह दिल्ली के पश्चिम, दक्षिण और पूर्व को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश है। द्वारका एक्सप्रेसवे से नेल्सन मंडेला मार्ग तक 8.1 किमी की यह भूमिगत कड़ी गुरुग्राम, IGI हवाई अड्डे और नोएडा तक के यातायात को नई दिशा देगी।

मुख्य बातें

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने 1 जुलाई 2026 को ₹6,969.67 करोड़ की 6-लेन रोड टनल परियोजना को मंजूरी दी।
टनल द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी; कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर ।
परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) पर विकसित होगी; मुख्य टनल 3.14 किलोमीटर की ट्विन-ट्यूब संरचना होगी।
1.98 किलोमीटर का हिस्सा दक्षिणी रिज वन क्षेत्र के नीचे से गुजरेगा, जिससे पर्यावरणीय क्षति न्यूनतम रहेगी।
गुरुग्राम , IGI हवाई अड्डा , नोएडा और गाजियाबाद से दक्षिण दिल्ली की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
NHAI ने AIIMS–महिपालपुर एलिवेटेड कॉरिडोर और 1.8 किमी की एलिवेटेड रोड का भी प्रस्ताव रखा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने 1 जुलाई 2026 को ₹6,969.67 करोड़ की लागत वाली 6-लेन रोड टनल परियोजना को हरी झंडी दे दी। यह टनल एनएच-148एई पर बनेगी और द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी। दिल्ली की पश्चिमी और दक्षिणी सीमाओं के बीच यातायात की पुरानी समस्या से निजात दिलाने की दिशा में यह परियोजना एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

परियोजना का स्वरूप और संरचना

कैबिनेट की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह 8.1 किलोमीटर लंबी परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत विकसित की जाएगी। इसके अंतर्गत 3.14 किलोमीटर की ट्विन-ट्यूब टनल, 0.98 किलोमीटर का टनल अप्रोच रैंप, RE वॉल के साथ 0.554 किलोमीटर का अप्रोच, 2.556 किलोमीटर का एलिवेटेड हिस्सा और 0.870 किलोमीटर की एट-ग्रेड रोड शामिल है। मुख्य कैरिजवे की लंबाई 6.3 किलोमीटर है।

टनल शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होगी और नेल्सन मंडेला मार्ग तथा महिपालपुर-छतरपुर रोड के चौराहे से पहले समाप्त होगी। इसमें से 1.98 किलोमीटर का हिस्सा रंगपुरी (दक्षिणी दिल्ली) रिज के नीचे से गुजरेगा।

पर्यावरण और भूमि उपयोग पर असर

जमीन के नीचे बनने वाली ट्विन-ट्यूब संरचना के कारण भूतल पर होने वाली निर्माण-संबंधी बाधाएँ न्यूनतम रहेंगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि दक्षिणी रिज वन क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा, क्योंकि टनल का संवेदनशील हिस्सा पूरी तरह रिज के नीचे से निकाला गया है। यह पहलू पर्यावरण के दृष्टिकोण से परियोजना की स्वीकार्यता बढ़ाता है।

यातायात पर व्यापक प्रभाव

इस परियोजना से गुरुग्राम, द्वारका, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे और पश्चिम दिल्ली से दक्षिण दिल्ली की ओर आने वाले यातायात को सीधा लाभ मिलेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने AIIMS और महिपालपुर के बीच एक एलिवेटेड कॉरिडोर का भी प्रस्ताव रखा है, जो इस टनल को बारापुल्ला एलिवेटेड रोड से जोड़ेगा। इस कनेक्टिविटी से पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के साथ-साथ पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा भी लाभान्वित होंगे।

अतिरिक्त अवसंरचना प्रस्ताव

चौराहे पर यातायात का दबाव घटाने के लिए नेल्सन मंडेला मार्ग के साथ 1.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, मौजूदा फ्लाईओवर के समानांतर छतरपुर से महिपालपुर की दिशा में एक नया फ्लाईओवर और छतरपुर की ओर राइट-टर्न ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए एक एलिवेटेड यू-टर्न बनाने का भी प्रस्ताव है।

आगे की राह

CCEA की मंजूरी के बाद अब परियोजना की विस्तृत निविदा प्रक्रिया और HAM अनुबंध के क्रियान्वयन की दिशा में काम तेज होने की उम्मीद है। यह परियोजना दिल्ली की बहुस्तरीय कनेक्टिविटी योजना का अहम हिस्सा है और इसके पूरा होने पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के यातायात ढाँचे में उल्लेखनीय बदलाव आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन HAM मॉडल की अपनी सीमाएँ हैं — अतीत में कई HAM परियोजनाएँ वित्तीय बंद होने में देरी के कारण लटकती रही हैं। दक्षिणी रिज के नीचे से टनल निकालना तकनीकी रूप से जटिल है और निर्माण के दौरान भूवैज्ञानिक चुनौतियाँ लागत व समयसीमा दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, बारापुल्ला एलिवेटेड रोड से प्रस्तावित कनेक्शन अभी 'प्रस्ताव' के स्तर पर है — जब तक वह स्वीकृत और निर्मित नहीं होता, टनल का पूरा लाभ सीमित रहेगा। असली कसौटी यह होगी कि निविदा से लेकर उद्घाटन तक की समयसीमा कितनी पारदर्शिता से सार्वजनिक की जाती है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्वारका एक्सप्रेसवे–नेल्सन मंडेला मार्ग टनल परियोजना क्या है?
यह ₹6,969.67 करोड़ की 6-लेन भूमिगत सड़क परियोजना है जिसे 1 जुलाई 2026 को CCEA ने मंजूरी दी। यह एनएच-148एई पर 8.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल के जरिए द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी।
इस टनल का निर्माण किस मॉडल पर होगा और इसकी लागत कितनी है?
परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) पर बनेगी और इसकी कुल स्वीकृत लागत ₹6,969.67 करोड़ है। HAM मॉडल में सरकार निर्माण के दौरान एक हिस्सा देती है और शेष राशि परिचालन अवधि में किस्तों में चुकाई जाती है।
इस परियोजना से किन इलाकों को फायदा होगा?
गुरुग्राम, द्वारका, IGI हवाई अड्डे और पश्चिम दिल्ली से दक्षिण दिल्ली आने-जाने वाले यातायात को सीधा लाभ मिलेगा। NHAI के प्रस्तावित बारापुल्ला एलिवेटेड रोड कनेक्शन से पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा भी इस नेटवर्क से जुड़ेंगे।
दक्षिणी रिज वन क्षेत्र पर इस टनल का क्या प्रभाव पड़ेगा?
टनल का 1.98 किलोमीटर का हिस्सा रंगपुरी दक्षिणी रिज के नीचे से गुजरेगा, जिससे वन क्षेत्र में कोई भूतल कटाई नहीं होगी। भूमिगत निर्माण पद्धति को विशेष रूप से इसीलिए चुना गया है ताकि संवेदनशील रिज पारिस्थितिकी सुरक्षित रहे।
इस परियोजना में टनल के अलावा और क्या शामिल है?
परियोजना में नेल्सन मंडेला मार्ग के साथ 1.8 किलोमीटर की एलिवेटेड रोड, छतरपुर से महिपालपुर की ओर एक नया फ्लाईओवर और छतरपुर की ओर राइट-टर्न ट्रैफिक के लिए एलिवेटेड यू-टर्न भी प्रस्तावित है। NHAI ने AIIMS और महिपालपुर के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर का भी प्रस्ताव रखा है।
राष्ट्र प्रेस
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