26 जुलाई 2026
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अम्फान राहत घोटाला: सीएजी रिपोर्ट में टीएमसी सरकार पर नुकसान बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप

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अम्फान राहत घोटाला: सीएजी रिपोर्ट में टीएमसी सरकार पर नुकसान बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप

सारांश

सीएजी की रिपोर्ट ने टीएमसी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है — अम्फान सुपर-साइक्लोन के बाद केंद्र से अधिक राहत राशि पाने के लिए नुकसान का अनुमान बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। ₹125.07 करोड़ की 1,44,175 संदिग्ध लेनदेन और दोहरे भुगतान के मामले राहत वितरण में गहरी खामियों की ओर इशारा करते हैं।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल विधानसभा में 26 जुलाई 2026 को वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने सीएजी की 28 रिपोर्टें पेश कीं।
सीएजी के अनुसार, पिछली टीएमसी सरकार ने अम्फान (2020) के नुकसान का अनुमान केंद्र से अधिक राहत पाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।
आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों का मुआवज़ा जून 2020 के बाद ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,000 किया गया; कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला।
1,44,175 लेनदेन में लाभार्थी सूची और बैंक रिकॉर्ड के बीच अंतर मिला, कुल राशि ₹125.07 करोड़ ।
सर्वाधिक अनियमितताएँ दक्षिण 24 परगना में; नदिया , पूर्वी मिदनापुर और पश्चिमी मिदनापुर में भी मामले।
अम्फान ने 20 मई 2020 को पश्चिम बंगाल के 16 ज़िलों में तबाही मचाई थी; सरकारी आँकड़ों के अनुसार 99 लोगों की मौत हुई थी।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में 26 जुलाई 2026 को राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता द्वारा पेश की गई भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की 28 रिपोर्टों में से एक ने बड़ा खुलासा किया है — ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार ने अम्फान सुपर-साइक्लोन (2020) से हुए नुकसान का अनुमान जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, ताकि केंद्र सरकार से अधिक राहत राशि हासिल की जा सके। सीएजी के अनुसार, न केवल यह अनुमान अवास्तविक था, बल्कि राज्य सरकार उसे सही ठहराने वाले साक्ष्य भी नहीं दे सकी।

मुआवज़े की राशि में अनियमितता

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, जून 2020 तक राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हर घर को ₹20,000 का मुआवज़ा दिया जाएगा। हालांकि, जून के बाद आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए यह राशि बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई, जबकि पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए ₹20,000 ही रही।

सीएजी ऑडिटर ने इस असंगति पर राज्य सरकार से बार-बार स्पष्टीकरण माँगा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यह विसंगति राहत वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव को उजागर करती है।

एक से अधिक बार मुआवज़ा पाने के मामले

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई लाभार्थियों को एक से अधिक बार मुआवज़ा भुगतान किया गया। ऐसे सर्वाधिक मामले दक्षिण 24 परगना ज़िले से मिले, जो अम्फान से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसके अलावा नदिया, पूर्वी मिदनापुर और पश्चिमी मिदनापुर ज़िलों में भी ऐसे मामले दर्ज किए गए।

गौरतलब है कि लाभार्थी सूची में दर्ज बैंक खाता नंबर और वास्तविक बैंक लेनदेन रिकॉर्ड के बीच भी भारी अंतर पाया गया। यह अंतर 1,44,175 लेनदेन में पाया गया, जिनकी कुल राशि ₹125.07 करोड़ थी।

डीबीटी प्रणाली में नियंत्रण की कमी

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, इन अनियमितताओं से स्पष्ट होता है कि लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ थीं। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली में एक से अधिक भुगतान रोकने के लिए आवश्यक नियंत्रण तंत्र का अभाव था, जिसके कारण अनेक लाभार्थियों को दोहरा लाभ मिला।

यह ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में राहत वितरण की पारदर्शिता पहले से ही सवालों के घेरे में रही है। आलोचकों का कहना है कि डीबीटी प्रणाली की यह विफलता केंद्र-राज्य राहत समन्वय में बड़ी संरचनात्मक कमज़ोरी को दर्शाती है।

अम्फान तूफान: पृष्ठभूमि

20 मई 2020 को सुपर साइक्लोन 'अम्फान' ने पश्चिम बंगाल के 16 ज़िलों में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें तटीय ज़िले सर्वाधिक प्रभावित हुए। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इस आपदा में 99 लोगों की मौत हुई और घरों, कृषि, मछली पालन, वनों, बिजली अवसंरचना, सिंचाई प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवाओं और उद्योगों को व्यापक नुकसान पहुँचा था।

आगे क्या होगा

सीएजी रिपोर्ट के विधानसभा में पेश होने के बाद अब राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर जाँच की माँग की है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन निष्कर्षों पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और क्या केंद्र सरकार अतिरिक्त राहत राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

44,175 संदिग्ध लेनदेन और दोहरे भुगतान के मामले यह सवाल उठाते हैं कि डीबीटी प्रणाली, जिसे पारदर्शिता का ब्रह्मास्त्र माना जाता है, वह भी राजनीतिक दबाव में विफल हो सकती है। गौरतलब है कि अम्फान राहत में गड़बड़ी के आरोप 2020 में ही लगे थे, लेकिन सीएजी का यह आधिकारिक दस्तावेज़ीकरण उन्हें नई गंभीरता देता है। असली परीक्षा अब यह है कि क्या राज्य या केंद्र सरकार वसूली और जवाबदेही की कोई ठोस कार्रवाई करती है, या यह रिपोर्ट भी विधानसभा की फ़ाइलों में दब जाती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएजी रिपोर्ट में टीएमसी सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, पिछली टीएमसी सरकार ने अम्फान सुपर-साइक्लोन (2020) से हुए नुकसान का अनुमान जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया ताकि केंद्र सरकार से अधिक राहत राशि प्राप्त की जा सके। राज्य सरकार इस अनुमान को सही ठहराने वाले साक्ष्य भी नहीं दे सकी।
अम्फान राहत में कितनी राशि की अनियमितता सामने आई है?
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, लाभार्थी सूची और बैंक लेनदेन रिकॉर्ड के बीच 1,44,175 मामलों में अंतर पाया गया, जिनकी कुल राशि ₹125.07 करोड़ है। इनमें एक ही व्यक्ति को एक से अधिक बार मुआवज़ा मिलने के मामले भी शामिल हैं।
मुआवज़े की राशि में क्या बदलाव किया गया था?
जून 2020 तक पूरी तरह और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दोनों प्रकार के घरों के लिए ₹20,000 का मुआवज़ा घोषित था। जून के बाद आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए इसे बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया, लेकिन सीएजी को इस बदलाव का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
किन ज़िलों में सबसे अधिक अनियमितताएँ पाई गईं?
सर्वाधिक अनियमितताएँ दक्षिण 24 परगना ज़िले में पाई गईं, जो अम्फान से सबसे अधिक प्रभावित था। इसके अलावा नदिया, पूर्वी मिदनापुर और पश्चिमी मिदनापुर ज़िलों में भी दोहरे भुगतान के मामले सामने आए।
अम्फान सुपर-साइक्लोन ने पश्चिम बंगाल में कितना नुकसान किया था?
20 मई 2020 को अम्फान ने पश्चिम बंगाल के 16 ज़िलों में भारी तबाही मचाई थी। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 99 लोगों की मौत हुई और घरों, कृषि, मछली पालन, वनों, बिजली अवसंरचना, सिंचाई प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवाओं और उद्योगों को व्यापक नुकसान पहुँचा था।
राष्ट्र प्रेस
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