अम्फान राहत घोटाला: सीएजी रिपोर्ट में टीएमसी सरकार पर नुकसान बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में 26 जुलाई 2026 को राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता द्वारा पेश की गई भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की 28 रिपोर्टों में से एक ने बड़ा खुलासा किया है — ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार ने अम्फान सुपर-साइक्लोन (2020) से हुए नुकसान का अनुमान जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, ताकि केंद्र सरकार से अधिक राहत राशि हासिल की जा सके। सीएजी के अनुसार, न केवल यह अनुमान अवास्तविक था, बल्कि राज्य सरकार उसे सही ठहराने वाले साक्ष्य भी नहीं दे सकी।
मुआवज़े की राशि में अनियमितता
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, जून 2020 तक राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हर घर को ₹20,000 का मुआवज़ा दिया जाएगा। हालांकि, जून के बाद आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए यह राशि बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई, जबकि पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए ₹20,000 ही रही।
सीएजी ऑडिटर ने इस असंगति पर राज्य सरकार से बार-बार स्पष्टीकरण माँगा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यह विसंगति राहत वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव को उजागर करती है।
एक से अधिक बार मुआवज़ा पाने के मामले
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई लाभार्थियों को एक से अधिक बार मुआवज़ा भुगतान किया गया। ऐसे सर्वाधिक मामले दक्षिण 24 परगना ज़िले से मिले, जो अम्फान से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसके अलावा नदिया, पूर्वी मिदनापुर और पश्चिमी मिदनापुर ज़िलों में भी ऐसे मामले दर्ज किए गए।
गौरतलब है कि लाभार्थी सूची में दर्ज बैंक खाता नंबर और वास्तविक बैंक लेनदेन रिकॉर्ड के बीच भी भारी अंतर पाया गया। यह अंतर 1,44,175 लेनदेन में पाया गया, जिनकी कुल राशि ₹125.07 करोड़ थी।
डीबीटी प्रणाली में नियंत्रण की कमी
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, इन अनियमितताओं से स्पष्ट होता है कि लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया में गंभीर खामियाँ थीं। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली में एक से अधिक भुगतान रोकने के लिए आवश्यक नियंत्रण तंत्र का अभाव था, जिसके कारण अनेक लाभार्थियों को दोहरा लाभ मिला।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में राहत वितरण की पारदर्शिता पहले से ही सवालों के घेरे में रही है। आलोचकों का कहना है कि डीबीटी प्रणाली की यह विफलता केंद्र-राज्य राहत समन्वय में बड़ी संरचनात्मक कमज़ोरी को दर्शाती है।
अम्फान तूफान: पृष्ठभूमि
20 मई 2020 को सुपर साइक्लोन 'अम्फान' ने पश्चिम बंगाल के 16 ज़िलों में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें तटीय ज़िले सर्वाधिक प्रभावित हुए। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इस आपदा में 99 लोगों की मौत हुई और घरों, कृषि, मछली पालन, वनों, बिजली अवसंरचना, सिंचाई प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवाओं और उद्योगों को व्यापक नुकसान पहुँचा था।
आगे क्या होगा
सीएजी रिपोर्ट के विधानसभा में पेश होने के बाद अब राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर जाँच की माँग की है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन निष्कर्षों पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और क्या केंद्र सरकार अतिरिक्त राहत राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू करती है।