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कुशल डायमंड्स धोखाधड़ी: सीबीआई कोर्ट ने कंपनी व दो डायरेक्टरों को 5 साल की सजा, ₹30-30 लाख जुर्माना

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कुशल डायमंड्स धोखाधड़ी: सीबीआई कोर्ट ने कंपनी व दो डायरेक्टरों को 5 साल की सजा, ₹30-30 लाख जुर्माना

सारांश

26 साल की कानूनी लड़ाई के बाद अहमदाबाद की सीबीआई अदालत ने कुशल डायमंड्स लिमिटेड और उसके दो डायरेक्टरों को दोषी ठहराया — 5 साल की सजा और ₹30-30 लाख जुर्माना। एनएसआईसी के चारों सरकारी अधिकारी बरी हुए। ₹99,96,364 के कथित नुकसान पर आधारित यह फैसला सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग के मामलों में एक अहम नज़ीर है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद सीबीआई अदालत ने 8 सितंबर को मेसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड और दो डायरेक्टरों को आपराधिक साजिश व धोखाधड़ी का दोषी ठहराया।
बकुल जवेरी (CMD) और मजह एस.
कपाड़िया (डायरेक्टर) को 5-5 साल कठोर कारावास व ₹30-30 लाख जुर्माना ; कंपनी पर अलग से ₹30 लाख जुर्माना।
मामला 15 मार्च 2000 को दर्ज हुआ था; 8 जनवरी 2002 को 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई।
एनएसआईसी के चारों सरकारी अधिकारी — वीरेन्द्र कुमार सावनी , रोहित ढींगरा , राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा — सभी आरोपों से बरी ।
एनएसआईसी को कथित नुकसान ₹99,96,364 ; कुल वितरित राशि ₹2,34,85,081 थी।
आरोपी सुभाष छनाना का ट्रायल के दौरान निधन होने से उनका मामला समाप्त।

अहमदाबाद की सीबीआई विशेष अदालत ने 8 सितंबर 2026 को 26 साल पुराने धोखाधड़ी मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुंबई की निजी कंपनी मेसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड और उसके दो डायरेक्टरों को आपराधिक साजिश एवं धोखाधड़ी का दोषी ठहराया। कोर्ट ने कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बकुल जवेरी और डायरेक्टर मजह एस. कपाड़िया को 5-5 साल के कठोर कारावास एवं ₹30-30 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई। कंपनी पर अलग से ₹30 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

यह मामला नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (एनएसआईसी), अहमदाबाद से जुड़ा है। जाँच में सामने आया कि एनएसआईसी ने बिल डिस्काउंटिंग फैसिलिटी और रॉ मटेरियल असिस्टेंस स्कीम के तहत कुशल डायमंड्स लिमिटेड को ₹2,34,85,081 की राशि उपलब्ध कराई थी।

इस राशि में से ₹1,34,88,717 पुराने बकाए के समायोजन, चेक भुगतान, विदेशी खरीदार से प्राप्त राशि और अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट के रूप में एडजस्ट हो गए। 31 मार्च 1996 तक कंपनी पर अंतिम बकाया राशि ₹99,96,364 रही, जो एनएसआईसी को हुआ कथित वित्तीय नुकसान था।

सीबीआई की जाँच और चार्जशीट

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में 15 मार्च 2000 को प्राथमिकी दर्ज की थी। जाँच पूरी होने के बाद 8 जनवरी 2002 को 8 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई।

चार्जशीट में शामिल आरोपी थे — कंपनी कुशल डायमंड्स लिमिटेड, उसके तीन डायरेक्टर बकुल जवेरी, मजह एस. कपाड़िया और सुभाष छनाना, तथा एनएसआईसी के चार अधिकारी — तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर वीरेन्द्र कुमार सावनी, जॉइंट मैनेजर (फाइनेंस) रोहित ढींगरा, तत्कालीन रीजनल जनरल मैनेजर राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा

कोर्ट का फैसला और बरी हुए आरोपी

लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने कंपनी और उसके दो डायरेक्टरों — बकुल जवेरी एवं मजह एस. कपाड़िया — को दोषी ठहराया। वहीं, एनएसआईसी के चारों सरकारी अधिकारियों — वीरेन्द्र कुमार सावनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा — को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

तीसरे डायरेक्टर सुभाष छनाना का ट्रायल के दौरान निधन हो जाने के कारण उनके विरुद्ध मामला अदालत ने स्वतः समाप्त कर दिया। गौरतलब है कि यह मामला दर्ज होने से लेकर फैसले तक 26 वर्षों से अधिक समय तक चला।

आम जनता और व्यापारिक जगत पर असर

यह फैसला उन मामलों में एक महत्वपूर्ण नज़ीर है जहाँ सरकारी वित्तपोषण योजनाओं — विशेषकर लघु उद्योग सहायता कार्यक्रमों — का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी एजेंसियों की ऋण वितरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस जारी है।

क्या होगा आगे

दोषी डायरेक्टरों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। जुर्माने की वसूली और कारावास की प्रक्रिया अदालत के आदेशानुसार आगे बढ़ेगी। सीबीआई की ओर से इस फैसले को कानून की जीत बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो न्याय में दशकों लग जाते हैं। एनएसआईसी के सभी चार सरकारी अधिकारियों का बरी होना एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है: अदालत को निजी कंपनी और सरकारी तंत्र की मिलीभगत के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। 26 साल की यह कानूनी प्रक्रिया खुद न्यायिक व्यवस्था की गति पर सवाल उठाती है — जब तक फैसला आता है, कई आरोपी या तो चल बसते हैं या सज़ा का व्यावहारिक असर सीमित हो जाता है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुशल डायमंड्स मामले में सीबीआई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
अहमदाबाद की सीबीआई विशेष अदालत ने 8 सितंबर को मेसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड और उसके दो डायरेक्टरों — बकुल जवेरी और मजह एस. कपाड़िया — को आपराधिक साजिश व धोखाधड़ी का दोषी ठहराया। दोनों डायरेक्टरों को 5-5 साल कठोर कारावास और ₹30-30 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गई, जबकि कंपनी पर ₹30 लाख का अलग जुर्माना लगाया गया।
इस धोखाधड़ी मामले में एनएसआईसी को कितना नुकसान हुआ था?
जाँच के अनुसार, एनएसआईसी ने कुशल डायमंड्स लिमिटेड को बिल डिस्काउंटिंग और रॉ मटेरियल असिस्टेंस स्कीम के तहत ₹2,34,85,081 दिए थे। 31 मार्च 1996 तक कंपनी पर अंतिम बकाया ₹99,96,364 था, जो एनएसआईसी को हुआ कथित वित्तीय नुकसान माना गया।
एनएसआईसी के अधिकारियों का इस मामले में क्या हुआ?
एनएसआईसी के चारों सरकारी अधिकारियों — वीरेन्द्र कुमार सावनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा — को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। ट्रायल में उनके विरुद्ध आपराधिक साजिश के पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए।
यह मामला इतने लंबे समय तक क्यों चला?
सीबीआई ने यह मामला 15 मार च 2000 को दर्ज किया था और 8 जनवरी 2002 को 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। आरोपियों की संख्या, गवाहों की जाँच और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते फैसला आने में 26 से अधिक वर्ष लग गए — जो भारत में जटिल वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में न्यायिक देरी का एक सामान्य पैटर्न है।
तीसरे डायरेक्टर सुभाष छनाना का मामला क्या हुआ?
कंपनी के तीसरे आरोपी डायरेक्टर सुभाष छनाना का ट्रायल के दौरान निधन हो गया। उनके निधन के कारण अदालत ने उनके विरुद्ध मामला स्वतः समाप्त कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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