मुंबई में हीरा व्यापार से जुड़े 34.75 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला, ईओडब्ल्यू कर रही है जांच
सारांश
Key Takeaways
- धोखाधड़ी का मामला: 34.75 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई।
- ईओडब्ल्यू की कार्रवाई: मामले की जांच जारी है।
- शिकायतकर्ता का दावा: साजिश के तहत डायमंड्स हड़पे गए।
- फर्जी दस्तावेज: आरोपियों ने फर्जी हस्ताक्षरों और लोगो का इस्तेमाल किया।
- आर्थिक प्रभाव: व्यापार में विश्वास को प्रभावित कर सकता है।
मुंबई, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई में हीरा व्यापार से जुड़ी एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए सोलिटेरियो लैब ग्रोन प्राइवेट लिमिटेड और इसके निदेशक रिकी वासंदानी सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 336(2), 340(2) और धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि आरोपियों ने एक कारोबारी से लगभग 34,75,00,736 रुपए मूल्य के लैब-ग्रोन डायमंड्स धोखे से हड़प लिए।
शिकायतकर्ता, क्यूपिड डायमंड्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक निमेष पीयूष मेहता (58) के अनुसार, यह पूरी साजिश बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में स्थित भारत डायमंड बोर्स के टॉवर बीसी में रची गई। आरोपी रिकी वासंदानी ने शिकायतकर्ता को अपनी नई कंपनी में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का झांसा दिया। भरोसे में लेकर एक 'शेयर सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट' साइन कराया गया, जो बाद में जांच के दौरान कानूनी रूप से कमजोर और अधूरा पाया गया।
इसी कथित साझेदारी के आधार पर क्यूपिड डायमंड्स ने बड़ी मात्रा में कीमती लैब-ग्रोन डायमंड आरोपियों को सौंप दिए। जब भुगतान का समय आया तो आरोपियों ने कथित तौर पर योजनाबद्ध तरीके से पैसे देने से इनकार कर दिया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने भुगतान के लिए पोस्ट डेटेड चेक दिए, लेकिन बाद में बैंक को 'स्टॉप पेमेंट' के निर्देश दे दिए। कुछ चेक पर जानबूझकर गलत हस्ताक्षर किए गए ताकि वे बाउंस हो जाएं।
आरोप है कि कंपनी के निदेशक मिलन शाह के फर्जी हस्ताक्षर तैयार किए गए और कंपनी का नकली लोगो व स्टैंप बनाया गया। जब डायमंड्स वापस करने का नाटक किया गया तो पार्सल में मूल डायमंड्स के बजाय कम गुणवत्ता और अलग स्पेसिफिकेशन वाले हीरे लौटाए गए।
मामले को बीकेसी थाना पुलिस से मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को ट्रांसफर कर दिया गया है। अब ईओडब्ल्यू इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है।