10 अगस्त 2026
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अहमदाबाद में ₹10.36 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी: CA दंपती गिरफ्तार, सेवानिवृत्त इंजीनियर को बनाया शिकार

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अहमदाबाद में ₹10.36 करोड़ की निवेश धोखाधड़ी: CA दंपती गिरफ्तार, सेवानिवृत्त इंजीनियर को बनाया शिकार

सारांश

अहमदाबाद में एक CA दंपती ने अपने ही करीबी रिश्तेदार, एक सेवानिवृत्त इंजीनियर, का भरोसा तोड़कर शेयर बाज़ार में फर्जी निवेश योजना, जाली दस्तावेज़ और डिजिटल सिग्नेचर के दुरुपयोग से ₹10.36 करोड़ हड़प लिए। EOW ने दोनों को गिरफ्तार कर 21 जून तक हिरासत में भेजा।

मुख्य बातें

अहमदाबाद EOW ने 17 जून 2026 को CA दंपती जय नायक (32) और बोस्की नायक (34) को गिरफ्तार किया।
आरोपियों पर शेयर बाज़ार में फर्जी स्कीम के ज़रिए ₹10,36,15,516 की धोखाधड़ी का आरोप है।
पीड़ित सेवानिवृत्त इंजीनियर कौशलकुमार नायक ने 2021–2025 के बीच लगभग ₹5 करोड़ निवेश किए; रिश्तेदारों ने ₹4.5 करोड़ अतिरिक्त लगाए।
आरोपियों ने ICICI बैंक का नकली सर्टिफिकेट बनाया, जिसमें ₹90 करोड़ से अधिक का झूठा बैलेंस दिखाया।
दोनों आरोपियों को 21 जून 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया; बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेज़ों की जाँच जारी।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने 17 जून 2026 को एक चार्टर्ड अकाउंटेंट दंपती को गिरफ्तार किया, जिन पर शेयर बाज़ार में फर्जी निवेश योजना चलाकर एक सेवानिवृत्त इंजीनियर और उनके रिश्तेदारों से कथित तौर पर ₹10.36 करोड़ से अधिक की ठगी करने का आरोप है। आरोपियों ने डिजिटल सिग्नेचर के दुरुपयोग, जाली वित्तीय दस्तावेज़ों और नकली कंपनियों के ज़रिए यह धोखाधड़ी अंजाम दी।

आरोपी कौन हैं

गिरफ्तार दंपती की पहचान जैवलिन उर्फ जय नायक (32) और उनकी पत्नी बोस्की नायक (34) के रूप में हुई है। दोनों पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और गांधीनगर के सरगासन इलाके में रहते हैं। पुलिस के अनुसार, ये दोनों शिकायतकर्ता कौशलकुमार नायक के करीबी रिश्तेदार हैं और कथित तौर पर इसी पारिवारिक भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें निशाना बनाया।

धोखाधड़ी का तरीका

2022 से 2025 के बीच आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता के बैंक खाते की जानकारी हासिल की और उनके खाते से ₹5,91,91,448 ट्रांसफर करवाए। इसके अलावा, अधिक रिटर्न का वादा कर शिकायतकर्ता के रिश्तेदारों से भी ₹4,44,24,068 ट्रांसफर कराए गए। इस प्रकार आरोपियों के नियंत्रण वाले खातों में कुल ₹10,36,15,516 की राशि पहुँची।

जाँच में सामने आया कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता के पैन कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, ई-सिग्नेचर, बिजली बिल, टैक्स बिल और पारिवारिक संपत्ति के दस्तावेज़ों का दुरुपयोग कर नकली कंपनियाँ बनाईं और बैंक खाते खुलवाए। इनमें इन्फोटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी भी शामिल है, जिसमें शिकायतकर्ता को बिना जानकारी के निदेशक बनाया गया।

जाली दस्तावेज़ों का जाल

एक अधिकारी के अनुसार, आरोपियों ने नकली स्टैम्प और लेटरहेड का उपयोग कर ICICI बैंक का एक फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किया, जिसमें ₹90,21,73,737 का बैलेंस दर्शाया गया था। इसके साथ एक नकली ट्रांज़ेक्शन स्लिप भी थी, जिसमें ₹50 लाख क्रेडिट होने का झूठा दावा किया गया। इसके अलावा, 'हमिदराजा' और एंजेल ब्रोकिंग के नाम से फर्जी ईमेल भेजकर एंजेल वन खाते से ₹2.25 करोड़ की निकासी का झूठा दावा भी किया गया।

कुल राशि में से ₹2,37,40,294 को शिकायतकर्ता के एंजेल वन डिमैट खाते में निवेश दिखाया गया, जबकि शेष ₹7,98,75,222 और शिकायतकर्ता व उनकी पत्नी के म्यूचुअल फंड के ₹5.55 लाख — कुल ₹8,04,30,222 — आरोपियों ने अपने नियंत्रित खातों में स्थानांतरित कर लिए।

पुलिस का बयान

सहायक पुलिस आयुक्त मनोज चावड़ा ने बताया कि शिकायतकर्ता एक सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं, जो करीब छह महीने पहले रिटायर हुए थे। उन्होंने 2021 से 2025 के बीच लगभग ₹5 करोड़ निवेश किए, जबकि उनके रिश्तेदारों ने लगभग ₹4.5 करोड़ लगाए। चावड़ा ने बताया, 'जब शिकायतकर्ता को अपनी बेटी की अमेरिका में पढ़ाई के लिए पैसों की ज़रूरत पड़ी, तो आरोपियों ने फर्जी बैंक रसीदें और झूठे आश्वासन दिए, जो जाँच में गलत पाए गए।'

उन्होंने आगे कहा, 'वे लगातार नुकसान और लंबित भुगतान का बहाना बनाते रहे, लेकिन कोई पैसा वापस नहीं किया। अंततः इनकार करने पर EOW में शिकायत दर्ज की गई और गिरफ्तारी हुई।'

आगे की जाँच

इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की कई टीमें बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और दस्तावेज़ों की विस्तृत जाँच में जुटी हैं। दोनों आरोपियों को 21 जून 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि पारिवारिक भरोसे का दुरुपयोग कर किए जाने वाले वित्तीय अपराध कितने गहरे और जटिल हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पेशेवर विश्वसनीयता के दुरुपयोग की चेतावनी है — दो चार्टर्ड अकाउंटेंट, जो कानूनी तौर पर वित्तीय ईमानदारी के प्रतीक माने जाते हैं, ने अपनी पेशेवर समझ का इस्तेमाल परिवार को लूटने में किया। गौरतलब है कि डिजिटल सिग्नेचर और जाली KYC दस्तावेज़ों के ज़रिए नकली कंपनियाँ बनाने की यह पद्धति देशभर में बढ़ती वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की एक बड़ी प्रवृत्ति का हिस्सा है। सेवानिवृत्त व्यक्तियों को निशाना बनाना — जब वे जीवनभर की बचत को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे होते हैं — इस अपराध को और गंभीर बनाता है। नियामकों और बैंकों को यह सवाल पूछना होगा कि नकली KYC से खुले खातों और शेल कंपनियों को इतने लंबे समय तक कैसे नज़रअंदाज़ किया गया।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में CA दंपती पर क्या आरोप हैं?
जय नायक और बोस्की नायक पर शेयर बाज़ार में फर्जी निवेश योजना चलाकर, डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग कर और जाली वित्तीय दस्तावेज़ बनाकर अपने करीबी रिश्तेदार व उनके परिजनों से कथित तौर पर ₹10.36 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है। दोनों को अहमदाबाद EOW ने 17 जून 2026 को गिरफ्तार किया।
धोखाधड़ी की रकम कैसे हड़पी गई?
आरोपियों ने 2022–2025 के बीच शिकायतकर्ता के बैंक खाते से ₹5,91,91,448 और उनके रिश्तेदारों से ₹4,44,24,068 ट्रांसफर कराए। इसके लिए नकली कंपनियाँ बनाई गईं, फर्जी बैंक सर्टिफिकेट तैयार किए गए और पीड़ित के डिजिटल सिग्नेचर का बिना अनुमति उपयोग किया गया।
शिकायतकर्ता को कैसे पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है?
जब शिकायतकर्ता को अपनी बेटी की अमेरिका में पढ़ाई के लिए पैसों की ज़रूरत पड़ी, तो आरोपियों ने फर्जी बैंक रसीदें और झूठे आश्वासन दिए। जाँच में ये दस्तावेज़ नकली पाए गए और जब भुगतान से इनकार किया गया, तब EOW में शिकायत दर्ज की गई।
आरोपियों ने कौन-से जाली दस्तावेज़ इस्तेमाल किए?
आरोपियों ने ICICI बैंक का नकली सर्टिफिकेट बनाया जिसमें ₹90,21,73,737 का झूठा बैलेंस दिखाया गया, एक फर्जी ट्रांज़ेक्शन स्लिप जिसमें ₹50 लाख क्रेडिट दिखाए गए, और 'हमिदराजा' व एंजेल ब्रोकिंग के नाम से फर्जी ईमेल भेजे। पीड़ित के पैन, आधार, राशन कार्ड और संपत्ति दस्तावेज़ों का भी दुरुपयोग किया गया।
आरोपी अभी किस हिरासत में हैं और आगे क्या होगा?
दोनों आरोपियों को 21 जून 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। EOW की कई टीमें बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और दस्तावेज़ों की जाँच कर रही हैं। मामले में आर्थिक अपराध शाखा के तहत एफआईआर दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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