चंद्रनाथ रथ हत्याकांड: सीबीआई ने दिल्ली के स्वरूप नगर में की छापेमारी, संदिग्ध फरार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शनिवार, 16 मई को नई दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में चंद्रनाथ रथ हत्याकांड के एक प्रमुख संदिग्ध की तलाश में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) रथ की हत्या 6 मई की रात मध्यमग्राम में हुई थी — ठीक उस दिन जब राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले थे।
छापेमारी का घटनाक्रम
सीबीआई की टीम ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ मिलकर स्वरूप नगर में दो अलग-अलग ठिकानों पर कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, जिस संदिग्ध की तलाश की जा रही थी, वह दोनों स्थानों पर नहीं मिला। जांच एजेंसी ने तलाशी पूरी होने के बाद संदिग्ध के पिता को नोटिस सौंपा और उन्हें निर्देश दिया कि आरोपी को जांच में सहयोग के लिए पेश किया जाए।
मयंक राज मिश्रा के खुलासे
सूत्रों के अनुसार, मामले में पहले से गिरफ्तार तीन आरोपियों में से एक मयंक राज मिश्रा ने पूछताछ में कई अहम जानकारियाँ दी हैं। उसने बताया कि झारखंड के एक व्यक्ति ने उसे हत्या में इस्तेमाल की गई चारपहिया गाड़ी को झारखंड से उत्तर 24 परगना जिले के बारासात तक पहुँचाने का काम सौंपा था।
मिश्रा ने स्वीकार किया कि उसने गाड़ी बारासात में एक सुनसान स्थान पर खड़ी करके उसकी नंबर प्लेट बदल दी। जांच में पता चला कि असली नंबर प्लेट दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी आरटीओ में पंजीकृत थी। इस काम के बदले उसे ₹1 लाख दिए गए थे। इसके बाद वह हावड़ा स्टेशन से ट्रेन पकड़कर बक्सर चला गया, जहाँ उसे गिरफ्तार किया गया।
हत्या की रात का घटनाक्रम
6 मई की रात चंद्रनाथ रथ एक पार्टी कार्यक्रम से लौट रहे थे। मध्यमग्राम इलाके में उनकी गाड़ी को झारखंड से लाई गई कार ने रोका। इसी दौरान काफी देर से पीछा कर रही दो मोटरसाइकिलों में से एक उनके वाहन के पास आई और हमलावर ने बेहद करीब से 10 गोलियाँ चला दीं। रथ की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि उनके चालक बुद्धदेव बेरा गंभीर रूप से घायल हुए — हालाँकि अब उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
जांच की स्थिति और आगे की दिशा
सीबीआई अब हत्या में इस्तेमाल गाड़ी की पूरी यात्रा, आरोपियों के नेटवर्क और साजिश की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। यह हत्याकांड राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील है क्योंकि यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों से ठीक दो दिन पहले हुई। गौरतलब है कि राज्य में चुनाव-पश्चात हिंसा की घटनाएँ पहले भी चर्चा का विषय रही हैं, और यह मामला उसी संदर्भ में गहन जांच के दायरे में है।